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Chandigarh: अब एक हफ्ते में हो जाएगा पासपोर्ट वैरिफिकेशन, mpassport एप लांच, चार सेवाएं हुईं ऑनलाइन
Sat, 17 Jun 2023 12:41 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 17 Jun 2023 12:41 PM IST
सार
डीजीपी प्रवीर रंजन ने कहा कि पहले पासपोर्ट संबंधी वैरिफिकेशन में 15 दिन तक का समय लगता था। अब पुलिस का प्रयास रहेगा कि यह कार्रवाई सप्ताह भर में पूरी हो जाए। ई साथी एप और पुलिस वेबसाइट पर जाकर इन सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। सर्टिफिकेट को मोबाइल एप से डाउनलोड भी किया जा सकेगा।
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एम पासपोर्ट एप लांच करते प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ में अब पासपोर्ट संबंधी वैरिफिकेशन में 15 दिन की जगह एक सप्ताह का समय लगेगा। लोगों को राहत देने के मकसद से शहर में पुलिस से जुड़ी कुछ सेवाओं को डिजिटलाइज किया गया है। इसमें अहम पासपोर्ट वैरिफिकेशन से जुड़ी सेवा है। प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने सेक्टर- 9 स्थित यूटी सचिवालय में इन सेवाओं का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर पुरोहित ने एम पासपोर्ट एप लांच किया। इस एप से लोग अपनी पासपोर्ट के लिए वैरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसमें सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं में पारदर्शिता लाने और सेवाओं को पेपरलेस करने के मकसद से यह शुरुआत की गई है। लोगों की पुलिस से जुड़ी कुल 15 सेवाएं अब पेपरलेस हो गई हैं। इससे पहले 11 सेवाएं पेपरलेस थीं। चार नई सेवाएं जो कागज रहित हुई हैं उनमें पासपोर्ट वैरिफिकेशन, पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, करेक्टर सर्टिफिकेट और किराएदार/निजी कर्मी वैरिफिकेशन शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: Ludhiana Loot: मास्टरमाइंड मनी के पिता की शराफत की दी जाती थी मिसाल, दिखावे के लिए करता था समाजसेवा
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डीजीपी प्रवीर रंजन ने कहा कि पहले पासपोर्ट संबंधी वैरिफिकेशन में 15 दिन तक का समय लगता था। अब पुलिस का प्रयास रहेगा कि यह कार्रवाई सप्ताह भर में पूरी हो जाए। ई साथी एप और पुलिस वेबसाइट पर जाकर इन सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। सर्टिफिकेट को मोबाइल एप से डाउनलोड भी किया जा सकेगा। इससे समय की भी बचत होगी। इन सेवाओं को ऑनलाइन करने के मौके पर प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को टेबलेट भी बांटे गए। इनके जरिए वह वैरिफिकेशन की कार्रवाई करेंगे। शहर के 16 थानों के 32 पुलिसकर्मियों को लैपटॉप बांटे गए। इस अवसर पर प्रशासन और पुलिस के सभी बड़े अफसर, आरडब्ल्यूए से जुड़े प्रतिनिधि एवं डिप्टी आरपीओ अश्विनी कुमार भी मौजूद थे।
डीजीपी ने कहा कि हर थाने में समावेश डेस्क है। थानों में एक विशेष कमरे का प्रावधान होगा जहां जाकर लोग इन ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या का निदान कर पाएंगे। इसके लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस मौके पर हाल ही में मनीमाजरा में हुए सड़क हादसे में मारी गई महिला कांस्टेबल शारदा के परिवार को 90 लाख रुपए की आर्थिक मदद भी दी गई। हादसे में उसका बेटा और बेटी भी घायल हो गए थे। शारदा का पति भी चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत है।
इस तरह नागपुर में पासपोर्ट ऑफिस बना था
प्रशासक पुरोहित ने कहा कि 90 के दशक में जब वह नागपुर से सांसद थे तब अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को हज यात्रा जाने के लिए पासपोर्ट संबंधी कार्रवाई के लिए नागपुर से मुंबई जाना पड़ता था, जहां पासपोर्ट कार्यालय का मुख्यालय था। तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे और पीवी नरसिम्हा राव विदेश मंत्री थे। उनसे उन्होंने नागपुर के लोगों की दिक्कत बताई और एक मांगपत्र दिया। बाद में नागपुर को पासपोर्ट कार्यालय मिला था।
भगवान के आगे हाथ रख गलत काम बंद कर दें
प्रशासक ने कहा कि पुलिस के सिपाही रैंक से लेकर डीजीपी तक के काम में पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है। वहीं गलत काम पर भी लगाम लगाने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जिस भी भगवान को मानते हो उसके आगे हाथ रखकर यह सब बंद कर दें, जिंदगी में वाकई बहुत आनंद आएगा। उन्होंने पुलिसकर्मियों को कहा कि कानून की उल्लंघना और अपराध करने पर अगर अपने को भी पकड़ना पड़े तो पीछे मत हटना। उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिंदगी एक खुली किताब की तरह होनी चाहिए। लोगों से आह्वान किया कि निडर हों और अपने आसपास होते अपराध की जानकारी पुलिस को दें। यदि कार्रवाई नहीं होती तो डीजीपी को बताएं और आगे उन्हें भी बता सकते हैं।
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इस अवसर पर पुरोहित ने एम पासपोर्ट एप लांच किया। इस एप से लोग अपनी पासपोर्ट के लिए वैरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसमें सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं में पारदर्शिता लाने और सेवाओं को पेपरलेस करने के मकसद से यह शुरुआत की गई है। लोगों की पुलिस से जुड़ी कुल 15 सेवाएं अब पेपरलेस हो गई हैं। इससे पहले 11 सेवाएं पेपरलेस थीं। चार नई सेवाएं जो कागज रहित हुई हैं उनमें पासपोर्ट वैरिफिकेशन, पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, करेक्टर सर्टिफिकेट और किराएदार/निजी कर्मी वैरिफिकेशन शामिल हैं।
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डीजीपी प्रवीर रंजन ने कहा कि पहले पासपोर्ट संबंधी वैरिफिकेशन में 15 दिन तक का समय लगता था। अब पुलिस का प्रयास रहेगा कि यह कार्रवाई सप्ताह भर में पूरी हो जाए। ई साथी एप और पुलिस वेबसाइट पर जाकर इन सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। सर्टिफिकेट को मोबाइल एप से डाउनलोड भी किया जा सकेगा। इससे समय की भी बचत होगी। इन सेवाओं को ऑनलाइन करने के मौके पर प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को टेबलेट भी बांटे गए। इनके जरिए वह वैरिफिकेशन की कार्रवाई करेंगे। शहर के 16 थानों के 32 पुलिसकर्मियों को लैपटॉप बांटे गए। इस अवसर पर प्रशासन और पुलिस के सभी बड़े अफसर, आरडब्ल्यूए से जुड़े प्रतिनिधि एवं डिप्टी आरपीओ अश्विनी कुमार भी मौजूद थे।
डीजीपी ने कहा कि हर थाने में समावेश डेस्क है। थानों में एक विशेष कमरे का प्रावधान होगा जहां जाकर लोग इन ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या का निदान कर पाएंगे। इसके लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस मौके पर हाल ही में मनीमाजरा में हुए सड़क हादसे में मारी गई महिला कांस्टेबल शारदा के परिवार को 90 लाख रुपए की आर्थिक मदद भी दी गई। हादसे में उसका बेटा और बेटी भी घायल हो गए थे। शारदा का पति भी चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत है।
इस तरह नागपुर में पासपोर्ट ऑफिस बना था
प्रशासक पुरोहित ने कहा कि 90 के दशक में जब वह नागपुर से सांसद थे तब अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को हज यात्रा जाने के लिए पासपोर्ट संबंधी कार्रवाई के लिए नागपुर से मुंबई जाना पड़ता था, जहां पासपोर्ट कार्यालय का मुख्यालय था। तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे और पीवी नरसिम्हा राव विदेश मंत्री थे। उनसे उन्होंने नागपुर के लोगों की दिक्कत बताई और एक मांगपत्र दिया। बाद में नागपुर को पासपोर्ट कार्यालय मिला था।
भगवान के आगे हाथ रख गलत काम बंद कर दें
प्रशासक ने कहा कि पुलिस के सिपाही रैंक से लेकर डीजीपी तक के काम में पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है। वहीं गलत काम पर भी लगाम लगाने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जिस भी भगवान को मानते हो उसके आगे हाथ रखकर यह सब बंद कर दें, जिंदगी में वाकई बहुत आनंद आएगा। उन्होंने पुलिसकर्मियों को कहा कि कानून की उल्लंघना और अपराध करने पर अगर अपने को भी पकड़ना पड़े तो पीछे मत हटना। उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिंदगी एक खुली किताब की तरह होनी चाहिए। लोगों से आह्वान किया कि निडर हों और अपने आसपास होते अपराध की जानकारी पुलिस को दें। यदि कार्रवाई नहीं होती तो डीजीपी को बताएं और आगे उन्हें भी बता सकते हैं।