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कैसे हो इलाज, एक साल से बंद पड़ी पीजीआई चंडीगढ़ की कैंसर स्क्रीनिंग मोबाइल वैन, दान मिली थी
Wed, 19 Feb 2020 11:13 AM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 19 Feb 2020 11:13 AM IST
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कैंसर स्क्रीनिंग मोबाइल वैन
- फोटो : अमर उजाला
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पीजीआई चंडीगढ़ में मरीजों के बेहतर इलाज के लिए हर साल करोड़ों के उपकरण खरीदे जा रहे हैं। उसका लाभ भी मिल रहा है, लेकिन पीजीआई के न्यू ओपीडी बिल्डिंग के पीछे एक साल से बंद पड़ी कैंसर स्क्रीनिंग मोबाइल वैन की ओर किसी का ध्यान नहीं है। इसके बंद होने से ब्रेस्ट कैंसर की जांच की निशुल्क सुविधा ठप हो गई है।
ब्रेस्ट कैंसर के जिन संभावित मरीजों की जांच तत्काल होनी चाहिए, उन्हें दो से ढाई महीने की डेट देनी पड़ रही है। कारण, पीजीआई के पास एकमात्र मेमोग्राफी मशीन का होना है, जबकि इस कैंसर स्क्रीनिंग मोबाइल वैन से क्षेत्र में जाकर महीने भर में हजारों महिलाओं के ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस की जांच की जाती थी।
इस वैन को लेकर पीजीआई प्रशासन का रवैया भी लचर है। हैरानी की बात यह है कि एक साल में पता नहीं चल पाया है कि वैन में खराबी है या उपकरण में। पीजीआई का कहना है कि इस संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, वैन मरम्मत करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आश्वासन दिया जा रहा है।
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ब्रेस्ट कैंसर के जिन संभावित मरीजों की जांच तत्काल होनी चाहिए, उन्हें दो से ढाई महीने की डेट देनी पड़ रही है। कारण, पीजीआई के पास एकमात्र मेमोग्राफी मशीन का होना है, जबकि इस कैंसर स्क्रीनिंग मोबाइल वैन से क्षेत्र में जाकर महीने भर में हजारों महिलाओं के ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस की जांच की जाती थी।
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इस वैन को लेकर पीजीआई प्रशासन का रवैया भी लचर है। हैरानी की बात यह है कि एक साल में पता नहीं चल पाया है कि वैन में खराबी है या उपकरण में। पीजीआई का कहना है कि इस संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, वैन मरम्मत करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आश्वासन दिया जा रहा है।
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कहां से लाएं हजारों रुपये
पीजीआई रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में मंगलवार को मेमोग्राफी जांच कराने आई जिन महिलाओं को दो महीने बाद की डेट मिली, उनके चेहरे उतर गए। माथा पकड़े वे बस एक ही बात कह रही थीं कि इस महंगाई में जांच के लिए अब दो हजार रुपये कहां से लाएं। पीजीआई में सस्ता इलाज की उम्मीद में आए थे।
डॉक्टर का कहना है कि 24 घंटे में जांच रिपोर्ट लाना जरूरी है, लेकिन यहां तो दो महीने से पहले सुनवाई नहीं होगी। वहीं, कुछ तो पीजीआई का कार्ड लेकर निजी सेंटर में जांच करवाने चली गईं। पीजीआई में मेमोग्राफी जांच शुल्क 200 रुपये है, जबकि निजी सेंटर इसके लिए दो से ढाई हजार रुपये ले रहे हैं।
चंडीगढ़ और पंजाब की महिलाओं को मिलनी थी खास सुविधा
ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों और इसकेडाइग्नोसिस की महंगी दर को ध्यान में रखते हुए फिलिप्स हेल्थकेयर ने 2012 में पीजीआई को यह खास वैन दी थी। इस वैन से चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब और उसके आसपास केक्षेत्रों में जाकर महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ऑस्टियोपोरोसिस की निशुल्क जांच की जानी थी।
वैन में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और मैमोग्राफी जांच की अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई थीं। योजना के तहत 2018 तक इसका संचालन ठीक तरीके से हुआ। हजारों महिलाओं को जांच के बाद पीजीआई रेफर किया गया। हफ्ते में दो दिन वैन क्षेत्र में जाती थी। बाकी दिन पीजीआई में इसकी सेवाएं ली जाती थीं, लेकिन पिछले एक साल से वैन बंद पड़ी है।
डॉक्टर का कहना है कि 24 घंटे में जांच रिपोर्ट लाना जरूरी है, लेकिन यहां तो दो महीने से पहले सुनवाई नहीं होगी। वहीं, कुछ तो पीजीआई का कार्ड लेकर निजी सेंटर में जांच करवाने चली गईं। पीजीआई में मेमोग्राफी जांच शुल्क 200 रुपये है, जबकि निजी सेंटर इसके लिए दो से ढाई हजार रुपये ले रहे हैं।
चंडीगढ़ और पंजाब की महिलाओं को मिलनी थी खास सुविधा
ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों और इसकेडाइग्नोसिस की महंगी दर को ध्यान में रखते हुए फिलिप्स हेल्थकेयर ने 2012 में पीजीआई को यह खास वैन दी थी। इस वैन से चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब और उसके आसपास केक्षेत्रों में जाकर महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ऑस्टियोपोरोसिस की निशुल्क जांच की जानी थी।
वैन में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और मैमोग्राफी जांच की अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई थीं। योजना के तहत 2018 तक इसका संचालन ठीक तरीके से हुआ। हजारों महिलाओं को जांच के बाद पीजीआई रेफर किया गया। हफ्ते में दो दिन वैन क्षेत्र में जाती थी। बाकी दिन पीजीआई में इसकी सेवाएं ली जाती थीं, लेकिन पिछले एक साल से वैन बंद पड़ी है।
एक मशीन, कतार में हजारों
रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में पुरानी मेमोग्राफी मशीन कंडम हो जाने केबाद अक्तूबर 2019 में नई डिजिटल ब्रेस्ट टोमोसिनथिसिस मेमोग्राफी मशीन लगाई गई है। उस एक मशीन से प्रतिदिन 30 से 40 जांच हो रही है। इसके बावजूद वहां मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा है कि दो महीने बाद ही डेट दी जा रही है।
एक दिन की देरी जिंदगी डाल सकती है खतरे में
रेडियोथेरेपी डिपार्टमेंट केएचओडी डॉ. राकेश कपूर के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखते ही तत्काल जांच जरूरी है। इलाज में देरी मरीज की जिंदगी खतरे में डाल सकती है।कैंसर के इलाज में देरी खतरनाक साबित हो सकता है।
रेडियोलॉजी के एचओडी से बात की गई है, लेकिन वे बाहर हैं। जहां तक इसकेएक साल से खराब पड़े होने की बात है तो इसकी सूचना पीजीआई प्रशासन को देकर इसे ठीक कराने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराई जाएगी।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
एक दिन की देरी जिंदगी डाल सकती है खतरे में
रेडियोथेरेपी डिपार्टमेंट केएचओडी डॉ. राकेश कपूर के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखते ही तत्काल जांच जरूरी है। इलाज में देरी मरीज की जिंदगी खतरे में डाल सकती है।कैंसर के इलाज में देरी खतरनाक साबित हो सकता है।
रेडियोलॉजी के एचओडी से बात की गई है, लेकिन वे बाहर हैं। जहां तक इसकेएक साल से खराब पड़े होने की बात है तो इसकी सूचना पीजीआई प्रशासन को देकर इसे ठीक कराने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराई जाएगी।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता