फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   petition filed in high court on obscenity in government school

'टीचर्स फोन में व्यस्त रहते, क्लास में स्टूडेंट्स रासलीला करते रहते'

Fri, 05 Feb 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 Feb 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन
petition filed in high court on obscenity in government school

जज साहब, टीचर्स अपने फोन में बिजी रहते हैं और स्टूडेंट्स क्लासरूम में ही रासलीला रचाते रहते हैं। ये नजारा होता है चंडीगढ़ के मॉडल स्कूलों में।

विज्ञापन


स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की एक सदस्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बयां की एक मॉडल स्कूल में अश्लीलता की कहानी। इसने श्ाहर के सरकारी स्कूलों में छात्रों को अच्छी शिक्षा दिलाने के दावे की पोल स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की एक सदस्य ने खोल ही है।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया है कि शहर की एक कालोनी में सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक फोन पर व्यस्त रहते हैं और क्लासरूम में छात्र-छात्राएं अश्लील हरकतें तक करते हैं। यहां आवश्यक सुविधाओं की भी कमी है, ऐसे में इन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य आखिर कैसे संवर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
एसएमसी सदस्य दिप्ती ने एडवोकेट रंजन लखनपाल के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत में एक सीडी भी पेश की। जिसमें रिकार्ड वीडियो में छात्र-छात्राओं की अश्लील हरकतें कैद थीं।

हालांकि इस याचिका पर हाईकोर्ट ने यह मामला डीपीआई स्कूल्स के पास उठाने को कहा। ऐसे में याची ने कहा कि मांग पत्र दिया जा चुका है। हाईकोर्ट ने मामले में कोई निर्देश जारी नहीं किया, लेकिन डीपीआई को मांग पत्र का उचित निपटारा करने को कहा है।

कुछ अभिभावक ने बेटियों को इस स्कूल से हटा भी लिया है

petition filed in high court on obscenity in government school

याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि 45 मिनट के पीरियड में शिक्षक केवल 15 मिनट ही क्लास में रहते हैं। विद्यार्थियों को चैप्टर याद करने को कहते हैं और बाकी 30 मिनट बाहर जाकर फोन पर व्यस्त रहते हैं। जिस स्कूल की बात की गई है, उसके बारे में याचिका में कहा गया है कि पिछले शैक्षिक सत्र में इस स्कूल के 65 प्रतिशत छात्र फे ल हुए थे। शिक्षक स्वयं भी अंग्रेजी के सरकारी टेस्ट में खरे नहीं उतरे।

यह भी कहा कि नियमानुसार विद्यार्थियों की पिटाई नहीं की जा सकती, लेकिन इस स्कूल में छात्रों की पिटाई भी होती है। भय के मारे कोई अभिभावक शिकायत नहीं करता। जिस स्कूल के बारे बात की जा रही है, उसके करीब ही तंबाकू, बीड़ी व सिगरेट समेत अन्य नशीले पदार्थ भी बिकते हैं।

छात्र नशेड़ी बन चुके हैं। स्कूल में न तो विद्यार्थियों को कंप्यूटर व साइंस लैब की सुविधा का लाभ मिलता हैं और न ही लाइब्रेरी में किताबें उपलब्ध हैं। यहां पीने के पानी की उचित व्यवस्था तक नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि अभिभावक अपनी बेटियों को ऐसे स्कूल में भेजने में शर्म महसूस करते हैं। कुछ लोगों ने बेटियों को इस स्कूल से हटा भी लिया है। याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात का संतुलन बनाया जाए। स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगने चाहिए। साथ ही यहीं आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed