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खुलासा: पीजीआई में वीआईपी सिफारिश ज्यादा, आम सुनवाई कम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sat, 30 Apr 2016 11:35 PM IST
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पूर्व एचओडी डा. एसके जिंदल
- फोटो : amarujala
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पीजीआई के पल्मनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी डा. एसके जिंदल ने अपने 50 साल के अनुभव को एक किताब में समेटने की कोशिश की है। शनिवार को उनके अनुभव पर आधारित 34 कहानियों की पुस्तक ‘मेडिकल एनकाउंटर्स’ का विमोचन किया गया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि पीजीआई में वीआईपी की सिफारिश इतनी ज्यादा आती हैं कि आम मरीजों को देख पाना मुश्किल हो जाता है। सुबह आया मरीज लाइन में ही लगा रह जाता है और वीआईपी डाक्टर को दिखाकर चला जाता है।
उनका इशारा पीजीआई के डाक्टरों पर वीआईपी मरीजों को देखने के दबाव की तरफ था। उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में दवा से ज्यादा मरीजों के प्रति संवेदनशीलता व स्नेह मायने रखता है। उन्होंने बताया कि साल 2014 में रिटायरमेंट से तीन साल पहले अपने अनुभवों पर एक किताब लिखने का विचार आया था। पीजीआई में बिताए अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण सालों को एक किताब के तौर पर फिर से जीने का प्रयास किया।’’
इस किताब में शामिल प्रत्येक कहानी के हर चरित्र की अपनी एक पृष्ठभूमि है और उन्होंने अपनी कलम से उनका खाका अपनी किताब में खींचा हैं। इनमें राज्यपालों, प्रधानमंत्रियों, उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारियों, किशोर, अमीर, श्रमिक सहित कई अन्य लोग शामिल थे।
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डॉ.जिंदल ने सादा और दिल को छूने वाली कहानियां ही लिखी हैं जो कि उनके मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी हैं और साथ ही बीते सालों में मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में हुए शानदार सुधारों और विकास के प्रति अपनी टिप्पणी है। इस मौके पर पदमश्री आरआई सिंह पूर्व मुख्य सचिव पंजाब सरकार, पीजीआई डायरेक्टर वाइके चावला, पूर्व वित्त आयुक्त राबिन गुप्ता व प्रोफेसर मीनू सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
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उनका इशारा पीजीआई के डाक्टरों पर वीआईपी मरीजों को देखने के दबाव की तरफ था। उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में दवा से ज्यादा मरीजों के प्रति संवेदनशीलता व स्नेह मायने रखता है। उन्होंने बताया कि साल 2014 में रिटायरमेंट से तीन साल पहले अपने अनुभवों पर एक किताब लिखने का विचार आया था। पीजीआई में बिताए अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण सालों को एक किताब के तौर पर फिर से जीने का प्रयास किया।’’
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इस किताब में शामिल प्रत्येक कहानी के हर चरित्र की अपनी एक पृष्ठभूमि है और उन्होंने अपनी कलम से उनका खाका अपनी किताब में खींचा हैं। इनमें राज्यपालों, प्रधानमंत्रियों, उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारियों, किशोर, अमीर, श्रमिक सहित कई अन्य लोग शामिल थे।
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डॉ.जिंदल ने सादा और दिल को छूने वाली कहानियां ही लिखी हैं जो कि उनके मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी हैं और साथ ही बीते सालों में मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में हुए शानदार सुधारों और विकास के प्रति अपनी टिप्पणी है। इस मौके पर पदमश्री आरआई सिंह पूर्व मुख्य सचिव पंजाब सरकार, पीजीआई डायरेक्टर वाइके चावला, पूर्व वित्त आयुक्त राबिन गुप्ता व प्रोफेसर मीनू सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।