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Punjab Election Results 2022: पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल चुनाव हारे, आप के इस नेता ने ढहाया शिअद का सबसे मजबूत किला
Thu, 10 Mar 2022 02:37 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, मुक्तसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, मुक्तसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 10 Mar 2022 02:37 PM IST
सार
लंबी विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक व पंजाब के पांच बार के मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल को हार का सामना करना पड़ा। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी गुरमीत सिंह ने उन्हें हराया है। प्रकाश सिंह बादल ने 94 साल की उम्र में विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह देश के सबसे उम्रदराज प्रत्याशी हैं।
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल को हराकर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी गुरमीत सिंह खुड्डियां का कद बढ़ गया है। खुड्डियां ने प्रकाश सिहं बादल को 11,396 मतों से मात दी है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का 94 वर्ष की उम्र में हारना लंबी हलके का बादल परिवार के प्रति मोह भंग होना दर्शा रहा है।
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बता दें कि गुरमीत खुड्डियां को 66,313 और प्रकाश सिंह बादल को 54,917 मत मिले। जबकि पिछले 2017 विधानसभा चुनाव में प्रकाश सिंह बादल ने अपने प्रतिद्वंदी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह को 22,770 मतों से हराया था। खुड्डियां की जीत से जहां आप समर्थक खुशी है तो वहीं बादल परिवार की हार से शिअद समर्थकों में मायूसी छाई है।
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दिग्गज नेता प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर बादल के चुनाव में हार के बाद उनके पैतृक गांव बादल स्थित निवास पर सन्नाटा पसरा गया।गौरतलब है कि लंबी विधानसभा सीट से आप प्रत्याशी गुरमीत सिंह खुडिड्यां के पिता जगदेव सिंह खुड्डियां 1989 में शिअद की टिकट से जीत कर सांसद बने थे।
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गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की वजह से लंबी हॉट सीट थी। अस्वस्थ होने की वजह से प्रकाश सिंह बादल इस बार खुलकर चुनाव मैदान में नहीं उतर सके। बादल परिवार ने लंबी हलके के मतदाताओं से उन्हें घर बैठे-बिठाए जिताने का आह्वान किया था। मगर बादल परिवार को हार का सामना करना पड़ा।
हार के कारण
लंबी से प्रकाश सिंह बादल के हार के कई कारण हैं। पहला कारण प्रदेश में आम आदमी पार्टी की लहर और दूसरा किसान आंदोलन का शिअद पर भारी पड़ना। डेरा फैक्टर भी इस बार काम नहीं आया। 94 साल की उम्र में प्रकाश सिंह बादल को हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 1967 में भी गिद्दड़बाहा सीट से वह चुनाव हार चुके हैं।