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पशमीना शॉल...जो हो जाए अंगूठी के आर-पार, संभालकर रखने का तरीका भी है बेहद खास
Wed, 22 Jan 2020 04:04 PM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 22 Jan 2020 04:04 PM IST
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पश्मीना शॉल
- फोटो : फाइल फोटो
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पशमीना शॉल, जिसका नाम ही स्टेटस सिंबल को दर्शाता है और इस शॉल के चाहने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। पसंद और मांग बढ़ने का ही नतीजा है कि कल तक जो पशमीना शॉल महज सफेद और ग्रे रंग में बनती थी, अब कई रंगों में उपलब्ध है। महिलाओं से बात करो तो एक ही जवाब मिलता है, जो अंगूठी से आर पार हो जाए, वही पशमीना शॉल।
सेक्टर 15 स्थित लाला भवन में लगाए गए कुल्लू फेस्ट में पशमीना शॉल की बिक्री तेजी से हो रही है। फेस्ट के प्रभारी राजकुमार ने बताया कि पशमीना शॉल की अलग-अलग वैरायटी छह हजार से एक लाख रुपये की रेंज में उपलब्ध है। असली पशमीना बेहद मुलायम और वजन में हल्की होती है। ये बहुत तेजी से गर्मी उत्पन्न करती है। पशमीना की बड़ी सी शॉल को अंगूठी के अंदर से बाहर निकाला जा सकता है।
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सेक्टर 15 स्थित लाला भवन में लगाए गए कुल्लू फेस्ट में पशमीना शॉल की बिक्री तेजी से हो रही है। फेस्ट के प्रभारी राजकुमार ने बताया कि पशमीना शॉल की अलग-अलग वैरायटी छह हजार से एक लाख रुपये की रेंज में उपलब्ध है। असली पशमीना बेहद मुलायम और वजन में हल्की होती है। ये बहुत तेजी से गर्मी उत्पन्न करती है। पशमीना की बड़ी सी शॉल को अंगूठी के अंदर से बाहर निकाला जा सकता है।
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एक शॉल एक महीने में होती है तैयार
पशमीना चांगरा बकरियों की ऊन से ही बनती है। जिसे के मिकल वॉश के बाद ही बनाया जाता है। एक पशमीना शॉल को बनाने में एक महीने का समय लगता है। जबकि एक सामान्य शॉल एक दिन में तैयार कर ली जाती है। राजकुमार ने बताया कि पशमीना का एक धागा सिर्फ14 से 19 माइक्रोन्स का होता है, यानि मनुष्य के बाल से भी छह गुना पतला। इसे बनाने वाले कारीगर इस काम में पारंगत होते हैं क्योंकि जानकारी न होने पर इसके धागे टूटते हैं और बुनाई नहीं हो पाती। ऐसा माना जाता है कि पशमीना का धागा जितना पतला होता है वह उतना ही ज्यादा गर्मी देता है।
ऐसे रखें, 50 साल तक रहेगा बरकरार
पशमीना शॉल को संभालकर रखने का भी एक तरीका है। राजकुमार ने बताया कि पशमीना शॉल को घर पर भी धोया जा सकता है, बस उसका सही तरीका पता होना चाहिए। इसके लिए शॉल को ईजी में धोकर ड्रायर में सुखाने के तत्काल बाद ही उसे प्रेस करना जरूरी होता है। ऐसा करने से उसकी वास्तविकता बरकरार रहती है। इसके बाद इसे पेपर में तह कर रख दें। फिनायल की गोली डायरेक्ट न डालें, बरसात में एक बार धूप में जरूर डालें। जिन्हें इसकी जानकारी नहीं होती वे उसे धोने के बाद निचोड़कर लटकाकर सुखाते हैं। ऐसा करने से उसका धागा रूखा होकर सिकुड़ जाता है।
ऐसे रखें, 50 साल तक रहेगा बरकरार
पशमीना शॉल को संभालकर रखने का भी एक तरीका है। राजकुमार ने बताया कि पशमीना शॉल को घर पर भी धोया जा सकता है, बस उसका सही तरीका पता होना चाहिए। इसके लिए शॉल को ईजी में धोकर ड्रायर में सुखाने के तत्काल बाद ही उसे प्रेस करना जरूरी होता है। ऐसा करने से उसकी वास्तविकता बरकरार रहती है। इसके बाद इसे पेपर में तह कर रख दें। फिनायल की गोली डायरेक्ट न डालें, बरसात में एक बार धूप में जरूर डालें। जिन्हें इसकी जानकारी नहीं होती वे उसे धोने के बाद निचोड़कर लटकाकर सुखाते हैं। ऐसा करने से उसका धागा रूखा होकर सिकुड़ जाता है।