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चंडीगढ़ में लोग परेशान: पांच माह से निगम ने न किसी कुत्ते को पकड़ा, न किसी कुत्ते की नसबंदी की

Fri, 01 Apr 2022 01:23 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 01 Apr 2022 01:23 PM IST
सार

फरवरी माह की सदन की बैठक में भी लावारिस कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता जताई गई थी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हमारे इतने प्रयास के बावजूद कुत्तों को रोकने में निगम नाकाम रहा है।

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People getting troubled by stray dogs in Chandigarh
लावारिस कुत्ते - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सदन में लावारिस कुत्तों के घुमाने पर चालान का शुल्क कम न करने का एजेंडा रद्द होने के बाद निगम ने भी चालान करने से मना कर दिया है। गर्मी बढ़ने के साथ कुत्तों का आतंक तेजी से बढ़ेगा क्योंकि पिछले पांच माह से निगम ने कुत्तों की नसबंदी का काम बंद कर रखा है। कुत्तों की संख्या में तेजी से बढ़ी है। वहीं लोगों का कहना है कि शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। पार्क में घूमने से लेकर सड़कों पर बाइक से निकलने में डर लगता है। इस समस्या से कब निजात मिलेगी।

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सेक्टर-37 निवासी संदीप गुप्ता ने बताया कि लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर उन्होंने नगर निगम के साथ प्रशासक व स्थानीय थाना पुलिस तक को शिकायत दे रखी है लेकिन कहीं से कोई राहत नहीं मिली है। पार्क में बुजुर्ग टहलते हैं और बच्चे भी खेलते हैं लेकिन कुत्तों की वजह से लोगों को काफी मुश्किल होती है। यही स्थिति रही तो बच्चे कहां जाएंगे, बुजुर्ग कहां टहलेंगे। निगम को इसमें तत्काल संज्ञान लेना चाहिए लेकिन आपसी खींचतान के चलते कोई निर्णय नहीं हो रहा है।
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सख्ती का उठा मुद्दा, जुर्माना कम करने का आया प्रस्ताव
फरवरी माह की सदन की बैठक में भी लावारिस कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता जताई गई थी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हमारे इतने प्रयास के बावजूद कुत्तों को रोकने में निगम नाकाम रहा है। लोग हमें आकर समस्या बताते हैं लेकिन कुत्तों को पकड़कर कहां ले जाएं, उनकी नसबंदी का स्टेटस कुछ भी पता नहीं चलता। एक कंपनी को टेंडर देकर निगम फंस जाता है क्योंकि शिकायत के बाद जब उस पर कार्रवाई होती है तो नसबंदी का चक्र टूट जाता है। इससे समस्या खड़ी होती है। 

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निगम आयुक्त ने सदन में कहा कि गोवा ने स्वयं को रैबीज मुक्त घोषित कर रखा है। इसे लेकर वहां काफी प्रयास हुआ तब जाकर गोवा को यह सफलता मिली। हम वहां के नियमों को चेक कर लेते हैं, उन पर अमल करेंगे और थोड़ी सख्ती बढ़ाई जाएगी तो काफी हद तक राहत मिलेगी। मार्च माह की सदन की बैठक में प्रस्ताव आया तो उसमें जुर्माना कम करने को कहा गया। इस पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने विरोध कर दिया।   

कुत्तों को टहलाने के लिए पार्क बनाने की है योजना
शहर में एक बड़ी समस्या कुत्तों को टहलाने की है। लोगों को कहना है कि निगम चालान तो कर देता है लेकिन टहलाने कहां जाएं, इसका जबाव किसी के पास नहीं है। नगर निगम बड़े पार्कों में से कुछ हिस्सा कुत्तों को टहलाने के लिए बना रहा है। इससे लोगों को अपने कुत्ते को टहलाने के लिए एक जगह मिल जाएगी और निगम सख्ती से कार्रवाई भी कर सकेगा।

अप्रैल में कंपनियों से मांगेंगे आवेदन
नगर निगम कुत्तों की नसबंदी को लेकर अप्रैल में टेंडर करेगा। पिछली बार आई शिकायतों के बाद इस बार टेंडर प्रक्रिया में सख्ती भी बरती जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में कोई कंपनी आई तो ठीक, नहीं तो मई माह से निगम ही डॉक्टरों के साथ अनुबंध कर इस कार्य को शुरू कर देगा। 

रायपुरकलां में एबीसी व केयर यूनिट बनाने का प्रस्ताव
निगम ने रायपुरकलां में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर और डॉग केयर यूनिट बनाने का प्रस्ताव भी सदन को दिया है। सदन ने इस पर सहमति तो दे दी है लेकिन पहले चल रहे कार्यों का ब्योरा भी मांग लिया है। इन दोनों सेंटरों के बनने से लाभ तो लोगों को मिलेगा लेकिन यह कब तक चलेंगे इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

पालतू कुत्तों की संख्या बढ़ी, पंजीकरण की गति धीमी
अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल 2015 से लेकर अगस्त 2021 तक 17,445 लावारिस कुत्तों को नगर निगम की ओर से एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए हैं। इसके बाद कोरोना के चलते इंजेक्शन नहीं लगाए गए। 2012 में हुए सर्वे के अनुसार, शहर में कुल 7900 लावारिस कुत्ते थे, जो अब 15 हजार से ज्यादा हो चुके हैं। वहीं 7100 पालतू कुत्तों का पंजीकरण कराया गया था, जो अब 11 हजार तक पहुंच गया है। 

कुत्तों के काटने के केस बढ़े
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लॉकडाउन से पहले सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में प्रतिदिन कुत्तों के काटने के 15 से 20 केस आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 50 तक पहुंच गया है। हालांकि इस दौरान हर साल की अपेक्षा गर्मियों में कुत्तों के काटने की घटनाएं कम हुई हैं क्योंकि लोग घरों में ही रहे, लेकिन अब सबकुछ खुल गया है तो फिर यह समस्या बढ़ेगी। कुत्तों की नसबंदी न होने से लोगों के लिए यह खतरनाक होगा।

लाख रुपये खर्च सेमिनार पर खर्च, परिणाम शून्य
वर्ष 2019 में तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के कहने पर नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने को एक राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया था। इस पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा था कि खतरनाक नस्ल के कुत्तों को पालने पर प्रतिबंध लगाया जाए, फीमेल डॉग की नसबंदी की जाए, नसबंदी का रिकॉर्ड रखा जाए ताकि दवा का असर खत्म होने के बाद उस कुत्ते की तत्काल वैक्सीनेशन की जा सके। कुत्तों के खरीदने व बेचने का रिकॉर्ड बने, जागरूकता शिविर लगाए जाएं और वैक्सीन लगाने वाली दुकानों का पंजीकरण हो। अब तक इनमें से एक भी सुझाव पर अमल नहीं हुआ और न ही कोई बैठक बुलाई गई।
 

कुत्तों की नसबंदी को लेकर कंपनी से आवेदन मांगने की तैयारी चल रही है। कंपनी नहीं आएगी तो अपने स्तर पर डॉक्टर की व्यवस्था करके इस समस्या को सुलझाएंगे। रही बात चालान की तो हम नियम के विपरीत चालान नहीं कर सकते हैं। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम

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