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पीजीआई चंडीगढ़ में ऐसा भी होता है, सर्जरी से पहले दो लाख खर्च बताया, बिल चार लाख का थमाया
Tue, 25 Feb 2020 01:18 PM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Feb 2020 01:18 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
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इलाज होने के बावजूद हरियाणा के यमुनानगर जिला निवासी एक मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ से डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। कारण है परिजनों की ओर से 4.60 लाख रुपयों का भुगतान न कर पाना। परिजनों का कहना है कि सर्जरी से पहले उन्हें दो लाख रुपये खर्च बताया गया था। ऑपरेशन के बाद अब चार लाख साठ हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। यह रकम वह देने में सक्षम नहीं हैं।
डॉक्टर का कहना है कि परिवार को खर्च का पूरा ब्योरा दिया गया था। हालांकि इसका कोई लिखित रिकार्ड न तो मरीज के परिजनों के पास है और न पीजीआई प्रशासन के पास। पीजीआई जैसे शीर्ष चिकित्सा संस्थान में कागजी तौर पर इस तरह की लापरवाही बड़े सवाल खडे़ करती है। इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर एडवांस कार्डियक सेंटर के एचओडी ने जांच के आदेश देते हुए मरीज को जल्द से जल्द डिस्चार्ज करने को कहा है।
ये है पूरा मामला
यमुनानगर निवासी नरेन्द्र कुमार(80) को मई 2019 में गले में परेशानी हुई तो बेटे सुशील ने उन्हें वहां के सिविल अस्पताल में दिखाया। एक महीने तक दवा देने के बाद जब फायदा नहीं हुआ तो डॉक्टर ने पीजीआई रेफर कर दिया। जून 2019 से पीजीआई ईएनटी विभाग में इलाज शुरू हुआ। फिर जून में ही ईएनटी से एडवांस कार्डियक सेंटर में रेफर किया गया। 28 जून को सीटी स्कैन करके बताया गया कि मरीज के हृदय की नस फूल गई है। इसे एनीरीजम कहते हैं। इसे ठीक करने के लिए स्टंट डालना होगा।
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हर दो महीने पर फॉलोअप किया जाने लगा। जनवरी 2020 में हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश विजयवर्गीय को ओपीडी में दिखाया गया। 15 फरवरी को ओपीडी से ही मरीज को एडवांस कार्डियक सेंटर के लेबल 3 बी ब्लॉक के बेड नंबर 5 पर भर्ती किया गया। सोमवार की सुबह सर्जरी से पहले मरीज और उसके बेटे सुशील गर्ग से कंसल्टेंट फार्म पर हस्ताक्षर करवाया गया। उससे पहले सुशील से 26 हजार की दवाएं और सर्जरी में प्रयोग होने वाली अन्य चीजें मंगाई गईं। डॉ. राजेश ने मरीज का ऑपरेशन किया।
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डॉक्टर का कहना है कि परिवार को खर्च का पूरा ब्योरा दिया गया था। हालांकि इसका कोई लिखित रिकार्ड न तो मरीज के परिजनों के पास है और न पीजीआई प्रशासन के पास। पीजीआई जैसे शीर्ष चिकित्सा संस्थान में कागजी तौर पर इस तरह की लापरवाही बड़े सवाल खडे़ करती है। इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर एडवांस कार्डियक सेंटर के एचओडी ने जांच के आदेश देते हुए मरीज को जल्द से जल्द डिस्चार्ज करने को कहा है।
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ये है पूरा मामला
यमुनानगर निवासी नरेन्द्र कुमार(80) को मई 2019 में गले में परेशानी हुई तो बेटे सुशील ने उन्हें वहां के सिविल अस्पताल में दिखाया। एक महीने तक दवा देने के बाद जब फायदा नहीं हुआ तो डॉक्टर ने पीजीआई रेफर कर दिया। जून 2019 से पीजीआई ईएनटी विभाग में इलाज शुरू हुआ। फिर जून में ही ईएनटी से एडवांस कार्डियक सेंटर में रेफर किया गया। 28 जून को सीटी स्कैन करके बताया गया कि मरीज के हृदय की नस फूल गई है। इसे एनीरीजम कहते हैं। इसे ठीक करने के लिए स्टंट डालना होगा।
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हर दो महीने पर फॉलोअप किया जाने लगा। जनवरी 2020 में हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश विजयवर्गीय को ओपीडी में दिखाया गया। 15 फरवरी को ओपीडी से ही मरीज को एडवांस कार्डियक सेंटर के लेबल 3 बी ब्लॉक के बेड नंबर 5 पर भर्ती किया गया। सोमवार की सुबह सर्जरी से पहले मरीज और उसके बेटे सुशील गर्ग से कंसल्टेंट फार्म पर हस्ताक्षर करवाया गया। उससे पहले सुशील से 26 हजार की दवाएं और सर्जरी में प्रयोग होने वाली अन्य चीजें मंगाई गईं। डॉ. राजेश ने मरीज का ऑपरेशन किया।
पहले बताया दो लाख अब 8 लाख का खर्च
बेटे सुशील का कहना है कि सर्जरी से पहले डॉक्टर ने बताया कि दो लाख का खर्च आएगा। लेकिन सर्जरी के बाद उसे 4 लाख 60 हजार रुपये बताया जा रहा है। एक सर्जरी की बात हुई थी, अब दो और सर्जरी करने को कहा जा रहा है। इसमें लगभग तीन लाख रुपये और लगेंगे।
सुशील का कहना है कि पिता किराने की दुकान पर बैठते हैं और वह एक दूसरी दुकान पर नौकरी कर परिवार चला रहे हैं। ऐसे में अचानक आठ लाख रुपये की व्यवस्था कहां से करें। शुरुआत में दो लाख बताया गया तो रिश्तेदारों से उधार लेकर इलाज कराने की तैयारी कर ली, लेकिन अब तो फंस गए हैं।
अमृत फार्मेसी से क्यों नहीं मंगाया स्टंट
घटना के बाद सेंटर के डॉक्टरों और पैरामेडिकल के बीच चर्चाएं जोरों पर हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए ही लगभग डेढ़ साल पहले एचओडी ने स्टंट की सप्लाई को लेकर आदेश जारी कराया था। इसके अनुसार हृदय संबंधी किसी भी प्रकार के स्टंट की खरीद अमृत फार्मेसी के जरिये ही की जानी है, लेकिन इस मामले में इस आदेश को दरकिनार कर स्टंट की आपूर्ति बाहर से कराई गई है। सुशील ने बताया कि बाहर के एक सप्लायर ने सेंटर में आकर सामान दे दिया और अब एक बिल दिखाकर 4 लाख 60 हजार रुपये मांग रहा है। मांगने पर बिल भी नहीं दे रहा।
सुशील का कहना है कि पिता किराने की दुकान पर बैठते हैं और वह एक दूसरी दुकान पर नौकरी कर परिवार चला रहे हैं। ऐसे में अचानक आठ लाख रुपये की व्यवस्था कहां से करें। शुरुआत में दो लाख बताया गया तो रिश्तेदारों से उधार लेकर इलाज कराने की तैयारी कर ली, लेकिन अब तो फंस गए हैं।
अमृत फार्मेसी से क्यों नहीं मंगाया स्टंट
घटना के बाद सेंटर के डॉक्टरों और पैरामेडिकल के बीच चर्चाएं जोरों पर हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए ही लगभग डेढ़ साल पहले एचओडी ने स्टंट की सप्लाई को लेकर आदेश जारी कराया था। इसके अनुसार हृदय संबंधी किसी भी प्रकार के स्टंट की खरीद अमृत फार्मेसी के जरिये ही की जानी है, लेकिन इस मामले में इस आदेश को दरकिनार कर स्टंट की आपूर्ति बाहर से कराई गई है। सुशील ने बताया कि बाहर के एक सप्लायर ने सेंटर में आकर सामान दे दिया और अब एक बिल दिखाकर 4 लाख 60 हजार रुपये मांग रहा है। मांगने पर बिल भी नहीं दे रहा।
परिजनों को दी थी खर्च की पूरी जानकारी
ओपीडी से लेकर सर्जरी के दिन तक मरीज के परिजनों को खर्च के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। अब वे पैसे जमा न करने की जुगाड़ तलाश कर ऐसे आरोप लगा रहे हैं। मामले से जुड़ी पूरी जानकारी पीजीआई प्रशासन को दे दी गई है।
- डॉ. राजेश विजयवर्गीय, हृदयरोग विशेषज्ञ, एडवांस कार्डियक सेंटर पीजीआई
जांच शुरू कर दी है, मरीज को डिस्चार्ज किया जाएगा
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही उस मरीज का बिल शीघ्र जमा कर उसे डिस्चार्ज करने का भी आदेश दे दिया गया है। मंगलवार की सुबह तक वह डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। ऐसी शिकायतों पर रोक के लिए शीघ्र ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- डॉ. यशपाल, एचओडी, एडवांस कार्डियक सेंटर पीजीआई
अब कंसल्टेंट फार्म में होगा खर्च का पूरा ब्योरा
ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए अब ऑपरेशन से पहले भरवाये जाने वाले कंसल्टेंट फार्म में एक कॉलम खर्च के ब्योरे का भी होगा। ताकि बाद में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। इसे शीघ्र ही उस फार्म में शामिल कर लागू करा दिया जाएगा।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
- डॉ. राजेश विजयवर्गीय, हृदयरोग विशेषज्ञ, एडवांस कार्डियक सेंटर पीजीआई
जांच शुरू कर दी है, मरीज को डिस्चार्ज किया जाएगा
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही उस मरीज का बिल शीघ्र जमा कर उसे डिस्चार्ज करने का भी आदेश दे दिया गया है। मंगलवार की सुबह तक वह डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। ऐसी शिकायतों पर रोक के लिए शीघ्र ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- डॉ. यशपाल, एचओडी, एडवांस कार्डियक सेंटर पीजीआई
अब कंसल्टेंट फार्म में होगा खर्च का पूरा ब्योरा
ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए अब ऑपरेशन से पहले भरवाये जाने वाले कंसल्टेंट फार्म में एक कॉलम खर्च के ब्योरे का भी होगा। ताकि बाद में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। इसे शीघ्र ही उस फार्म में शामिल कर लागू करा दिया जाएगा।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता