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हाईकोर्ट का फरमान- पंच तत्वों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जल्दी निर्णय ले एमएचआरडी
Sun, 10 Nov 2019 04:53 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 10 Nov 2019 04:53 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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पंच तत्वों को भारतीय पाठ्यक्रम में शामिल करने की अपील करते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पंच तत्वों के अध्ययन से ही अमेरिका महाशक्ति बन गया। हाईकोर्ट ने याची द्वारा सौंपी गई रिप्रजेंटेशन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश एमएचआरडी को दिया है।
कानून की पढ़ाई कर रहे रेवंत कौशिक ने याचिका में कहा कि आज भी हम यह नहीं समझ पाए हैं कि हमारे पाठ्यक्रम में क्या होना चाहिए और क्या नहीं? विश्व की बहुत सारे देशों ने पंच तत्वों को समझ कर और अपना कर विकास किया है और महाशक्तियों के रूप में उभरे हैं।
हमारे देश में लंबे समय से कहा जाता है कि शरीर पंच तत्वों से बना है और इसी में ब्रह्मांड है, बावजूद इसके इसे हमारे पाठ्यक्रम से दूर रखा गया है। यदि इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो हम इनको समझ सकते हैं ओर इन्हें समझने के बाद हमारी आने वाली पीढ़ी देश की तरक्की के लिए मजबूत नींव तैयार कर सकती है।
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याची ने कहा कि जब सेक्स एजुकेशन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है तो पंच तत्वों को शामिल करने में क्या आपत्ति हो सकती है। कौशिक ने बताया कि इस बारे में उसने एमएचआरडी को रिप्रजेंटेशन सौंपी थी जिस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। याची ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ तथा केंद्र सरकार को याचिका में प्रतिवादी बनाया था।
हाईकोर्ट ने इस पर एमएचआरडी के सचिव को याची की रिप्रेजेंटेशन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
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कानून की पढ़ाई कर रहे रेवंत कौशिक ने याचिका में कहा कि आज भी हम यह नहीं समझ पाए हैं कि हमारे पाठ्यक्रम में क्या होना चाहिए और क्या नहीं? विश्व की बहुत सारे देशों ने पंच तत्वों को समझ कर और अपना कर विकास किया है और महाशक्तियों के रूप में उभरे हैं।
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हमारे देश में लंबे समय से कहा जाता है कि शरीर पंच तत्वों से बना है और इसी में ब्रह्मांड है, बावजूद इसके इसे हमारे पाठ्यक्रम से दूर रखा गया है। यदि इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो हम इनको समझ सकते हैं ओर इन्हें समझने के बाद हमारी आने वाली पीढ़ी देश की तरक्की के लिए मजबूत नींव तैयार कर सकती है।
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याची ने कहा कि जब सेक्स एजुकेशन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है तो पंच तत्वों को शामिल करने में क्या आपत्ति हो सकती है। कौशिक ने बताया कि इस बारे में उसने एमएचआरडी को रिप्रजेंटेशन सौंपी थी जिस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। याची ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ तथा केंद्र सरकार को याचिका में प्रतिवादी बनाया था।
हाईकोर्ट ने इस पर एमएचआरडी के सचिव को याची की रिप्रेजेंटेशन पर आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।