'टीचर्स फोन में व्यस्त रहते, क्लास में स्टूडेंट्स रासलीला करते रहते'
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जज साहब, टीचर्स अपने फोन में बिजी रहते हैं और स्टूडेंट्स क्लासरूम में ही रासलीला रचाते रहते हैं। ये नजारा होता है चंडीगढ़ के मॉडल स्कूलों में।
स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की एक सदस्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बयां की एक मॉडल स्कूल में अश्लीलता की कहानी। इसने श्ाहर के सरकारी स्कूलों में छात्रों को अच्छी शिक्षा दिलाने के दावे की पोल स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की एक सदस्य ने खोल ही है।
याचिका में कहा गया है कि शहर की एक कालोनी में सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक फोन पर व्यस्त रहते हैं और क्लासरूम में छात्र-छात्राएं अश्लील हरकतें तक करते हैं। यहां आवश्यक सुविधाओं की भी कमी है, ऐसे में इन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य आखिर कैसे संवर सकता है।
एसएमसी सदस्य दिप्ती ने एडवोकेट रंजन लखनपाल के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत में एक सीडी भी पेश की। जिसमें रिकार्ड वीडियो में छात्र-छात्राओं की अश्लील हरकतें कैद थीं।
हालांकि इस याचिका पर हाईकोर्ट ने यह मामला डीपीआई स्कूल्स के पास उठाने को कहा। ऐसे में याची ने कहा कि मांग पत्र दिया जा चुका है। हाईकोर्ट ने मामले में कोई निर्देश जारी नहीं किया, लेकिन डीपीआई को मांग पत्र का उचित निपटारा करने को कहा है।
कुछ अभिभावक ने बेटियों को इस स्कूल से हटा भी लिया है
याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि 45 मिनट के पीरियड में शिक्षक केवल 15 मिनट ही क्लास में रहते हैं। विद्यार्थियों को चैप्टर याद करने को कहते हैं और बाकी 30 मिनट बाहर जाकर फोन पर व्यस्त रहते हैं। जिस स्कूल की बात की गई है, उसके बारे में याचिका में कहा गया है कि पिछले शैक्षिक सत्र में इस स्कूल के 65 प्रतिशत छात्र फे ल हुए थे। शिक्षक स्वयं भी अंग्रेजी के सरकारी टेस्ट में खरे नहीं उतरे।
यह भी कहा कि नियमानुसार विद्यार्थियों की पिटाई नहीं की जा सकती, लेकिन इस स्कूल में छात्रों की पिटाई भी होती है। भय के मारे कोई अभिभावक शिकायत नहीं करता। जिस स्कूल के बारे बात की जा रही है, उसके करीब ही तंबाकू, बीड़ी व सिगरेट समेत अन्य नशीले पदार्थ भी बिकते हैं।
छात्र नशेड़ी बन चुके हैं। स्कूल में न तो विद्यार्थियों को कंप्यूटर व साइंस लैब की सुविधा का लाभ मिलता हैं और न ही लाइब्रेरी में किताबें उपलब्ध हैं। यहां पीने के पानी की उचित व्यवस्था तक नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि अभिभावक अपनी बेटियों को ऐसे स्कूल में भेजने में शर्म महसूस करते हैं। कुछ लोगों ने बेटियों को इस स्कूल से हटा भी लिया है। याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात का संतुलन बनाया जाए। स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगने चाहिए। साथ ही यहीं आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए।