अमर उजाला पड़ताल: पीजीआई में दर्द और गैस के इंजेक्शन तक नहीं मिलते, बाकी अस्पतालों में भी दवाओं का टोटा
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्था और बदहाल हो रही है। उस पर अधिकारी नई नई योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में जुटे हुए हैं। अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीज इलाज के लिए परेशान हैं लेकिन प्रशासन की नजर में सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है।
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चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में सस्ते इलाज की आस लगाए रोज हजारों मरीज पहुंचते हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। अस्पतालों में स्थिति खराब है। यहां इलाज कराने वाले वाले मरीजों को न दवाएं मिल पा रही हैं न बेड। आलम यह है कि देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान में शुमार पीजीआई में भी मरीजों को दर्द और गैस का इंजेक्शन तक बाहर से खरीदना पड़ रहा है। वहीं जीएमसीएच-32 व स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र भी बदहाल स्थिति में हैं क्योंकि वहां की ओपीडी छोड़िए इमरजेंसी में मरीज की जान बचाने के लिए आवश्यक मानी जाने वाली जीवनरक्षक दवाओं का भी टोटा है।
अस्पतालों की ऊपरी सूरत चमकाने में लगे अधिकारी दवा जैसी महत्वपूर्ण जरूरत की पूर्ति सुनिश्चित करने में अनदेखी कर खुलेआम मरीजों की जान जोखिम में डालने का इंतजाम किए हुए हैं। इतना ही नहीं सभी का दावा है कि उनके यहां दवाओं की कोई कमी नहीं है जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्था और बदहाल हो रही है। उस पर अधिकारी नई नई योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में जुटे हुए हैं। अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीज इलाज के लिए परेशान हैं लेकिन प्रशासन की नजर में सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। अगर स्थिति पर गौर किया जाए तो जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में भर्ती गंभीर मरीजों का इलाज बिना दवाओं के ही किया जा रहा है क्योंकि वहां इमरजेंसी ड्रग लिस्ट में से आधे से ज्यादा जरूरी आइटम तो उपलब्ध ही नहीं हैं।
डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल तक की कमी
चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों की स्थिति बेहद सोचनीय है। विभाग में पिछले 27 वर्षों से एक भी पद पर नियमित डॉक्टर की तैनाती नहीं की है। इसे विभाग ने भी स्वीकार किया है। मौजूदा समय में डॉक्टरों के 91 पद खाली हैं। इसमें 80 चिकित्सा अधिकारी, नौ दंत रोग के चिकित्सा अधिकारी और दो वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों में इस कदर अनदेखी की जा रही है कि डॉक्टरों के कुल 232 पदों में से 141 पर ही तैनाती है और बाकी पद खाली पड़े हैं। नियुक्तियों में अनदेखी के कारण ही मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं पीजीआई में नर्सिंग ऑफिसर के 1500 पद और जीएमसीएच-32 में 567 पद सृजन की प्रक्रिया पिछले पांच वर्षों से लंबित हैं। मानक से कम स्टाफ के बल पर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है।
इलाज के नाम पर मरीजों से हो रहा धोखा
सरकारी अस्पतालों की स्थिति बदतर हो चुकी है। इलाज के नाम पर मरीजों को धोखा देने का काम हो रहा है। दवा से लेकर डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। महीनों चक्कर लगवाने के बाद जब मरीज की हालत बिगड़ जाती है तो पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। - दिनेश पासवान, मलोया
सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधाएं नहीं
सरकारी अस्पताल के नाम पर जनता को धोखा देने का काम हो रहा है। चंद दवाएं ही वहां उपलब्ध होती हैं। जांच की सुविधाएं नहीं होतीं। मशीन खरीदकर डंप किया जा रहा है। विशेषज्ञों के पद खाली हैं। इतनी अव्यवस्था के बीच एक गरीब को सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज भला कैसे मिल सकता है। - पारसनाथ यादव, सुंदर नगर
इन अस्पतालों में ये दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं
अस्पताल जो दवाएं नहीं हैं उपलब्ध
पीजीआई रेंटैक, पिपेरसिलिन, इम्पेनेम, ट्रामाडोल और वोनकोमाइसिन।
जीएमसीएच 32 ट्रेकोस्टॉमी ट्यूब, बच्चों के लिए सेंट्रल लाइन, यूरोमीटर बैग, मेरोपेनम, इमिपेनम, वैनकॉमायसिन, लिनेजोलिद, कोलिस्टिन, लेविप्रिल, एप्टोइन, मिडाजोलम, वैकुरोनियम, नॉर एड्रेनालाइन, क्लॉक्सासिलिन, 0.45 एनएस, डीएनएस/2, रेस्प्यूल डुओलिन, रेस्प्यूल बुडेकोर्ट, एस्थेलिन, मेलेना सीट, राइल की नली, एनआरएम मास्क और नेबुलाइजेशन किट।
जीएमएसएच 16 एटोपाइन, एडीआर, पोटेशियम क्लोराइड, कैल्शियम ग्लूकोनेट, मैग्नीशियम सल्फेट, सोडा बाइकार्बोनेट, वेरक्लाव 625 सिरप, अम्लोदीपिन 5एमजी, सेफ्ट्रिएक्सोन, नाइट्रोफ्यूरेंटोइन, लेवोसेट्रिजिन, टेल्मिस्ट्रिन, अल्प्राजोलम, सिरप गेलुसिल और इंसुलिन।
सभी जिम्मेदारों का एक जवाब-जांच करवाएंगे
ओपीडी से लेकर इमरजेंसी व स्वास्थ्य केंद्रों पर सभी जरूरी दवाओं व इंजेक्शन की आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद अगर मरीजों से बाहर की दवाई और इंजेक्शन खरीदवाई जा रही है तो इसकी जांच की जाएगी। -डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच-16
पीजीआई में दवाओं और इंजेक्शन के साथ ही सर्जिकल आइटम के भरपूर स्टॉक उपलब्ध है। अगर किसी भर्ती मरीज को यह बाहर से खरीदने के लिए विवश किया जा रहा है तो इसकी शिकायत प्रशासन से करें। -कुमार गौरव, डीडीए व पीजीआई प्रवक्ता
अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर पूरा प्रयास कर रहा है कि मरीजों को बाहर की दवा खरीदने की जरूरत न पड़े। इसके लिए दवा स्टोर के साथ ही अमृत फार्मेसी का संचालन किया जा रहा है। -डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32