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Hindi News ›   Chandigarh ›   People of Panchkula are giving message of animal love

बेहद खास है इनका पशु प्रेम, किसी ने बनाया 'बेटी' तो कोई कर रहा कुत्तों की सेवा

Sun, 30 Aug 2020 06:36 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 30 Aug 2020 06:36 PM IST
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People of Panchkula are giving message of animal love
डॉ. नरिता संग खेलते हुए स्ट्रे डॉग्स। - फोटो : अमर उजाला

पंचकूला के दयावान लोगों का क्या कहना। यहां स्ट्रीट डॉग्स की तादाद बढ़ी तो इनके लोग रहनुमा भी बन गए। चाहे डॉ. नरिता तिवारी हों या फिर गुरपाल सिंह और मोतीराम। स्ट्रीट डॉग्स को देखते ही सभी का प्यार उमड़ पड़ता है। इन्होंने स्ट्रीट डॉग्स को अपने बच्चों से भी ज्यादा बढ़कर न सिर्फ पालना शुरू कर दिया है बल्कि उनकी हर बात का ध्यान भी रखते हैं। 

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...तो करने लगीं सेक्टर के डॉग्स की सेवा
मेरा एक डॉग था। उसको एक दिन रेबीज से पीड़ित स्ट्रीट डॉग ने काट लिया। नतीजा हुआ कि उसकी मौत हो गई। उसी दिन से मेरी दिमाग में यह बात बैठ गई कि अपने डॉग को ही एंटी रेबीज लगवाना ठीक नहीं, हमको स्ट्रीट डॉग्स को भी एंटी रेबीज लगवा चाहिए। इससे न सिर्फ हमारे डॉग्स सुरक्षित रहेंगे बल्कि क्षेत्र के सभी डॉग्स भी ठीक होंगे। बस इसी कांसेप्ट को लेकर आगे चल पड़ी। मैंने अपने भाई के साथ मिलकर सेक्टर-7 के स्ट्रीट डाग्स को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाना शुरू किया। मैं करीब दस साल से ऐसा कर रही हूं। मैंने अपने भाई अरुज से वित्तीय सहायता ली और उसके साथ अपने आसपास के डॉग्स को फीडिंग करवाने की शुरुआत कर दी। अब यह इतना अच्छा लगता है कि मैं चाहती हूं कि ज्यादा इलाकों के डॉग्स की केयर करूं। - डॉ. नरिता तिवारी, सेक्टर-7 पंचकूला
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                                                           गुरुदेव सिंह और मोतीराम।

‘पिंकी’ को बना लिया अपनी बेटी
बैंक में सिक्योरिटी गार्ड हूं। मेरी पत्नी की मौत हो चुकी है और मेरे बच्चे मेरा साथ नहीं देते हैं। क्या करूं? मेरे लिए समय काटना भी मुश्किल था। फिर मैंने एक स्ट्रीट डाग्स की देखभाल करनी शुरू कर दी। इसका नाम मैंने पिंकी रख दिया। अब मैं जब अपने जॉब से लौटकर आता हूं तो एक बेटी की तरह वह मेरा इंतजार करती मिलती है। अच्छा लगता है। अब जिंदगी में कुछ नया लगता है। मैं उसके लिए फिक्रमंद हूं और वह मेरे लिए। बेशक मेरी तनख्वाह कम है, लेकिन मेरी जरूरतें भी कम हैं। यही वजह है कि मैं पिंकी को अपनी बेटी की तरह रखता हूं और तनख्वाह का आधा भाग उसकी केयर पर खर्च कर देता हूं। - गुरदेव सिंह सेक्टर-7, पंचकूला

हर डॉग को मिलता है सहारा
सेक्टर-7 में रहता हूं। मैं अक्सर देखता था कि कई डॉग्स बच्चों को जन्म देते हैं और उसके बाद उनकी सड़क में मौत हो जाती थी। बस यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई। मैंने तय किया कि जो भी डॉग बच्चों को जन्म देगी। उनको शेल्टर का इंतजाम करूंगा। इस काम में मेरी मदद सेक्टर के कई लोग करते हैं। वह अक्सर बता दिया करते हैं कि डॉग ने बच्चे दिए हैं। यह करते हुए मुझे बड़ी खुशी होती है। सिर्फ इतना ही नहीं, शेल्टर के साथ ही मैं स्ट्रीट डॉग्स को खाना भी देता हूं और उनकी केयर भी करता हूं। - मोतीराम, सेक्टर-7, पंचकूला

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