{"_id":"57ebe5a44f1c1ba774573c7f","slug":"pension-op-chautala-haryana-punjab-haryana-highcourt","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का चौटाला पिता-पुत्र, कादियान और बड़शामी को नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का चौटाला पिता-पुत्र, कादियान और बड़शामी को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 28 Sep 2016 09:15 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अदालत से सजा पाए हरियाणा के चार नेताओं- पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, अजय चौटाला, शेर सिंह बड़शामी और सतबीर सिंह कादियान को पूर्व विधायक के रूप में दी जा रही पेंशन को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस एसएस सरों व जस्टिस हरिपाल वर्मा की डिविजन बेंच ने हरियाणा सरकार, हरियाणा विधानसभा के सचिव और उक्त चारों नेताओं को नोटिस जारी किया। बेंच ने पूछा है कि क्यों न उनकी पेंशन पर रोक लगा दी जाए। मामले में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
याचिकाकर्ता एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने विधानसभा सचिवालय से पूर्व विधायकों को जारी होने वाले पेंशन के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। इस दौरान उन्हें पता चला कि 288 पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है, जिनमें ओमप्रकाश चौटाला को 2 लाख 15 हजार 430 रुपये पेंशन मिल रही है। जबकि उनके पुत्र अजय चौटाला को 50 हजार 100 रुपये प्रति माह पेंशन मिल रही है।
विज्ञापन
इसके अलावा पूर्व विधायक शेरसिंह बड़शामी को 50 हजार 100 रुपये प्रति माह पेंशन दी जा रही है। जबकि इन तीनों नेता भ्रष्टाचार के आरोप में 16 दिसंबर, 2013 को अदालत द्वारा दस साल की सजा पा चुके हैं। इसके अलावा पूर्व स्पीकर सतबीर सिंह कादियान को 26 अगस्त, 2016 को सात साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
याची का कहना है कि भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत सजा होने के बाद इन सभी नेताओं को पेंशन जारी रखना गैर कानूनी है और जनता के पैसे का दुरुपयोग है। उन्होंने हाईकोर्ट में बहस के दौरान कहा कि हरियाणा विधानसभा की धारा 7-ए (1-ए) (वेतन, भत्ता और सदस्यों की पेंशन) अधिनियम, 1975 के तहत अगर किसी विधायक को अदालत दोषी करार देकर सजा सुना दे तो वे पेंशन के अयोग्य हैं।
याची की ओर से मामले पर पहले भी एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा के सचिव को निर्णय लेने का जिम्मा सौंपते हुए याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 22 अगस्त, 2016 को विधानसभा सचिव ने आदेश पारित करते हुए चौटाला पिता-पुत्र को आरपी एक्ट के तहत अयोग्य ठहराने से इंकार कर दिया।
साथ ही आरपी एक्ट के तहत ही उनकी पेंशन रोकने से भी इंकार कर दिया था। विधानसभा सचिव का मानना था कि सजा सुनाए जाने के बाद कोई पूर्व विधायक चुनाव लड़ने के अयोग्य तो हो सकता है, लेकिन पूर्व विधायक के रूप में पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
बुधवार को याची ने अपनी जनहित याचिका में हरियाणा विधानसभा सचिव के उक्त फैसले का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट से कहा कि विधानसभा सचिव का आदेश गैरकानूनी है और यह आदेश जारी करते हुए तय नियमों व प्रावधानों पर विचार नहीं किया गया है।
विज्ञापन
बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस एसएस सरों व जस्टिस हरिपाल वर्मा की डिविजन बेंच ने हरियाणा सरकार, हरियाणा विधानसभा के सचिव और उक्त चारों नेताओं को नोटिस जारी किया। बेंच ने पूछा है कि क्यों न उनकी पेंशन पर रोक लगा दी जाए। मामले में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने विधानसभा सचिवालय से पूर्व विधायकों को जारी होने वाले पेंशन के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। इस दौरान उन्हें पता चला कि 288 पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है, जिनमें ओमप्रकाश चौटाला को 2 लाख 15 हजार 430 रुपये पेंशन मिल रही है। जबकि उनके पुत्र अजय चौटाला को 50 हजार 100 रुपये प्रति माह पेंशन मिल रही है।
विज्ञापन
इसके अलावा पूर्व विधायक शेरसिंह बड़शामी को 50 हजार 100 रुपये प्रति माह पेंशन दी जा रही है। जबकि इन तीनों नेता भ्रष्टाचार के आरोप में 16 दिसंबर, 2013 को अदालत द्वारा दस साल की सजा पा चुके हैं। इसके अलावा पूर्व स्पीकर सतबीर सिंह कादियान को 26 अगस्त, 2016 को सात साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
याची का कहना है कि भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत सजा होने के बाद इन सभी नेताओं को पेंशन जारी रखना गैर कानूनी है और जनता के पैसे का दुरुपयोग है। उन्होंने हाईकोर्ट में बहस के दौरान कहा कि हरियाणा विधानसभा की धारा 7-ए (1-ए) (वेतन, भत्ता और सदस्यों की पेंशन) अधिनियम, 1975 के तहत अगर किसी विधायक को अदालत दोषी करार देकर सजा सुना दे तो वे पेंशन के अयोग्य हैं।
याची की ओर से मामले पर पहले भी एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा के सचिव को निर्णय लेने का जिम्मा सौंपते हुए याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 22 अगस्त, 2016 को विधानसभा सचिव ने आदेश पारित करते हुए चौटाला पिता-पुत्र को आरपी एक्ट के तहत अयोग्य ठहराने से इंकार कर दिया।
साथ ही आरपी एक्ट के तहत ही उनकी पेंशन रोकने से भी इंकार कर दिया था। विधानसभा सचिव का मानना था कि सजा सुनाए जाने के बाद कोई पूर्व विधायक चुनाव लड़ने के अयोग्य तो हो सकता है, लेकिन पूर्व विधायक के रूप में पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
बुधवार को याची ने अपनी जनहित याचिका में हरियाणा विधानसभा सचिव के उक्त फैसले का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट से कहा कि विधानसभा सचिव का आदेश गैरकानूनी है और यह आदेश जारी करते हुए तय नियमों व प्रावधानों पर विचार नहीं किया गया है।