पंजाब के निजी स्कूल बोले- 88 फीसदी ही लेंगे ट्यूशन फीस, अभिभावक पहुंचे हाईकोर्ट
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फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशन पंजाब ने शनिवार को घोषणा की है कि उनके अंतर्गत आने वाले ऐसे स्कूल जो अकेले ट्यूशन फीस लेते हैं और सालाना फंड नहीं लेते हैं, वे 100 फीसदी के बजाय 88 फीसदी ट्यूशन फीस लेंगे। लेकिन जो स्कूल पूरी ट्यूशन फीस लेते हैं, वह सालाना फंड 100 प्रतिशत के बजाय 70 प्रतिशत ही लेंगे।
इसके अलावा सभी स्कूल परिवहन शुल्क का 50 प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं लेंगे, ताकि ड्राइवर, कंडक्टर और हेल्पर के वेतन का भुगतान किया जा सके। वहीं, फीस वसूली के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अभिभावकों ने अब डबल बेंच में अपील दायर कर दी है।
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेडरेशन के प्रधान जगजीत सिंह धूरी ने कहा कि फेडरेशन के सभी सदस्य स्कूल और फेडरेशन से संबंधित एसोसिएशन इस बात के लिए वचनबद्ध हैं कि वे केवल अपने खर्चों की पूर्ति के लिए ही फीस लेंगे। यह समय बच्चों के अभिभावकों के साथ खड़े होने का है। यह फेडरेशन पंजाब के सभी सीबीएसई, आईसीएसई, पीएसईबी स्कूलों और 17 एसोसिएशनों का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के पहले फैसले में से चार बातों को स्वीकार करते हुए स्कूलों को पूरी ट्यूशन फीस और दाखिला फीस लेने की अनुमति दी है। सालाना फंड और ट्रांसपोर्टेशन का लॉकडाउन के दौरान जितना खर्च हुआ है, वह लेने के लिए कहा है। लेकिन फेडरेशन ने अभिभावकों को राहत देने का फैसला किया है, जिसके तहत सालाना फंड, ट्यूशन फीस और परिवहन शुल्क कम से कम लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह भी सच है कि काफी अभिभावकों की आमदनी हाल के महीनों में प्रभावित हुई है लेकिन बहुत से अभिभावकों के कारोबार ऐसे हैं जो इस लॉकडाउन के दौरान प्रभावित नहीं हुए हैं। ऐसे हालात में सरकार और अन्य सियासी पार्टियों ने स्कूलों के मुद्दे पर सियासी रोटियां सेंकनी शुरू कर दी हैं और अभिभावकों को गुमराह किया है।
इस कारण आज पांच लाख परिवार जोकि प्राइवेट संस्थाओं में नौकरी कर रहे हैं, के लिए भूखों मरने की नौबत आ गई है। वहीं, सरकार ऐसे हालात में अभिभावकों को फीसों के लिए या स्कूलों को वेतन अदायगी के लिए कोई मदद नहीं कर रही। इसी कारण से स्कूलों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अभिभावकों और स्कूल मुलाजिमों के हित में फैसला दिया है।