चंडीगढ़: पद्मश्री से सम्मानित प्रो जगतराम ने कहा- नौकरी से सेवानिवृत्त, मरीजों की सेवा से नहीं
डॉ. जगतराम के पूरे कॅरिअर में उन पर कोई दाग नहीं लगा। विश्व की सबसे बड़ी सोसाइटी अमेरिकन सोसाइटी कैटरेक्ट एंड रीफ्रक्टिव सोसाइटी की ओर से बेस्ट ऑफ दी बेस्ट विनर के अवार्ड से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने 45 पुस्तकें लिखने के अलावा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में 40 प्रोजेक्टों पर भी काम किया है।
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मैं 31 अक्तूबर यानि आज अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त हो रहा हूं मगर मेरे काम करने का जज्बा अब भी जवां है। सेवानिवृत्ति की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मैं फिर से मरीजों की सेवा में जुट जाऊंगा। यह कहना है पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम का। 17 मार्च 2017 को पीजीआई निदेशक का पदभार ग्रहण करने वाले प्रो. जगतराम 31 अक्तूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
प्रो. जगतराम सेवानिवृत्ति के बाद भी चंडीगढ़ में रहकर मरीजों की सेवा करने का क्रम जारी रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर उन्होंने हिमाचल में रहकर ऐसा कुछ करने का निर्णय लिया तो वे देशभर के मरीजों की सेवा करने के सुख से वंचित हो जाएंगे। इसलिए सरकारी या गैर सरकारी माध्यम से जुड़कर चंडीगढ़ से ही यह सिलसिला आगे बढ़ता रहेगा।
कोरोना के दौरान कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाकर महामारी से मुकाबले में देश में आदर्श स्थापित करने के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले प्रो. जगतराम इसका श्रेय पीजीआई परिवार को देते हैं। उनका कहना है कि बिना अपनों के सहयोग के कोई सफल नहीं हो सकता। आज अगर मैं सफल व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल हूं तो इसका श्रेय मेरे माता-पिता के साथ ही उस प्रत्येक व्यक्ति को जाता है जिसकी मेहनत ने मुझे कोयले से तराशकर हीरा बनाने में योगदान दिया है।
हिमाचल का छोरा कर गया कमाल
डॉ. जगतराम का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ के पबियाना गांव के एक गरीब व अनपढ़ किसान ध्यानूराम और फुलमु देवी के घर हुआ। डॉ. जगतराम ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल राजगढ़ से पढ़ाई शुरू की। गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने आईजीएमसी शिमला से 1973 में एमबीबीएस में एडमिशन लिया। 1979 में पीजीआई ज्वाइन किया। प्रो. जगतराम ने बताया कि 40 साल पहले जब एमडी की परीक्षा देने आए थे, तब उनकी जेब में पैसे तक नहीं थे। दोस्तों ने फीस और रास्ते के किराए का इंतजाम किया था। उस दौर को वे कभी नहीं भूलते, क्योंकि वे घटनाएं उन्हें आज भी मजबूती देती हैं।
फर्श से अर्श तक सफर रहा खास
पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम चिकित्सा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए 2019 में पद्मश्री से नवाजे जा चुके हैं। 1978 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद जून 1982 में पीजीआई के नेत्र विज्ञान में एमएस किया। बाद में उन्हें स्टॉर्म आई इंस्टीट्यूट यूएसए में उन्नत फेकमूल्सीफिकेशन के क्षेत्र में डब्ल्यूएचओ फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1998 में बाल चिकित्सा मोतियाबिंद सर्जरी में एक और फेलोशिप से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2003 से 2005 तक एक सलाहकार नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया था। प्रो. जगतराम ने 1994 में पीजीआई में एक्स्ट्रा कैप्सुलर मोतियाबिंद सर्जरी की पुरानी तकनीक की जगह फेकमूल्सीफिकेशन की तकनीक पेश की। प्रो. जगतराम ने 40 वर्षों में लगभग एक लाख नेत्र रोगियों का सफल इलाज किया है।