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Chandigarh News: लोग बोले- नेताओं और अधिकारियों ने बर्बाद कर दिया हमारा चंडीगढ़

Tue, 09 Sep 2025 02:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 02:07 AM IST
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People said- leaders and officials ruined our Chandigarh
चंडीगढ़। शहर की सड़कों के ऐसे हालात पहले कभी नहीं रहे। आए दिन हादसे हो रहे हैं। गाड़ी तो दूर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। इसके लिए प्रशासन और नगर निगम बराबर के जिम्मेदार हैं। हालांकि यह स्थिति एक दिन में नहीं हुई है। अधिकारियों और नेताओं ने हमारे चंडीगढ़ शहर को बर्बाद कर दिया है। कोई भी जिम्मेदार ठीक से सवाल तक नहीं उठा रहा है। सोमवार को शहर की सड़कों के बारे में अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम के दौरान यह बातें कही गईं।
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कार्यक्रम में आए सभी लोगों ने स्वीकार किया कि चंडीगढ़ की सड़कों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो गई हैं। कार्यक्रम में आए सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एसएस रंधावा ने बताया कि वह 60 साल से यहां हैं। 25 साल से शहर लगातार पीछे जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई एक विभाग इसके लिए जिम्मेदार नहीं है बल्कि पूरा सिस्टम दोषी है। सेक्टर-37 मार्केट के कारोबारी अनुज कुमार सहगल ने बताया कि शहर की सड़कें इससे ज्यादा कभी खराब नहीं रहीं। कोई भी विभाग अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहा है।
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सामाजिक कार्यकर्ता आरके गर्ग ने बताया कि विभागों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। केवल नगर निगम को दोषी ठहराना गलत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में प्रशासन नकारा है। फॉसवेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि शहर की स्थिति बहुत ज्यादा खराब है।
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औद्योगिक घराने सरकार चला रहे हैं

कार्यक्रम में आए वक्ताओं ने कहा कि पता चल रहा है कि मौजूदा समय सरकार राज्यपाल नहीं चला रहे हैं बल्कि औद्योगिक घराने चला रहे हैं। यहां से अच्छी सड़कें मोहाली और पंचकूला की हैं। चंडीगढ़ में सड़कें बनने के कुछ साल के अंदर ही खराब हो जा रही हैं। ऐसे में यह आवश्यक होना चाहिए कि गुणवत्ता के साथ काम हो रहा है या नहीं।

पार्षद के अधिकार ज्यादा होने चाहिए

आम आदमी पार्टी की पार्षद प्रेमलता ने बताया कि उन्हें वार्ड विकास के लिए 80 लाख का बजट मिलता है वह भी तीन साल से खर्च नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारी बजट न होने की बात करते हैं। अगर हम कोई काम कराना चाहें तो उसमें इतनी ज्यादा कागजी कार्रवाई होगी कि उसके होने में 7 से 8 महीने लग जाएंगे। सड़कों को मुद्दा लगातार सदन के अंदर उठाते हैं।

बजट ज्यादा आए तो परेशानी कम हो जाएगी

डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ने बताया कि चौथे दिल्ली वित्त आयोग के हिसाब से नगर निगम का बजट आना चाहिए। अगर वह आए तो सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। अभी जो बजट आ रहा है उसमें कर्मचारियों का वेतन देना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन को सड़क देने की नौबत भी इसीलिए आई है। एक विभाग से दूसरे विभाग को सड़क देना समस्या का समाधान नहीं है। अधिकारी और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता अजय कुमार ने बताया कि वार्ड नंबर तीन की सड़क बहुत ज्यादा खराब है। शिकायत के बाद भी काम नहीं होता है। कोई ऐसा दिन नहीं है जब मंडी में आने वाले ट्रक वहां न फंसते हों। सड़कें स्मार्ट की जगह बदहाल हो गई हैं।

अफसर ने 13 अगस्त को पूछे सवाल का जवाब नहीं दिया

नगर निगम में हुई सदन की बैठक में 13 अगस्त को भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि हमारे पास अधिकार हैं। हमने उसी अधिकार के तहत सड़कों को लेकर सवाल किया था। इसमें यह पूछा गया था कि पांच साल से कितनी सड़कें नहीं बनीं। इसके अलावा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई समेत कई सवाल थे। हाउस में इस सवाल का जवाब आना चाहिए था लेकिन चीफ इंजीनियर और बाकी जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से जवाब नहीं आया। सड़कों को लेकर हर साल रिपोर्ट बनानी होती है लेकिन कुछ भी तैयार नहीं होता है।


टूर करने के लिए पैसा है लेकिन जनता के लिए नहीं


इंदिरा कॉलोनी में रहने वाले साहिल ने बताया कि जनता के काम के लिए पैसा नहीं होता है लेकिन अगर नेताओं को कहीं टूर पर जाना हो तो चले जाते हैं। चंडीगढ़ में बस सड़क बनाने के लिए पैसा न होना अजीब बात है। उन्होंने बताया कि उनके इलाके की एक गर्भवती महिला ई-रिक्शा से उतरकर पैदल सफर करने को मजबूर हो गई ताकि कहीं उनके होने वाले बच्चे को कोई दिक्कत न आ जाए।



सड़क टूटने का मुख्य कारण जलभराव

कार्यक्रम में आए हरप्रीत हैप्पी और राजीव तुल्ली ने कहा सड़कों को लेकर प्रशासन को काम करना चाहिए। सड़क टूटने का मुख्य कारण जलभराव भी है। मनीमाजरा व्यापार मंडल के प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि उनके यहां तो बहुत बुरा हाल है। पिछले दिनों कई युवाओं ने मिलकर खुद ही गड्ढों को भरने का अभियान शुरू कर दिया था। कांग्रेस नेता यादविंदर मेहता और पंकज ठाकुर ने कहा कि नगर निगम ने खराब और बहुत खराब सड़कों की सूची तैयार की थी। अब बारिश के बाद खराब सड़कें बहुत ज्यादा खराब की श्रेणी में आ गई हैं। ऐसे में निगम को पर्याप्त बजट मिले बिना सुधार संभव नहीं है।
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