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पेक निदेशक की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Mon, 30 May 2016 11:31 PM IST
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पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक मनोज अरोड़ा
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक मनोज अरोड़ा को बड़ी राहत देते हुए सोमवार को एकल बेंच की ओर से उनकी नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। बीते सप्ताह जस्टिस पीबी बजंतरी ने मनोज अरोड़ा की पेक निदेशक पद पर की गई नियुक्ति को रद्द कर दिया था।
सोमवार को जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट आरएस बैंस के जरिए मनोज अरोड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए एकल बैंच के फैसले को गलत ठहराया। अरोड़ा के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन ने भी एकल बैंच के फैसले के खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट में अपील की। इन दोनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए डबल बेंच ने एकल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए सभी प्रतिवादियों को आगामी दो सिंतबर के लिए नोटिस जारी किया है।
डबल बेंच के समक्ष सोमवार को मनोज अरोड़ा ने कहा कि उनकी नियुक्ति तय प्रक्रिया और प्रावधानों के अनुसार हुई है और शिकायतकर्ता का यह दावा कि इस पर नियुक्ति का विज्ञापन नहीं दिया गया, गलत है। अरोड़ा की ओर से कहा गया कि उनकी नियुक्ति जिस चयन समिति द्वारा की गई है, उसमें प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पांच वर्ष के सेवाकाल में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चूका है, लिहाजा उन्हें अपना बाकी कार्यकाल पूरा करने की इजाजत दी जाए।
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मनोज अरोड़ा की पेक निदेशक पद पर नियुक्ति को इसी पद के अन्य दावेदार प्रदीप गर्ग ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की एकल बेंच ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद अरोड़ा की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और इस पद पर नए सिरे से नियुक्ति करने के आदेश जारी किए थे।
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सोमवार को जस्टिस महेश ग्रोवर और जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट आरएस बैंस के जरिए मनोज अरोड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए एकल बैंच के फैसले को गलत ठहराया। अरोड़ा के साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन ने भी एकल बैंच के फैसले के खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट में अपील की। इन दोनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए डबल बेंच ने एकल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए सभी प्रतिवादियों को आगामी दो सिंतबर के लिए नोटिस जारी किया है।
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डबल बेंच के समक्ष सोमवार को मनोज अरोड़ा ने कहा कि उनकी नियुक्ति तय प्रक्रिया और प्रावधानों के अनुसार हुई है और शिकायतकर्ता का यह दावा कि इस पर नियुक्ति का विज्ञापन नहीं दिया गया, गलत है। अरोड़ा की ओर से कहा गया कि उनकी नियुक्ति जिस चयन समिति द्वारा की गई है, उसमें प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पांच वर्ष के सेवाकाल में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चूका है, लिहाजा उन्हें अपना बाकी कार्यकाल पूरा करने की इजाजत दी जाए।
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मनोज अरोड़ा की पेक निदेशक पद पर नियुक्ति को इसी पद के अन्य दावेदार प्रदीप गर्ग ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की एकल बेंच ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद अरोड़ा की नियुक्ति को रद्द कर दिया था और इस पद पर नए सिरे से नियुक्ति करने के आदेश जारी किए थे।