चंडीगढ़: पशु मुक्त शहर में लावारिस पशुओं से सावधान, सुरक्षित नहीं है जान...
चंडीगढ़ को पशु मुक्त शहर घोषित किया गया है। कुछ लोगों के पास जानवर थे तो उन्हें मिल्क कॉलोनी में बसा दिया गया, लेकिन इसके बावजूद दक्षिण के सेक्टर, हल्लोमाजरा, सेक्टर-26, मनीमाजरा सहित शहर की मुख्य सड़कों पर लावारिश पशु घूमते मिल जाएंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ में भले ही काउ सेस के नाम पर टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन लावारिस पशुओं से जान बचाने की जिम्मेदारी आपकी ही है। शहर के दक्षिणी सेक्टरों में लोगों का लावारिस पशुओं के कारण पार्क में जाना मुश्किल हो गया है। वहीं, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पंचकूला व मोहाली से पशु शहर में आ जाते हैं, लेकिन उनको पकड़ने वाली टीम की लापरवाही लोगों की जान को जोखिम में डाल रही है। चंडीगढ़ को पशु मुक्त शहर घोषित किया गया है।
कुछ लोगों के पास जानवर थे तो उन्हें मिल्क कॉलोनी में बसा दिया गया, लेकिन इसके बावजूद दक्षिण के सेक्टर, हल्लोमाजरा, सेक्टर-26, मनीमाजरा सहित शहर की मुख्य सड़कों पर लावारिश पशु घूमते मिल जाएंगे। पुलिस से लेकर शहर के कई अधिकारी सड़क से गुजरते हैं, लेकिन उन्हें लावारिस पशु नहीं दिखते हैं। रात के समय तो दक्षिण के सेक्टरों की सड़कों पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कमोबेश यही हाल चंडीगढ़-अंबाला हाईवे का है।
न कमेटी कुछ कर सकी और न ही अफसर
नगर निगम की ओर से शहर में पांच गोशालाएं संचालित हो रही हैं। सेक्टर-25, मलोया, सेक्टर-45 में एक-एक और इंडस्ट्रियल एरिया में दो गोशालाएं हैं। इनकी व्यवस्था को लेकर सदन में हमेशा मुद्दा उठता रहा है। कर्मचारियों पर रुपये लेकर पशुओं को छोड़ने का आरोप भी लगता रहा है। गोशालाओं में सीसीटीवी कैमरे चालू न होने तक की भी शिकायतें हुई हैं। इसके बाद कमेटी भी बनाई गई, लेकिन समस्या का निराकरण न कमेटी ने कराया न अफसरों ने सुना। गायों की हालत को लेकर लगातार वीडियो वायरल होता रहा है।
आज तक नहीं मिला न्याय
अगस्त 2019 में मलोया स्थित पार्क से होकर गुजर रही थी। एक व्यक्ति वहां अपनी गाय और भैंस चरा रहा था। भैंस ने हमला कर दो बार पटक दिया। रीढ़ की हड्डी में काफी चोट आई। ऑपरेशन के बाद अब थोड़ा चलना फिरना हो जाता है। इस संबंध में पुलिस से लेकर प्रशासन तक शिकायत की, कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार केस वापस लेना पड़ा। - दर्शना देवी, निवासी मलोया
नगर निगम का दस्ता शहर में लगातार घूमता रहता है। लावारिस पशुओं को गोशाला में ले जाया जाता है। गोशालाएं संचालन के लिए सामाजिक संस्थाओं को दी गईं हैं। जहां व्यवस्थाओं को समय-समय पर जांचा जाता है। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
काउ सेस से एक नई गोशाला का निर्माण हो रहा है। लोगों की शिकायत पर नगर निगम का दस्ता मवेशियों को उठाकर गोशाला में ले जाता है। दक्षिण के सेक्टरों में मोहाली से मवेशी घुस आते हैं। उन्हें रोकने के लिए सदन में योजना तैयार करने पर विचार करेंगे। -सरबजीत कौर, मेयर, चंडीगढ़
सुबह टहलने के लिए जाते हैं तो पार्क में काफी संख्या में पशु रहते हैं। कई बार तो डर लगता है कि ये घूम रहे बुजुर्गों और महिलाओं को मार न दे। - विश्व गुप्ता, सेक्टर 40
दक्षिण के सेक्टरों की सड़कों पर रात के समय निकलना चुनौतीभरा है। कई बार लोग अंधेरे में सड़क पर खड़े पशुओं को नहीं देख पाते हैं और टकराकर चोटिल हो जाते हैं। - बीएन शर्मा, प्रधान, फोसवा
सेक्टरों के अंदर भी लावारिस पशुओं के कारण लोग परेशान है। अंदर बने पार्कों में पशु खड़े रहते हैं। सुबह के समय टहलना भी मुश्किल होता है। - अनुज सहगल, सेक्टर-37
अधिकारी सिर्फ मोहाली से पशुओं के आने का बहाना बनाते हैं, जबकि काउ सेस से मिल रहे रुपये का उपयोग इन्हीं कार्यों में होना चाहिए। कोई योजना न होने से लोग परेशान हैं। - सुरेंद्र शर्मा, आरडब्ल्यूए प्रधान, सेक्टर 15
जान गई, नहीं मिला मुआवजा
मार्च 2019 में सेक्टर-39 वाटर वर्क्स कॉलोनी के पास अचानक गाय के सामने आने से बाइक सवार डड्डूमाजरा निवासी 26 वर्षीय विनोद की मौत हो गई थी। इस मामले में मलोया थाना पुलिस ने डीडीआर दर्ज की थी। युवक की दो साल पहले ही शादी हुई थी। युवक की मौत से परिवार एक तरह बिखर गया। प्रशासन और नगर निगम की तरफ से किसी तरह की मदद नहीं मिली।
गाय से टकराई बाइक, मौत
14 अगस्त 2014 की शाम सेक्टर-47 के कालीबाड़ी लाइट प्वाइंट के पास मोहाली निवासी हरप्रीत सिंह (48) की बाइक के सामने अचानक गाय के आ जाने से हादसा हो गया था। इसमें हरप्रीत सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। बता दें कि इससे पहले साल 2013 में लावारिस गायों की चपेट में आने से तीन मौतें हो चुकी थीं।परिजनों का कहना है कि पशुओं के चलते आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन गंभीर नहीं है।