बेहोशी की दवा से मौत का मामला: पीजीआई कमेटी ने सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट, प्रशासन ने साधी चुप्पी
बेहोशी की दवा से मौत के मामले सामने आने पर यूटी प्रशासन ने पीजीआई में मौजूद उस दवा के स्टॉक को जब्त कर जांच के लिए नमूना भेजा था। जांच रिपोर्ट में दवा में कई स्तर पर कमियां मिली थीं।
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चंडीगढ़ पीजीआई में बेहोशी की दवा से मौत के मामले की क्लीनिकल जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट संस्थान के निदेशक को सौंप दी है लेकिन रिपोर्ट मिलने के 48 घंटे बाद भी पीजीआई प्रशासन खुलासा नहीं कर रहा है। बचाव के लिए कहा जा रहा है कि व्यस्तता के कारण अब तक रिपोर्ट का आंकलन नहीं किया जा सका।
पीजीआई में बेहोशी की दवा प्रोपोफोल से पांच मरीजों की मौत के मामले में दवा की जांच के लिए पीजीआई प्रशासन ने 26 अगस्त को एक कमेटी गठित की थी। इसमें न्यूरो सर्जरी व एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख की देखरेख में जांच प्रक्रिया पूरी की जानी थी जिसमें मौत के कारणों का पता लगाना था।
जब्त किए गए थे स्टॉक
बेहोशी की दवा से मौत के मामले सामने आने पर यूटी प्रशासन ने पीजीआई में मौजूद उस दवा के स्टॉक को जब्त कर जांच के लिए नमूना भेजा था। जांच रिपोर्ट में दवा में कई स्तर पर कमियां मिली थीं। ड्रग इंस्पेक्टर ने प्रोपोफोल के साथ नियॉन कंपनी की एक दवा का नमूना लिया था लेकिन वह नमूना भी मानक पर खरा नहीं उतरा। अचानक लिए गए नमूने के भी फेल होने से साबित होता है कि गुणवत्ता के मानकों से खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए पीजीआई प्रशासन को अपने स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था करने की जरूरत है।
कंपनियों से अब भी आपूर्ति जारी
इस मामले में निक्सी और नियॉन लैब में बन रही बेहोशी की दवा के जांच के नमूने फेल हो चुके हैं। इसकी पुष्टि 26 सितंबर को आई रिपोर्ट में की जा चुकी है। चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में जांच के दौरान दोनों नमूनों में गड़बड़ियां पाई गईं थीं। सूत्रों का कहना है कि नमूने फेल होने के बावजूद कंपनियां दवाओं की आपूर्ति कर रही हैं। पीजीआई में संबंधित कंपनी से अब भी कई तरह की दवाइयां पहुंच रही हैं, जिसका उपयोग भी किया जा रहा है।
बेहोशी की दवा प्रकरण में गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट निदेशक को सौंप दी है लेकिन अब तक उसका आंकलन नहीं किया गया है इसलिए अभी उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। -कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई