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चंडीगढ़ः कोरोना के इलाज में एमडब्ल्यू वैक्सीन के ट्रायल की मिली अनुमति, 40 मरीजों पर करेंगे टेस्ट

Wed, 29 Apr 2020 12:21 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 29 Apr 2020 12:21 PM IST
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Permission to PGI Chandigarh for trial of MW vaccine for treatment of coronavirus
फाइल फोटो
चंडीगढ़ पीजीआई को एमडब्ल्यू वैक्सीन के ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई है। सेंट्रल मेडिकल एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की ओर से अधिकृत एमडब्ल्यू वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को पीजीआई की एथिक्स कमेटी ने मंगलवार को अप्रूवल दे दी है। अब कोरोना के इलाज में इस संभावित वैक्सीन से ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मंगलवार को पीजीआई के फार्माकॉलोजी डिपार्टमेंट के प्रो. समीर मल्होत्रा और एडिशनल प्रो. नुसरत शफीक की एथिक्स कमेटी ने विभिन्न डिपार्टमेंट की सिफारिशों पर अध्ययन करने के बाद कोरोना के मरीजों पर ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की अनुमति दे दी है।
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पूर्व में भी वैक्सीन का हो चुका है प्रयोग
एमडब्ल्यू वैक्सीन का प्रयोग इससे पहले भी पीजीआई में पलमोनरी डिपार्टमेंट के मरीजों पर किया जा चुका है। डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी पद्मश्री प्रो. डी बेहरा के अनुसार इसका इस्तेमाल टीबी, सेपसिस जैसी बीमारियों में पहले से हो रहा है। उसमें यह कारगर है। इसलिए इस दवा को नई दवा नहीं कह सकते हैं। हां, कोरोना में पहली बार इसका इस्तेमाल हो रहा है, इसीलिए इसका सेफ्टी और एफिकेसी टेस्ट किया गया था। इसमें चार मरीजों में कोई साइड इफेक्ट नहीं पाया गया। क्योंकि इस दवा का इस्तेमाल सुरक्षित रहा, इसलिए इसे ट्रायल प्रोसेस में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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पहले 40 मरीजों पर होगा ट्रायल
कोरोना के इलाज के लिए चुनी गई वैक्सीन के असर को चेक करने के लिए कई फेज में ट्रायल किया जाएगा। फेज-1 में चुने गए तीनों इंस्टीट्यूट एम्स दिल्ली, एम्स भोपाल और पीजीआई में 40-40 कोविड मरीजों पर इसका ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल शुरू करने से पहले मरीजों को चिह्नित किया जाएगा। उनमें से बेहद गंभीर मरीजों पर दवा का प्रयोग होगा। उसमें भी मरीजों को दो वर्गों में बांटकर एक वर्ग को एमडब्ल्यू वैक्सीन और दूसरे को प्लेसिबो पदार्थ दी जाएगी।
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प्लेसीबो वह पदार्थ होता है, जो दवा के रूप में होता है मगर उसमें वास्तव में दवा नहीं होती। इस प्रक्रिया में सभी मरीजों से अनुमति लेना जरूरी होगा। क्योंकि शेड्यूल वाई के सेक्शन चार के अनुसार जिस भी व्यक्ति पर ट्रायल किया जाए, उससे इसकी अनुमति लेना जरूरी है। अगर वह खुद अनुमति देने की स्थिति में न हो तो उसके अटेंडेंट से यह कंसेंट ली जाती है। इस कंसेंट के बिना किसी भी व्यक्ति पर यह प्रयोग नहीं किया जा सकता।


कोरोना के इलाज के लिए विश्वभर में रिसर्च चल रही है। ऐसे में पीजीआई में चयनित वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल की अनुमति मिलने से भारत में आशा की किरण जगी है। ट्रायल के लिए चयनित तीनों संस्थानों में इसकी सफलता की उम्मीद की जा रही है।
- डॉ. जगतराम, पीजीआई डायरेक्टर
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