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डड्डूमाजरा पहुंची संसदीय समिति, पूछा- कोरोना की तीसरी लहर की क्या तैयारी है
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चंडीगढ़। सुबह 10 बजकर 5 मिनट पर राज्यसभा की संसदीय समिति (स्वास्थ्य) डड्डूमाजरा के स्वास्थ्य केंद्र का दौरा करने पहुंच गई। केंद्र की सुविधाओं को देखने के बाद कमेटी के सदस्य सांसद महेश शर्मा ने पूछा कि कोरोना की दूसरी लहर को सबने देखा, अब तीसरी लहर की क्या तैयारी है। इस पर डॉक्टर इधर-उधर देखने लगे, उसके बाद समिति के चेयरमैन रामगोपाल की तरफ इशारा करते हुए बोले कि ये सबसे ऊपर हैं। यही प्रधानमंत्री को रिपोर्ट देंगे। इसके बाद डॉक्टरों ने अपने अनुभव बताए।
केंद्र पर पहुंचते ही स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने 21 सदस्यीय राज्यसभा संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रहे सांसद रामगोपाल का स्वागत किया। इसके बाद सभी सदस्यों ने जन स्वास्थ्य केंद्र के अंदर जाकर टीकाकरण की व्यवस्था, कोरोना जांच, गर्भवती महिलाओं के इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। जन स्वास्थ्य केंद्र के अंदर काफी भीड़ देखते ही यशपाल गर्ग ने कहा कि हर महीने की 9 तारीख को इलाके की गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है, इसलिए भीड़ ज्यादा है। इसके बाद अधिकारी सदस्यों को केंद्र में जो दिखा रहे थे, वह देखते गए। इस दौरान सदस्यों ने मरीजों से भी बात की। हालांकि, सदस्य स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आए। उसके बाद सदस्य केंद्र के बाहर आकर बैठ गए और अधिकारियों के साथ सवाल-जवाब करने लगे। लगभग 40 मिनट तक रुकने के बाद समिति के सदस्य पीजीआई चले गए।
सभी पीजीआई जाना चाहते हैं, फिर कैसे करते हैं प्रबंधन?
निरीक्षण के बाद सदस्यों ने पूछा कि चंडीगढ़ में कितने अस्पताल व डिस्पेंसरी हैं। इन अस्पतालों में कितने स्वास्थ्यकर्मी हैं। समिति केचेयरमैन ने पूछा कि सभी मरीज पीजीआई जाना चाहते हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कैसे प्रबंध करता है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि विभिन्न सेक्टरों में डिस्पेंसरी है। प्रशासन केदो अस्पताल हैं। यहां पर मरीजों को अच्छा इलाज दिया जाता है, इसलिए वह इन अस्पतालों में आना पसंद करते हैं। हालांकि, गंभीर मरीज को ही पीजीआई भेजा जाता है। उसकेलिए भी रैफरेल प्रोटोकॉल का पालन होता है। इसके अलावा टेली कंसल्टेंसी के बारे में भी सदस्यों ने पूछा। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि इससे मरीजों को घर बैठे ही इलाज दिया गया।
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सभी डिस्पेंसरी को जिला अस्पतालों से जोड़ा
सदस्य महेश शर्मा ने डॉक्टरों व अधिकारियों से पूछा कि तीसरी लहर की क्या तैयारी है। स्वास्थ्य निदेशक ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चों के खतरे को देखते हुए सभी डिस्पेंसरी को जिला अस्पतालों के साथ जोड़ दिया गया है। सभी जिला अस्पतालों को पीजीआई के बाल चिकित्सा विभाग के आईसीयू केसाथ जोड़ा गया है। अगर कोई कोविड संक्रमित बच्चा आएगा तो जिला अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष से टेली कंसल्टेंसी की जाएगी। इस व्यवस्था को जल्द लागू कर दिया जाएगा। समिति के सदस्य डॉ. एल हनुमंतैया ने पूछा कि शहर में बाल चिकित्सा के कितने डॉक्टर हैं। अधिकारियों ने बताया कि जीएमएसएच-16 में छह डॉक्टर तैनात हैं।
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केंद्र पर पहुंचते ही स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने 21 सदस्यीय राज्यसभा संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रहे सांसद रामगोपाल का स्वागत किया। इसके बाद सभी सदस्यों ने जन स्वास्थ्य केंद्र के अंदर जाकर टीकाकरण की व्यवस्था, कोरोना जांच, गर्भवती महिलाओं के इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। जन स्वास्थ्य केंद्र के अंदर काफी भीड़ देखते ही यशपाल गर्ग ने कहा कि हर महीने की 9 तारीख को इलाके की गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है, इसलिए भीड़ ज्यादा है। इसके बाद अधिकारी सदस्यों को केंद्र में जो दिखा रहे थे, वह देखते गए। इस दौरान सदस्यों ने मरीजों से भी बात की। हालांकि, सदस्य स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आए। उसके बाद सदस्य केंद्र के बाहर आकर बैठ गए और अधिकारियों के साथ सवाल-जवाब करने लगे। लगभग 40 मिनट तक रुकने के बाद समिति के सदस्य पीजीआई चले गए।
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सभी पीजीआई जाना चाहते हैं, फिर कैसे करते हैं प्रबंधन?
निरीक्षण के बाद सदस्यों ने पूछा कि चंडीगढ़ में कितने अस्पताल व डिस्पेंसरी हैं। इन अस्पतालों में कितने स्वास्थ्यकर्मी हैं। समिति केचेयरमैन ने पूछा कि सभी मरीज पीजीआई जाना चाहते हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग कैसे प्रबंध करता है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि विभिन्न सेक्टरों में डिस्पेंसरी है। प्रशासन केदो अस्पताल हैं। यहां पर मरीजों को अच्छा इलाज दिया जाता है, इसलिए वह इन अस्पतालों में आना पसंद करते हैं। हालांकि, गंभीर मरीज को ही पीजीआई भेजा जाता है। उसकेलिए भी रैफरेल प्रोटोकॉल का पालन होता है। इसके अलावा टेली कंसल्टेंसी के बारे में भी सदस्यों ने पूछा। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि इससे मरीजों को घर बैठे ही इलाज दिया गया।
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सभी डिस्पेंसरी को जिला अस्पतालों से जोड़ा
सदस्य महेश शर्मा ने डॉक्टरों व अधिकारियों से पूछा कि तीसरी लहर की क्या तैयारी है। स्वास्थ्य निदेशक ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चों के खतरे को देखते हुए सभी डिस्पेंसरी को जिला अस्पतालों के साथ जोड़ दिया गया है। सभी जिला अस्पतालों को पीजीआई के बाल चिकित्सा विभाग के आईसीयू केसाथ जोड़ा गया है। अगर कोई कोविड संक्रमित बच्चा आएगा तो जिला अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष से टेली कंसल्टेंसी की जाएगी। इस व्यवस्था को जल्द लागू कर दिया जाएगा। समिति के सदस्य डॉ. एल हनुमंतैया ने पूछा कि शहर में बाल चिकित्सा के कितने डॉक्टर हैं। अधिकारियों ने बताया कि जीएमएसएच-16 में छह डॉक्टर तैनात हैं।