फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   pgi new planing for crowding

PGI आने वाले ध्यान दें, भीड़ से निपटने के लिए ये है प्लानिंग

Sun, 09 Apr 2017 09:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 09 Apr 2017 09:24 AM IST
विज्ञापन
pgi new planing for crowding
पीजीआई में सुविधा
लगातार बढ़ रही मरीजों की भीड़ से निपटने के लिए पीजीआई ने अब नया प्लान बनाया है। भीड़ से निपटने के लिए PGI नई प्लानिंग कर रहा है। पीजीआई का मानना है कि यदि दूसरे प्रदेश से आने वाले मरीजों को वहीं पर इलाज मिल जाए तो काफी हद तक संस्थान के बोझ को कम कर सकते हैं। इसके लिए वहां के डॉक्टरों को ट्रेंड करना जरूरी होगा। पीजीआई की ओर से बनाए गए प्रस्ताव के मुताबिक एमडी-एमएस के स्पांसर कैंडिडेट के कोटे को बढ़ाया जाए।
विज्ञापन


आसपास के प्रदेशों की सरकारें अपने कुछ डाक्टरों को पीजीआई एमडी व एमएस के कोर्स करवाने के लिए पीजीआई भेजती हैं। पीजीआई में एमडी व एमएस की कुल 700 सीटें हैं। इनमें सें 30 प्रतिशत कोटा स्पांसर कैंडिडेट का होता है। आइडिया है कि स्पांसर कैंडिडेट के कोटे को 40-45 प्रतिशत किया जाए ताकि ज्यादा लोगों को ट्रेंड किया जा सके और वे सेवाएं अपने स्टेट में दे, ताकि मरीजों को वही पर इलाज मिल सके।
विज्ञापन


एडवांस ट्रेनिंग कोर्स देने का भी प्रस्ताव
एडवांस आई सेंटर के प्रोफेसर एमआर डोगरा ने बताया कि सिविल अस्पताल में काम करने वाले डाक्टरों को तीन से छह महीने की एडवांस ट्रेनिंग दी जाए। उन्हें पीजीआई में ही रोका जाए और यहां के डाक्टर उन्हें ट्रेंड करें। इससे उन्हें स्पेशलाइजेशन की ट्रेनिंग मिलेगी और वे मरीजों का वहीं पर इलाज कर पाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि ट्रेनिंग के दौरान डाक्टरों के ठहरने और उनके खाने-पीने के खरचे को राज्य सरकार के द्वारा वहन करने पर विचार किया जा रहा है। पीजीआई का कहना है कि इस प्रपोजल पर काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही राज्य सरकारों को प्रपोजल से अवगत करा दिया जाएगा।

 

इतनी बढ़ गई है मरीजों की भीड़

pgi new planing for crowding
भीड़ से निपटने के लिए पीजीआई का नया प्लान
पीजीआई में भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल ओपीडी में दो लाख मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। साल 2016 की ओपीडी में कुल 26 लाख मरीज आए थे। साल 2015 में 24 लाख और उससे पहले साल 23 लाख मरीजों की हाजिरी दर्ज हुई थी। इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट की ओपीडी रात आठ बजे तक चलती है।

इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर में अमूमन इलाज के लिए कम से कम आठ से दस घंटे का इंतजार करना पड़ता है। आज से पहले जिन ओपीडी में रोजाना 200 मरीज आते थे, आज उसमें रोजाना दो हजार से ज्यादा मरीज आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed