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Chandigarh News: लाखों की आईटीआर भरने वाले डीबीटी लेने के लिए खुद को बता रहे गरीब

Tue, 05 Aug 2025 01:39 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Aug 2025 01:39 AM IST
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People who file ITR worth lakhs are declaring themselves as poor to get DBT
चंडीगढ़। शहर में राशन का पैसा ले रहे लाभार्थियों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने यूटी प्रशासन को एक सूची भेजी है, जिसमें करीब 8 हजार लोग ऐसे हैं, जो राशन का पैसा भी ले रहे हैं लेकिन साथ ही 5 लाख रुपये से अधिक का इनकम टैक्स भी भर रहे हैं। साढ़े 10 हजार लोगों के पास गाड़ी भी है। प्रशासन के खाद्य व आपूर्ति विभाग ने ऐसे लोगों की जांच शुरू कर दी है, जिसके तहत डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया गया है।
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यूटी प्रशासन के खाद्य व आपूर्ति विभाग की तरफ से करीब 73 हजार परिवारों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए राशन का पैसा उनके बैंक खाते में भेजा जाता है। इनकी कुल संख्या करीब 3.50 लाख है। हाल ही में केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ समेत कई राज्यों व यूटी में खाद्य सब्सिडी और डीबीटी का लाभ लेने वाले लोगों के डिटेल्स की जांच की गई। सरकार ने कई फिल्टर लगाए और आधार कार्ड समेत अन्य उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर एक सूची तैयार की है, जो 5 लाख से ज्यादा का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं, उनके नाम पर गाड़ियां हैं, दो जगह नाम दर्ज है, उम्र 108 या 110 है और 2.47 एकड़ से ज्यादा जमीन के मालिक हैं। ऐसे कुल करीब 60 हजार लोगों की सूची यूटी प्रशासन के खाद्य व आपूर्ति विभाग के पास आई है। इसमें करीब 30 फीसदी ज्यादा इनकम टैक्स रिटर्न भरने, गाड़ियों के मालिक व अन्य हैं। प्रशासन के निर्देश पर अब विभाग के इंस्पेक्टरों ने डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन शुरू कर दिया है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि वेरिफिकेशन के बाद सूची में शामिल कई लोगों के नाम डीबीटी से कट सकते हैं।
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गाड़ियों वाले भी ले रहे सस्ता राशन
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार करीब साढ़े 10 हजार से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनके पास चारपहिया वाहन हैं। ऐसे लोगों को प्रायोरिटी हाउसहोल्ड श्रेणी में राशन का पैसा नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आरक्षित है। कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनकी उम्र बहुत ज्यादा है। उनकी भी जांच करने को कहा गया है। ये आंकड़े केंद्र सरकार ने परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों और डीबीटी के लिए दिए गए आधार कार्ड से मैच किया गया है। वहीं, इनकम टैक्स रिटर्न की जानकारी भी आधार कार्ड व पैन कार्ड को मैच करके निकाला गया है। हालांकि विभाग के एक इंस्पेक्टर ने बताया कि वेरिफिकेशन पर कुछ ऐसे लोग भी मिल रहे हैं, जिनके नाम सूची में हैं, लेकिन जब उनके घर गए तो उन्होंने गाड़ी होने से साफ मना कर दिया।
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हजारों नाम कटने की संभावना
विभागीय सूत्रों के अनुसार इस पूरी जांच प्रक्रिया के बाद कई हजार लाभार्थियों के नाम डीबीटी लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि अगर कोई ऐसा केस मिलता है, जो पूरी तरह से समृद्ध हो और फिर भी डीबीटी का लाभ ले रहा हो तो वसूली भी कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में विभाग ने सभी डीबीटी लाभार्थियों का ई-केवाईसी भी किया है, जिससे सभी का प्रमाणीकरण हुआ है। इससे वास्तविक पात्र लाभार्थियों को लाभ मिलेगा और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी।

क्या होती है प्रायोरिटी हाउसहोल्ड पात्रता?
- आय 1.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए
- परिवार के पास चारपहिया वाहन नहीं होना चाहिए
- परिवार के किसी सदस्य की सरकारी नौकरी नहीं होनी चाहिए
- परिवार के किसी सदस्य का इनकम टैक्स नहीं भरा होना चाहिए
- ज्यादा संपत्ति वाले परिवार पात्र नहीं माने जा सकते
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