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16 माह पहले रची साजिश, कैसे होगा आतंकी हमला

Tue, 05 Jan 2016 01:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट।
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट। Updated Tue, 05 Jan 2016 01:32 PM IST
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pathankot terrorist attack behind story

पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने पठानकोट एयरबेस एयरफोर्स स्टेशन पर हमले की साजिश का तानाबाना करीब 16 माह पहले बुनना शुरू कर दिया था। इसके लिए पठानकोट एरयबेस में तैनात एयरमैन सुनील को जाल में फंसाकर बेहद अहम जानकारियां हासिल की गई। मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले सुनील को एक सितंबर 2014 को गिरफ्तार किया गया था।

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पठानकोट पुलिस ने उसके खिलाफ जासूसी का केस दर्ज किया था। उस पर आरोप था कि उसने पाकिस्तानी लड़की मीना रैना के साथ इंटरनेट के जरिए दोस्ती कर उसको पठानकोट एयरबेस की जानकारियां मुहैया करवाई। इसके लिए सुनील को पाकिस्तान से पैसा भी भेजा जाता रहा था। इस मामले में जितनी तेजी से पुलिस ने कार्रवाई की, उतनी ही ढीली जांच की।
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इसका फायदा आरोपी को मिला और उसे जमानत मिल गई। एयरबेस पर हमले के बाद यह आशंका पैदा हो गई है कि यह हमला सुनील द्वारा भेजी गई जानकारी के आधार पर तो नहीं किया गया है।

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हमले से 24 घंटे पहले ही एयरबेस में घुस चुके थे आतंकी

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पठानकोट एयरबेस एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकवादी हमला शनिवार को हुआ लेकिन आतंकी वीरवार देर रात या शुक्रवार सुबह तक वहां पहुंच चुके थे। आतंकी या तो बाहर छिपे था या फिर दीवार फांदकर अंदर जाने में कामयाब हो गए थे और झाड़ियों में छिपकर शनिवार सुबह तक इंतजार करते रहे।

एसपी सलविंदर सिंह के घायल साथी राजेश सुनार ने यह खुलासा किया है। होश में आने के बाद उसने बताया कि आतंकवादी दो गुटों में एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे। वीरवार रात को एसपी सलविंदर सिंह के साथ राजेश को किडनैप किया गया था।

आतंकवादियों ने एसपी सलविंदर सिंह को छोड़ दिया था, लेकिन राजेश को अपने साथ ही रखा। रास्ते में वह किसी से फोन पर बात कर रहे थे कि बाकी साथी पहुंच गए हैं, वह भी पहुंचने वाले हैं।

ऐसी आशंका है कि छह की गिनती में आए आतंकवादियों ने खुद को 3-3 के गुटों में बांट लिया था ताकि अगर एक गुट का सामना पुलिस या सुरक्षा बलों से हो जाए तो दूसरा गुट अटैक करने में कामयाब हो जाए।

अगर राजेश की बात पर यकीन किया जाए तो इसका मतलब आतंकवादियों का एक गुट वीरवार रात को ही पहुंच गया था और दूसरा शुक्रवार सुबह एसपी की गाड़ी छोड़ने के बाद पैदल ही तीन किलोमीटर का रास्ता तय कर स्टेशन पर पहुंचा।

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