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व्हाट्सअप पर जुड़िए पीजीआई के डाक्टरों के साथ

Mon, 23 Dec 2013 04:29 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 23 Dec 2013 04:29 PM IST
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पीजीआई के लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए टेलीमेडिसिन विभाग को मैसेंजर व्हाट्सअप ने पछाड़ दिया है।
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टेलीमेडिसिन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए जरूरी इंफ्रास्टक्चर की आवश्यकता होती है, लेकिन व्हाट्सअप के लिए एक मामूली स्मार्टफोन की जरूरत होती है। रूरल एरिया और पेराफेरी पर बैठे डॉक्टरों के अलावा मरीज भी इस टेक्नोलॉजी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं।

वे एक्सरे, एमआरआई, सर्जरी की फोटो और अन्य रिपोर्ट भेजकर पीजीआई, जीएमसीएच-32 व अन्य मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं और मरीजों को सीधा फायदा पहुंचा रहे।
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पीजीआई के इंटरनल जरनल में प्रकाशित एक आर्टिकल में भी बताया गया कि है कि स्मार्टफोन न्यू मेडिसिन के रूप ले रहा है।

ऐसे फायदा उठा रहे मरीज
सीनियर कोलेरेक्टल सर्जन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि उनके कई मरीज विदेश में रहने वाले हैं। पहले वे अपनी रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से देते थे। ई-मेल के लिए पहले कंप्यूटर खोलना पड़ता था।
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इसमें समय भी काफी खर्च होता था। ईमेल में एक्सरे और एमआरआई की फोटो क्वालिटी में इतनी सटीक नहीं होती थी, लेकिन व्हाट्सअप में ऐसी कोई दुविधा नहीं है।

इसमें फोटो क्वालिटी इतनी सटीक होती है कि आप बहुत ही स्पष्ट तरीके से इसे देख सकते हैं।

छोटे-छोटे जिलों के डॉक्टर भी उठा रहे फायदा
पीजीआई से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया कि छोटे-छोटे जिलों के डॉक्टरों को पीजीआई और दूसरे मेडिकल कॉलेज से अपने कई केस में सलाह लेनी होती तो वह व्हाट्सअप का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

इसी पर वे ईसीजी और एक्सरे की रिपोर्ट भेजते हैं और उन्हें ओपिनियन दे दी जाती है। इससे समय बचता है और तुरंत विशेषज्ञों की राय मिल जाती है।

टेलीमेडिसिन से बेहतर है व्हाट्सअप

पीजीआई ने दूर दराज बैठे मरीजों को सहूलियत देने के लिए टेलीमेडिसिन सेंटर खोला था। इसमें दिक्कत यह आती है कि ऐन वक्त पर मरीज डॉक्टर से कनेक्ट नहीं हो सकते।

इसके लिए पहले समय दर्ज करवाना होगा। उसके बाद ही डॉक्टर मरीज को देख सकेंगे। इसके विपरीत व्हाट्सअप पर तुरंत परामर्श ले सकते हैं।

व्हाट्सअप डाक्टरों व मरीजों के लिए बहुत अच्छी टेक्नोलॉजी है। इससे मरीज को बहुत कम समय में परामर्श मिल जा रहा है। कई मरीजों के लिए यह वरदान भी साबित हो रहा है।

-रवि गुप्ता, प्रोफेसर आर्थोपेडिक ,जीएमसीएच-32

व्हाट्सअप से विदेश में बैठे मरीज भी अपनी रिपोर्ट भेज रहे हैं। डॉक्टर भी एक-दूसरे को अपनी रिपोर्ट भेजकर तुरंत ओपिनियन लेना का फायदा उठा रहे। इसे एक क्रांति भी कहा जा सकता है। कई इमरजेंसी केसों में भी व्हाट्सअप ने मरीजों की जान बचाई है।
-डॉ. पंकज गर्ग, सीनियर कोलेरेक्टल सर्जन
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