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किडनी कांडः सच जानने को पीजीआई ने बनाई 3 सदस्यीय कमेटी, प्राथमिक जांच में कुछ नहीं मिला
Wed, 11 Sep 2019 12:43 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 11 Sep 2019 12:43 PM IST
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मणिपुर से चंडीगढ़ में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लाई गई महिला के मामले में जांच के लिए पीजीआई डायरेक्टर ने तीन सदस्यीय एक कमेटी गठित कर दी है। पीजीआई का कहना है कि कमेटी एक बार फिर से तथ्यों की जांच करेगी। मंगलवार को गठित कमेटी के चेयरमैन डॉ. अरविंद राजवंशी होंगे, जबकि डॉ. विपिन कौशल व डॉ. सुरजीत सिंह कमेटी के मेंबर होंगे।
गठित कमेटी एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट दे देगी। जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्राथमिक जांच में उसके रिकार्ड सही पाए गए हैं। पीजीआई ने सोमवार को अपनी जांच में पाया था कि पिछले दो साल के दौरान मणिपुर के इलाके से कुल 15 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। इनमें से सात ऐसे केस हैं, जिनमें पत्नी ने पति को किडनी दी है।
यदि कुछ हुआ होगा तो इन्हीं केसों में होने की संभावना है। पीजीआई सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि अभी तक उनकी जांच में फिलहाल कुछ भी संदिग्ध नहीं लगा है। जिस महिला को यहां पर लाया गया है, अभी उसकी शुरुआती जांच चल रही थी। उसके बाद उसे अपने दस्तावेज पीजीआई के समक्ष पेश करने थे।
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दस्तावेजों की जांच की पूरी प्रक्रिया में कम से कम चार-पांच महीने का वक्त लगना था। संभव है कि जांच प्रक्रिया के दौरान वह पकड़ी जाती। पीजीआई में ऐसे केस पकड़े जाते रहे हैं, जो फर्जी ब्लड रिलेटिव बनकर किडनी देने के लिए आते हैं। फिर भी पीजीआई ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
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गठित कमेटी एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट दे देगी। जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्राथमिक जांच में उसके रिकार्ड सही पाए गए हैं। पीजीआई ने सोमवार को अपनी जांच में पाया था कि पिछले दो साल के दौरान मणिपुर के इलाके से कुल 15 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। इनमें से सात ऐसे केस हैं, जिनमें पत्नी ने पति को किडनी दी है।
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यदि कुछ हुआ होगा तो इन्हीं केसों में होने की संभावना है। पीजीआई सूत्रों की ओर से दावा किया गया है कि अभी तक उनकी जांच में फिलहाल कुछ भी संदिग्ध नहीं लगा है। जिस महिला को यहां पर लाया गया है, अभी उसकी शुरुआती जांच चल रही थी। उसके बाद उसे अपने दस्तावेज पीजीआई के समक्ष पेश करने थे।
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दस्तावेजों की जांच की पूरी प्रक्रिया में कम से कम चार-पांच महीने का वक्त लगना था। संभव है कि जांच प्रक्रिया के दौरान वह पकड़ी जाती। पीजीआई में ऐसे केस पकड़े जाते रहे हैं, जो फर्जी ब्लड रिलेटिव बनकर किडनी देने के लिए आते हैं। फिर भी पीजीआई ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
पीजीआई के मुताबिक ट्रांसप्लांट से पहले वह डोनर की गहनता से जांच करते हैं। इसके लिए डॉक्टरों की एक कमेटी है। कमेटी में पीजीआई के डॉक्टर के साथ मनोचिकित्सक होते हैं, जो डोनर के चेहरे के हाव-भाव को पढ़ते हैं। कमेटी के सदस्य बारी-बारी से उससे सवाल पूछते हैं। डोनर को कई दस्तावेज भी पेश करने होते हैं।
सबसे ज्यादा गहन जांच पति-पत्नी के मामलों में होती है, क्योंकि ये ब्लड रिलेशन में नहीं आते हैं। डोनर को मैरिज सर्टिफिकेट, मैरिज फोटो, फोटो आईडी कार्ड, रेजिडेंस प्रूफ के साथ एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करना होता है, जो पुख्ता सुबूत के तौर पर माना जाता है।
दरअसल, जब पति-पत्नी का केस आता है तो उसमें यह देखा जाता है कि रिसीपिएंट (जिनमें किडनी ट्रांसप्लांट होनी है) और डोनर की शादी कब हुई और डॉक्टर ने रिसीपिएंट को कब किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। इसमें यह देखना होता है कि यदि किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह और शादी की तारीख भी आसपास की होती है तो उस मामले को भी संदिग्ध माना जाता है।
कई लोग ट्रांसप्लांट के बाद शादी करने का दस्तावेज पेश करते हैं और वे मामले ज्यादातर फर्जी निकलते हैं।
पीजीआई ने एक कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी है, जो तथ्यों की जांच करेगी।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर, पीजीआई
सबसे ज्यादा गहन जांच पति-पत्नी के मामलों में होती है, क्योंकि ये ब्लड रिलेशन में नहीं आते हैं। डोनर को मैरिज सर्टिफिकेट, मैरिज फोटो, फोटो आईडी कार्ड, रेजिडेंस प्रूफ के साथ एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करना होता है, जो पुख्ता सुबूत के तौर पर माना जाता है।
दरअसल, जब पति-पत्नी का केस आता है तो उसमें यह देखा जाता है कि रिसीपिएंट (जिनमें किडनी ट्रांसप्लांट होनी है) और डोनर की शादी कब हुई और डॉक्टर ने रिसीपिएंट को कब किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। इसमें यह देखना होता है कि यदि किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह और शादी की तारीख भी आसपास की होती है तो उस मामले को भी संदिग्ध माना जाता है।
कई लोग ट्रांसप्लांट के बाद शादी करने का दस्तावेज पेश करते हैं और वे मामले ज्यादातर फर्जी निकलते हैं।
पीजीआई ने एक कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी है, जो तथ्यों की जांच करेगी।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर, पीजीआई