अमर उजाला पड़ताल: स्वास्थ्य विभाग का हाल, एमआरआई चंद घंटों में, अल्ट्रासाउंड दो महीने बाद
चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। तीन मशीनों के होने के बावजूद लोगों को अल्ट्रासाउंड की खातिर दो-दो महीने इंतजार करना पड़ता है। अब स्वास्थ्य विभाग पीपीपी मोड में समस्या को दूर करने की तैयारी में है। लोगों को कहना है कि मरीजों को सिर्फ सुविधाओं का लॉलीपॉप दिखाया जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग इन दिनों अजीब अव्यवस्था का शिकार है। स्थितियां यह हैं कि जीएमएसएच-16 में एमआरआई के लिए कुछ घंटे और अल्ट्रासाउंड के लिए दो महीने बाद की डेट दी जा रही है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को न चाहते हुए भी निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ रहा है। जहां उन्हें तीन से चार गुना ज्यादा पैसे खर्च कर जांच करवाना पड़ रहा है।
इस समस्या का मुख्य कारण स्वास्थ्य विभाग के तीनों सिविल अस्पतालों में लंबे समय से अल्ट्रासाउंड की सुविधा का बंद होना है। कारण मनीमाजरा, सेक्टर 22 और सेक्टर 45 स्थित सिविल अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली होना है। इससे इन तीनों ही जगह के मरीज जांच के लिए जीएमएसएच-16 रेफर किए जा रहे हैं। इससे यहां मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन वहां 100 से 130 अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। इसके बावजूद मरीजों को डेढ़ से दो महीने की लंबी डेट दी जा रही है। शनिवार को ओपीडी में दिखाने आए मलोया के रमेश चंद्र को डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करने के लिए कहा लेकिन जांच के लिए आने पर उन्हें मार्च की डेट दी गई। उन्होंने कहा कि परेशानी अभी है तो जांच मार्च में करने से क्या लाभ होगा, इसलिए निजी सेंटर में ही जाकर जांच करवाना पड़ेगा। इस तरह की समस्या हल्लोमाजरा निवासी सीमा शर्मा को भी झेलनी पड़ी। वह भी अपनी सास को लेकर ओपीडी में आई थी। उन्हें भी अल्ट्रासाउंड के लिए 10 मार्च की डेट दी गई।
तीन मशीन फिर भी लंबा इंतजार
अस्पताल में मौजूदा समय में तीन अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन हो रहा है। जिस पर सुबह नौ से दोपहर बाद तीन बजे तक अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। वहीं, अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि 2015 तक अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के लेबर रूम से अटैच अल्ट्रासाउंड रूम हुआ करता था। जहां गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता था लेकिन 2015 के बाद से वहां के डॉक्टर का पद खाली है। वहां की मशीन पर इमरजेंसी में कुछ अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जिसे करने के लिए ओपीडी के डॉक्टर को वहां जाना पड़ता है। इस दौरान ओपीडी में जांच बंद करनी पड़ती है।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति बेहद खराब है। मरीजों को सिर्फ सुविधाओं का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है। जनता के हिस्से तो सिर्फ इंतजार ही आ रहा है। देखें डॉक्टरों की समस्या कब तक दूर होती है। -मानिक गोयल
अल्ट्रासाउंड की सुविधा किसी भी सिविल अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, जबकि सभी जगह मशीन खरीद कर रखी हुई है। यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। जब डॉक्टर नहीं है तो फिर मशीनों पर पैसे बर्बाद करने का क्या मतलब है। विभाग को जल्द से जल्द डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। -नीरज अग्रवाल
पीपीपी मोड पर समस्या दूर करने की तैयारी
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह का कहना है कि विभाग पीपीपी मोड से रेडियोलॉजी सेवाएं प्रदान करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए एक धर्मार्थ ट्रस्ट रियायती दरों पर ये सेवाएं प्रदान करने के लिए आगे आया है। मौजूदा समय में केवल स्त्री रोग विभाग के लिए एक रेडियोलॉजिस्ट को नियुक्त किया गया है, ताकि लोगों के खर्च को कम किया जा सके। परिधीय उपग्रह अस्पतालों में रेडियोलॉजी केंद्रों को मरीजों के हित में शीघ्र ही कार्यात्मक बनाया जाएगा। इसी तरह एनेस्थीस्यिा की एक टीम को सूचीबद्ध किया गया है ताकि सभी प्रमुख स्वास्थ्य सुविधाओं पर 24/7 सर्जिकल देखभाल प्रदान की जा सके।
जीएमएसएच 16 पर रेफरल केस का दबाव बहुत ज्यादा है। सिविल अस्पतालों के साथ चंडीगढ़ और आसपास के अन्य प्रदेशों से भी रेफर केस यहां आ रहे हैं। इस कारण वेटिंग लिस्ट बढ़ती जा रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए पीपीपी मोड पर सिविल अस्पतालों में सुविधा बहाल करने की योजना बनाई गई है। जल्द ही मरीजों को इस समस्या से निजात मिल जाएगी। - डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच-16।