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पीजीआई पैरासिटोलॉजी विभाग ने जीते 5 पुरस्कार

Wed, 16 Nov 2022 08:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2022 08:30 AM IST
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PGI Parasitology department won 5 awards
चंडीगढ़। पीजीआई पैरासिटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों और छात्रों ने अलग-अलग राष्ट्रीय सम्मेलनों में पांच विशेष पुरस्कार प्राप्त कर संस्थान का मान बढ़ाया है। इन्हें परजीवी पर किए विशेष शोध कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। चेन्नई में 10 से 12 नवंबर तक आयोजित 31वें राष्ट्रीय कांग्रेस में विभाग ने तीन पुरस्कार हासिल किए हैं।
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राष्ट्रीय सम्मेलन में पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्रा दिव्या रतन विभाग के प्रमुख प्रो. राकेश सहगल, डॉ. प्रिया दत्ता, डॉ. उपिन्दर कौर और डॉ. ऊषा दत्ता के मार्गदर्शन में महामारी विज्ञान में योगदान देने वाले पर्यावरणीय कारकों और टोक्सोप्लाज्मा गोंडी संक्रमण के प्रसार पर काम कर रही हैं। यह गर्भवती महिलाओं में भ्रूण के संक्रमण और गर्भपात का एक महत्वपूर्ण कारण है।
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दिव्या ने पशु चिकित्सा और सामान्य परजीवी विज्ञान पर आधारित मौखिक प्रस्तुति सत्र में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। वह आणविक तकनीकों के माध्यम से भारत के विभिन्न पर्यावरणीय नमूनों में टी. गोंडी की उपस्थिति का पता लगाने वाली पहली महिला हैं। यह भारत में अपने तरह का पहला कार्य है। इसमें पर्यावरणीय नमूनों में टोक्सोप्लाज्मा पाया गया है। वहीं विभाग की पीएचडी छात्रा देवयानी शर्मा को विभिन्न नैदानिक समूहों में एंटामोइबा संक्रमण (एक परजीवी जो गंभीर पेचिश और यकृत फोड़ा : जिसे अमीबायसिस भी कहा जाता है) के निदान पर काम करने पर रोग निदान और नियंत्रण श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला है। वहीं डॉ. नेहा वाल्टर को परजीवी संक्रमण में किए गए कार्य के लिए सम्मेलन में तीसरा पुरस्कार मिला।
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इंडियन एकेडमी ऑफ ट्रॉपिकल पैरासिटोलॉजी में भी दो पुरस्कार
इंडियन एकेडमी ऑफ ट्रॉपिकल पैरासिटोलॉजी का राष्ट्रीय सम्मेलन 12 नवंबर को एसवीआईएमएस-श्री पद्मावती मेडिकल कॉलेज फॉर वुमन तिरुपति में आयोजित किया गया। प्रो. राकेश सहगल के मार्गदर्शन में विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रिया दत्ता को गर्भवती महिलाओं में परजीवी टोक्सोप्लाज्मा गोंडी के निदान के लिए कई तकनीकों के उपयोग पर उनके पेपर के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह परजीवी गर्भवती महिलाओं में सहज गर्भपात और भ्रूण में जन्मजात असामान्यताओं का कारण बनता है। यह स्त्री रोग विभाग, पीजीआई के साथ चल रही एक सहयोगी परियोजना है। डॉ. तरुणा कौरा को मलेरिया निदान के लिए कृत्रिम बुद्धि के उपयोग पर उनके काम के लिए द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह प्रो. राकेश सहगल और डॉ. अभिषेक मेवाड़ा के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पंजाब के डॉ. जीएस ग्रोवर और सीएसआईओ चंडीगढ़ की टीम के साथ चल रहा एक सहयोगी अध्ययन है।
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