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Chandigarh News: सीएचबी सोसाइटियों में फ्रीहोल्ड का रास्ता साफ, हटेगा 1.2 फैक्टर
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मुख्य सचिव की बैठक में बनी सहमति, ए कैटेगरी के फ्लैट मालिकों को करीब 4.07 लाख रुपये तक की मिल सकती है राहत
बी-कैटेगरी में 2.18 लाख और सी में 1.70 लाख तक बचत संभव; जीएसटी और स्टांप ड्यूटी में भी राहत की उम्मीद
चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की सोसाइटियों में लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड में बदलने के लिए लागू 1.2 फैक्टर हटाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। वॉयस ऑफ हाउसिंग सोसायटीज-आरडब्ल्यूए 48 के प्रतिनिधियों के मुताबिक मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की ओर से बुलाई गई बैठक में 1.2 फैक्टर हटाने पर सहमति बनी है। हालांकि, इसका औपचारिक आदेश जारी होना अभी बाकी है। फैसला लागू होने पर विभिन्न श्रेणियों के फ्लैट मालिकों को कन्वर्जन चार्ज में लाखों रुपये की राहत मिल सकती है।
आरडब्ल्यूए 48 कंबाइन के प्रतिनिधि जेजे सिंह और आर.एस. थापर ने बताया कि संगठन वर्ष 2019 से सोसायटी निवासियों के लंबित मामलों को प्रशासन के समक्ष उठाता रहा है। 1.2 फैक्टर का मुद्दा पहली बार 22 अगस्त 2022 को प्रशासन के सामने रखा गया था। इसके बाद अधिकारियों के साथ करीब 100 बैठकें हुईं।
तीनों कैटेगरी में घटेगा कन्वर्जन चार्ज
आरडब्ल्यूए के अनुसार 1.2 फैक्टर हटने के बाद ए-कैटेगरी के फ्लैट का कन्वर्जन चार्ज 14.96 लाख से घटकर 10.89 लाख रुपये हो सकता है। यानी करीब 4.07 लाख रुपये की बचत होगी। इसी तरह बी-कैटेगरी में चार्ज 8.35 लाख से घटकर 6.17 लाख और सी-कैटेगरी में 5.45 लाख से घटकर 3.75 लाख रुपये रहने का दावा है। इस हिसाब से बी-कैटेगरी में करीब 2.18 लाख और सी-कैटेगरी में 1.70 लाख रुपये की राहत संभव है। प्रतिशत में यह बचत क्रमश: करीब 27, 24.4 और 30.8 फीसदी बताई गई है। अंतिम राहत आदेश और लागू दरों पर निर्भर करेगी।
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जीएसटी और स्टांप ड्यूटी में भी राहत की उम्मीद
संगठन के अनुसार यदि एस्टेट ऑफिस की 3 जून 2025 की सिफारिशों को मंजूरी मिलती है तो जीएसटी में भी अतिरिक्त राहत मिल सकती है। ए-कैटेगरी में करीब 1.66 लाख, बी में 94 हजार और सी में करीब 57 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत का अनुमान है। स्टांप ड्यूटी में कमी होने पर भी फ्लैट मालिकों को राहत मिल सकती है।
अनअर्न्ड इंक्रीज की गणना अभी बाकी
आरडब्ल्यूए के मुताबिक अनअर्न्ड इंक्रीज की गणना में ड्वलिंग यूनिट के कलेक्टर रेट से निकाली गई भूमि दर के बजाय भूमि का कलेक्टर रेट लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सीएचबी सचिव सौरभ कुमार अरोड़ा के साथ बैठक में गणना की प्रक्रिया से जुड़े कुछ बिंदु स्पष्ट नहीं हो सके। संगठन का कहना है कि भूमि दर में सुधार पर सहमति है, लेकिन अंतिम नोट तैयार होना बाकी है। अब संगठन 3 जून 2025 की सिफारिशों को जल्द लागू कराने पर जोर देगा। इनमें कन्वर्जन फाइलें सीएचबी से एस्टेट ऑफिस भेजना, शेष सोसाइटियों के कंप्लीशन सर्टिफिकेट संबंधी आदेश और नीड-बेस्ड बदलाव शामिल हैं।
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बी-कैटेगरी में 2.18 लाख और सी में 1.70 लाख तक बचत संभव
चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) की सोसाइटियों में लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड में बदलने के लिए लागू 1.2 फैक्टर हटाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। वॉयस ऑफ हाउसिंग सोसायटीज-आरडब्ल्यूए 48 के प्रतिनिधियों के मुताबिक मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की ओर से बुलाई गई बैठक में 1.2 फैक्टर हटाने पर सहमति बनी है। हालांकि, इसका औपचारिक आदेश जारी होना अभी बाकी है। फैसला लागू होने पर विभिन्न श्रेणियों के फ्लैट मालिकों को कन्वर्जन चार्ज में लाखों रुपये की राहत मिल सकती है।
आरडब्ल्यूए 48 कंबाइन के प्रतिनिधि जेजे सिंह और आर.एस. थापर ने बताया कि संगठन वर्ष 2019 से सोसायटी निवासियों के लंबित मामलों को प्रशासन के समक्ष उठाता रहा है। 1.2 फैक्टर का मुद्दा पहली बार 22 अगस्त 2022 को प्रशासन के सामने रखा गया था। इसके बाद अधिकारियों के साथ करीब 100 बैठकें हुईं।
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तीनों कैटेगरी में घटेगा कन्वर्जन चार्ज
आरडब्ल्यूए के अनुसार 1.2 फैक्टर हटने के बाद ए-कैटेगरी के फ्लैट का कन्वर्जन चार्ज 14.96 लाख से घटकर 10.89 लाख रुपये हो सकता है। यानी करीब 4.07 लाख रुपये की बचत होगी। इसी तरह बी-कैटेगरी में चार्ज 8.35 लाख से घटकर 6.17 लाख और सी-कैटेगरी में 5.45 लाख से घटकर 3.75 लाख रुपये रहने का दावा है। इस हिसाब से बी-कैटेगरी में करीब 2.18 लाख और सी-कैटेगरी में 1.70 लाख रुपये की राहत संभव है। प्रतिशत में यह बचत क्रमश: करीब 27, 24.4 और 30.8 फीसदी बताई गई है। अंतिम राहत आदेश और लागू दरों पर निर्भर करेगी।
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जीएसटी और स्टांप ड्यूटी में भी राहत की उम्मीद
संगठन के अनुसार यदि एस्टेट ऑफिस की 3 जून 2025 की सिफारिशों को मंजूरी मिलती है तो जीएसटी में भी अतिरिक्त राहत मिल सकती है। ए-कैटेगरी में करीब 1.66 लाख, बी में 94 हजार और सी में करीब 57 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत का अनुमान है। स्टांप ड्यूटी में कमी होने पर भी फ्लैट मालिकों को राहत मिल सकती है।
अनअर्न्ड इंक्रीज की गणना अभी बाकी
आरडब्ल्यूए के मुताबिक अनअर्न्ड इंक्रीज की गणना में ड्वलिंग यूनिट के कलेक्टर रेट से निकाली गई भूमि दर के बजाय भूमि का कलेक्टर रेट लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, सीएचबी सचिव सौरभ कुमार अरोड़ा के साथ बैठक में गणना की प्रक्रिया से जुड़े कुछ बिंदु स्पष्ट नहीं हो सके। संगठन का कहना है कि भूमि दर में सुधार पर सहमति है, लेकिन अंतिम नोट तैयार होना बाकी है। अब संगठन 3 जून 2025 की सिफारिशों को जल्द लागू कराने पर जोर देगा। इनमें कन्वर्जन फाइलें सीएचबी से एस्टेट ऑफिस भेजना, शेष सोसाइटियों के कंप्लीशन सर्टिफिकेट संबंधी आदेश और नीड-बेस्ड बदलाव शामिल हैं।