चंडीगढ़: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मिला सड़ा गेहूं, खाकर लोग पड़ रहे बीमार
लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से जो गेहूं दिया गया है, उसे साफ करने के दौरान ही काफी कचरा निकला था। गेहूं को साफ कर जब उसे पिसवाया तो आटे में से बदबू आ रही थी।
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गरीबों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से जो गेहूं भेजा गया है, उसे खाकर शहर के लोग बीमार पड़ने लगे हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत मिले गेहूं के आटे से बनी रोटी को खाकर मलोया निवासी 23 वर्षीय रवि की तबीयत खराब हो गई। उन्होंने सेक्टर-23 के ईएसआई डिस्पेंसरी में दिखाया। रवि को पेट दर्द, उल्टी और गैस की शिकायत है।
रवि ने बताया कि करीब 10 दिन पहले उन्हें 175 किलो गेहूं मिला था, क्योंकि परिवार में छह सदस्य हैं। कुछ दिन बाद गेहूं को पिसवाने के बाद एक-दो दिन ही रोटी खाई थी कि आठ सितंबर को अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। रवि का ईएसआई कार्ड बना हुआ है। मलोया से सबसे पास में सेक्टर-23 की ईएसआई डिस्पेंसरी है, इसलिए रवि वहां गए। डॉक्टरों ने जांच की और पेट दर्द, उल्टी, गैस, एसिड रिफ्लेक्स और सुस्ती की शिकायत मिली। इसके बाद से वह दवाइयां खा रहे हैं।
रवि ने बताया कि मलोया में उनके ही ब्लॉक में कुछ अन्य लोगों की भी तबीयत खराब है। रवि की मां ने कहा कि प्रशासन की तरफ से जो गेहूं दिया गया है, उसे साफ करने के दौरान ही काफी कचरा निकला था। गेहूं को साफ कर जब उसे पिसवाया तो आटे में से बदबू आ रही थी। उन्होंने कहा कि अगर गेहूं अच्छा होता तो बदबू नहीं आती। यह एक घर की नहीं बल्कि हर घर की शिकायत है।
25 किलो की थैली में करीब ढाई किलो कचरा
धनास में रहने वाले सोनू नागर ने बताया कि वह दो भाई हैं। दोनों भाइयों को 25 किलो की 5-5 थैलियां मिली हैं। इनमें से दो थैलियों को खोलकर गेहूं को धोया है ताकि उसे पिसवाया जाए। धोने के समय दोनों थैलियों में से करीब ढाई-ढाई किलो काले दाने, कंकड़ और गंदगी निकली है। अब गेहूं को धूप में सुखा भी लिया है लेकिन पिसवाएं या नहीं, ये समझ नहीं आ रहा। सोनू ने कहा कि धोने के बाद भी गेहूं में से बदबू आ रही है। इस गेहूं का आटा खाकर परिवार की तबीयत खराब न हो जाए, इस डर से उसे पिसवा नहीं रहे हैं।
काले पड़ चुके थे दाने
धनास निवासी ओम प्रकाश ने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले 150 किलो गेहूं मिला था। उन्होंने जब थैली खोली तो देखा कि अंदर गांठ बनी हुई थी। ज्यादातर दाने काले पड़ चुके थे। किसी तरह गेहूं को साफ कर धोया और फिर पिसवाने के लिए लेकर गए लेकिन चक्की वाले ने पीसने से मना कर दिया। कहा कि वह ये गेहूं पीसेंगे तो चक्की में बदबू फैल जाएगी। इसके बाद उन्होंने डड्डूमाजरा में जाकर गेहूं पिसवाया। आटे में से बदबू आ रही है। यह आटा खाकर लोगों की तबीयत खराब हो जाएगी। प्रशासन ने लोगों को मारने का काम किया है।
खराब गेहूं की शिकायत के बाद प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। खराब गेहूं को वापस भेजा जा रहा है। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है। आगे ऐसा न हो, उसके भी कदम उठाए जा रहे हैं। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक