Punjab: गणतंत्र दिवस पर मंत्री अमन अरोड़ा झंडा फहराएंगे या नहीं, संशय बरकरार, हाईकोर्ट में 25 को सुनवाई
संगरूर के रहने वाले अनिल कुमार तायल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2013 के एक आदेश का हवाला दिया है। याची ने कहा कि सर्वोच्च अदालत आदेश में यह स्पष्ट कर चुका है कि अगर कोई अदालत किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या अधिक की सजा सुनाती है तो जनप्रतिनिधि एक्ट के अनुसार वह अयोग्य माना जाएगा।
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पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा को 21 दिसंबर 2023 को दोषी करार देने के बाद उन्हें विधायक के तौर पर अयोग्य बताते हुए अमृतसर में ध्वजारोहण से रोकने का निर्देश जारी करने की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई 25 जनवरी को तय की है। ऐसे में अब वह 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर झंडा फहरा पाएंगे या नहीं इस पर संशय की स्थिति बन गई है। फिलहाल संगरूर की निचली अदालत में लंबित उनकी अपील पर उन्हें कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।
याचिका दाखिल करते हुए संगरूर निवासी अनिल कुमार तायल ने हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट 2013 में अपने आदेश में यह स्पष्ट कर चुका है कि अगर कोई अदालत किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या अधिक के लिए सजा सुनाती है तो जनप्रतिनिधि एक्ट के अनुसार वह अयोग्य माना जाएगा।
याची ने बताया कि संगरूर की अदालत ने मंत्री अमन अरोड़ा को आईपीसी की विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए 21 दिसंबर, 2023 को दो वर्ष की सजा सुनाई थी। याची ने कहा कि सजा सुनाते ही उन्हें अयोग्य करार दिया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। याची ने 26 दिसंबर को इस संबंध में मांगपत्र भी दिया था लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
पांच जनवरी को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री व विधानसभा को पत्र लिखकर इस बारे में कार्रवाई को कहा था लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। याची ने बताया कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के लिए सूची जारी की गई है। इस सूची के अनुसार मंत्री अमन अरोड़ा को अमृतसर में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जो व्यक्ति अयोग्य हो चुका हो उसे इस प्रकार की जिम्मेदारी देने से लोगों के बीच सरकार के प्रति गलत संदेश जाएगा। ऐसे में हाईकोर्ट से अपील की गई कि अमन अरोड़ा को ध्वजारोहण से रोका जाए।
सोमवार को हाईकोर्ट को बताया गया कि अमन अरोड़ा की सजा के खिलाफ अपील पर 24 जनवरी को अपीलेट कोर्ट सुनवाई करेगी। ऐसे में हाईकोर्ट ने सुनवाई 25 जनवरी को तय की है ताकि निचली अदालत के आदेश के अनुरूप आगे निर्णय लिया जा सके। यदि उनकी सजा पर रोक नहीं लगी तो वह अयोग्य करार दिए जा सकते हैं।