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पीजीआई चंडीगढ़ का कमाल: आठ साल में 53 लोगों को दी नई जिंदगी, देशभर में जरूरतमंदों तक भेजे अंग, ग्रीन कॉरिडोर बना सहारा

Wed, 13 Apr 2022 10:50 AM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 13 Apr 2022 10:50 AM IST
सार

रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर बनाने और उसकी सफलता में पीजीआई के डॉक्टरों की टीम, कमेटी, रोटो की टीम, ट्रैफिक पुलिस, चंडीगढ़ के साथ मोहाली पुलिस के अलावा एयरपोर्ट प्रशासन का योगदान रहता है।

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PGI Chandigarh saved 53 lives through organ donation campaign
पीजीआई से अंग लेकर निकलती टीम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रीन कॉरिडोर से पीजीआई ने आठ साल में 52 लोगों को जीवनदान दिया है। संस्थान मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा मुहैया कराने के साथ अंगदान अभियान को सफलता के पायदान पर आगे बढ़ा रहा है। पीजीआई अंगदान से मिले अंगों को प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को प्रत्यारोपित करने के साथ ग्रीन कॉरिडोर के जरिए देश के कोने-कोने में भी भेज रहा है ताकि दान में मिला एक भी अंग बेकार न जाए। 

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संस्थान ने समय रहते ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अंग को उसकी मैचिंग के मरीज तक पहुंचाया भी है। अंगदान के लिए ग्रीन कॉरिडोर की परिकल्पना सिटी ब्यूटीफुल में 2013 में ही साकार हो गई थी। उस दौरान देश में पहली बार एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ के 21 वर्षीय युवक के दिल और लिवर को दिल्ली भेजा गया था। उसके बाद पीजीआई ने इस क्रम को जारी रखने का प्रयास शुरू किया। इसमें नेशनल टिश्यू एंड ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) के सहयोग से पीजीआई रोटो देश के अन्य अस्पतालों से संबंध स्थापित कर रहा है ताकि पीजीआई में अंगदान से मिले अंग का मैचिंग मरीज न मिलने पर तत्काल संपर्क कर उसे सही जगह और तय समय पर भेजा जा सके।   

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ग्रीन कॉरिडोर में सबका साथ है जरूरी 
रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर बनाने और उसकी सफलता में पीजीआई के डॉक्टरों की टीम, कमेटी, रोटो की टीम, ट्रैफिक पुलिस, चंडीगढ़ के साथ मोहाली पुलिस के अलावा एयरपोर्ट प्रशासन का योगदान रहता है। इन विभिन्न टीमों में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका उस अंग को दूसरे स्थान पर भेजने में बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि अंग को निकालने से लेकर उसे सुरक्षित और तय समय पर एयरपोर्ट पहुंचाना व उड़ान भरवाना ही प्रत्यारोपण को सफल बनाता है।  

तय समय के बाद ये अंग हो जाते हैं बेकार

  • दिल: 4 से 6 घंटा
  • फेफड़ा: 4 से 6 घंटा
  • किडनी:  48 से 72 घंटा
  • लिवर: 12 से 24 घंटा
  • पैंक्रियाज: 12 से 18 घंटा
  • आंत: 6 से 12 घंटा
  • आंखें: 4 से 6 घंटे 

ये भी जान लें
प्रत्यारोपित किए जाने वाले अंग को तय समय के अंदर मृतक के शरीर से निकाल लेना चाहिए। आंखों से कॉर्निया और आइबॉल जैसे पार्ट लिए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि एक व्यक्ति की आंखें सिर्फ एक ही व्यक्ति को रोशनी दे सकती हैं बल्कि एक व्यक्ति के कॉर्निया से 3 से 4 लोगों की जिंदगी को रोशन किया जा सकता है। कुछ लोगों के हृदय और फेफड़े दोनों एक साथ डोनेट किए जाते हैं। इस केस में भी 4 से 6 घंटे के अंदर ही शरीर से निकालने और प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया को पूरा करना होता है।

इन अंगों ने भरी उड़ान 

अंग  संख्या 
लिवर 27 
हृदय 18 
किडनी 03
फेफड़ा 04

यहां भेजे गए इतने अंग

स्थान अंगों की संख्या
दिल्ली 35
चेन्नई 05
अहमदाबाद 04 
मुंबई 03
गुरुग्राम   01
मोहाली 01
जयपुर 01
टांडा 01
साकेत 01

वर्षवार ग्रीन कॉरिडोर का रिकॉर्ड 

वर्ष ग्रीन कॉरिडोर 
2015 9
2016 5
2017   11
2018 4
2019 4
2020 1
2021 9
2022 अब तक 9
 

अंगदान के महत्व को समझने की जरूरत है। एक-एक अंग बहुमूल्य है। अंगदान का निर्णय लेने में किया गया विलंब उस अंग को बेकार कर सकता है। ठीक वैसे ही समय पर मिले अंग को सही मरीज तक तय समय पर पहुंचाना भी बेहद जरूरी होता है। पीजीआई अन्य विभागों के सहयोग से इस कार्य को सफल बनाने में जुटा हुआ है। -डॉ. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक पीजीआई व रोटो के नोडल अधिकारी

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