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पीजीआई का ऐसा हाल, हड़ताल पर डॉक्टर, 5000 से ज्यादा मरीज बिना इलाज के लौटे

Tue, 23 Aug 2016 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 23 Aug 2016 12:28 AM IST
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PGI dotors strikes, around 5000 patient Returned without treatment
PGI Doctors Strike - फोटो : Amar ujala
साथी डॉक्टरों को पीटे जाने से गुस्साए रेजिडेंट डॉक्टर सोमवार को हड़ताल पर चले गए। पूरा दिन डॉक्टर परिसर में पीजीआई प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इससे ओपीडी के करीब पांच हजार पेशेंट को बिना इलाज के लौटना पड़ा है। इसमें कुछ ऐसे पेशेंट थे, जो काफी गंभीर थे और दूर-दराज के इलाकों से आए थे।
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रेजिडेंट डॉक्टरों की छह सूत्रीय मांगे थी, जिन्हें देर शाम पीजीआई प्रशासन ने मान ली थी। हालांकि इसके बावजूद रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म नहीं की है। रविवार को रात लुधियाना की हरजिंदर कौर की पीजीआई इमरजेंसी में मौत हो गई थी। आरोप था कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने उनके इलाज में लापरवाही बरती। इससे गुस्साए हरजिंदर कौर के बेटे हरप्रीत ने डॉक्टर मणि को पीट दिया था। इससे रेजिडेंट डॉक्टर नाराज हो गए।
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रेजिडेंट डॉक्टर सोमवार देर रात तक अपनी जिद पर अड़े रहे। उनका कहना है कि आश्वासन पहले भी दिए जाते रहे हैं। जब तक  उनकी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक हड़ताल खत्म नहीं होगी। एहतियात के तौर पर पीजीआई ने भी सिर्फ एक घंटे रजिस्ट्रेशन काउंटर खोलने का फैसला लिया है, ताकि उतने ही मरीज देखे जा सकें, जितने डॉक्टर होंगे। इसलिए मरीज मंगलवार को भी पीजीआई की ओपीडी में जाने से बचें।
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रात में दो घंटे ठप रही इमरजेंसी, एंबुलेंस वापस भेजीं

PGI dotors strikes, around 5000 patient Returned without treatment
PGI Doctors Strike - फोटो : Amar ujala
गुस्साए रेजिडेंट डॉक्टरों ने रात में ही इमरजेंसी ठप कर दी। सभी डॉक्टर बाहर आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। उसके बाद पीजीआई के मुख्य गेट को बंद कर दिया गया। करीब दो घंटे तक  एंबुलेंस नहीं आने दीं गईं। इसमें कई गंभीर पेशेंट थे, जिन्हें जीएमएसएच 16 या जीएमसीएच 32 में भेजा गया।

हालांकि सिक्योरिटी गार्ड्स ने कुछ एंबुलेंस को आगे वाले गेट से अंदर आने का मैसेज दिया। लेकिन जब वे अंदर आए तो इमरजेंसी में उन्हें इलाज नहीं मिला। इस दौरान सीनियर डॉक्टर गुहार लगाते रहे, लेकिन रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक भी नहीं सुनी। इस दौरान पीजीआई डायरेक्टर व अन्य सीनियर डॉक्टरों ने मनाने की कोशिश की, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने एक नहीं सुनीं।

सिर्फ एक घंटे बने कार्ड, मरीज गिड़गिड़ाए

PGI dotors strikes, around 5000 patient Returned without treatment
PGI Doctors Strike - फोटो : Amar ujala
सुबह चार बजे तक विरोध जताने के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल की घोषणा कर दी। सोमवार होने के कारण पीजीआई में मरीजों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। उन्हें हड़ताल के बारे में बिल्कुल पता नहीं था। हरियाणा, पंजाब व हिमाचल के दूर-दराज क्षेत्रों से आए मरीज सुबह तड़के ही ओपीडी पहुंच गए।

सिर्फ नौ बजे तक मरीजों के कार्ड बनाए गए। उसके बाद रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद कर दिए गए। कुछ गंभीर मरीजों ने रजिस्ट्रेशन काउंटर में गुहार लगाई, लेकिन एक भी नहीं सुनी गई। रजिस्ट्रेशन न होने की स्थिति में उन्हें वापस जाना पड़ा। इससे आसपास और पीजीआई कैंपस के सभी रोड जाम हो गए।

पीजीआई की न्यू ओपीडी में रोजाना दस हजार मरीज आते हैं। पीजीआई का दावा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए सिर्फ एक घंटे रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले गए। ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी न आए। इस दौरान 4110 पेशेंट ने रजिस्टर्ड कराया। इनमें से नए 1124 थे, बाकी पुराने पेशेंट थे। हालांकि पीजीआई के सभी डिपार्टमेंट की इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर सुचारु रूप से चले। इस दौरान करीब 1700 सैंपल जांचे गए। 230 एक्स-रे, 26 सीटी स्कैन व 50 एमआरआई किए गए। 1500 जूनियर डॉक्टरों में से सिर्फ 100 डाक्टर ऑन ड्यूटी पर रहे।
 
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