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परमजीत की किडनी-लिवर से मिली तीन को नई जिंदगी, हादसे में हुई थी मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 13 Jan 2018 09:49 AM IST
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परमजीत सिंह।
- फोटो : File Photo
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मोटर मैकेनिक परमजीत सिंह ने इस दुनिया से विदा लेने से पहले तीन लोगों को नई जिंदगी और दो को रोशनी दे गए हैं। ऊना के रहने वाले परमजीत सिंह एक एक्सीडेंट में गंभीर घायल हो गए थे। पीजीआई के डाक्टरों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए।
डाक्टरों ने उनकी दो किडनी और एक लिवर जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दी, जबकि दोनों कोर्निया को संभालकर आई बैंक में रख लिया गया है। मैचिंग मरीज मिलने की स्थिति पर कोर्निया को ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। जिन मरीजों में किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट हुए हैं, वे अंगों के खराब होने से बहुत कठिन परिस्थितियों में जी रहे थे।
पीजीआई की ओर से बताया गया कि 9 जनवरी को परमजीत सिंह (25) अपनी बाइक से किसी काम से ऊना जा रहे थे। रास्ते में ट्रैक्टर ट्राली से उनका एक्सीडेंट हो गया। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें ऊना के स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया, बाद में उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। 11 जनवरी को पीजीआई ने जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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गरीब मरीजों की मदद करता था परमजीत सिंह
परमजीत के पिता सतीश कुमार ने बताया कि उनका बेटा बेहद दयालु था। वह दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहता था। जरूरतमंदों को कपड़े, खाना और गरीब मरीजों को दान देकर उनकी मदद करता था। परमजीत के जाने से वे दुखी तो हैं, लेकिन बेटे के अंग डोनेट कर उन्हें इस बात का संतोष है कि मरते वक्त उनका बेटा दूसरों के काम आया।
बुरे वक्त में बड़ा फैसला लेना आसान नहीं
पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने कहा कि परमजीत के परिवार ने मानवता को एक मजबूत संदेश दिया है। बुरे वक्त में इस तरह के फैसले लेना आसान बात नहीं है। पीजीआई की टीम भी तारीफ के काबिल है। जबरदस्त को-आर्डिनेशन की वजह से ही पांच लोगों को नया जीवन मिला है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. एके गुप्ता और रोटो के नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल ने कहा कि आर्गन डोनेशन के लिए जागरूकता और बढ़ाने की जरूरत है। इसमें समाज के सभी वर्ग को बढ़चढ़ कर सहयोग करना होगा।
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डाक्टरों ने उनकी दो किडनी और एक लिवर जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दी, जबकि दोनों कोर्निया को संभालकर आई बैंक में रख लिया गया है। मैचिंग मरीज मिलने की स्थिति पर कोर्निया को ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। जिन मरीजों में किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट हुए हैं, वे अंगों के खराब होने से बहुत कठिन परिस्थितियों में जी रहे थे।
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पीजीआई की ओर से बताया गया कि 9 जनवरी को परमजीत सिंह (25) अपनी बाइक से किसी काम से ऊना जा रहे थे। रास्ते में ट्रैक्टर ट्राली से उनका एक्सीडेंट हो गया। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले उन्हें ऊना के स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया, बाद में उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। 11 जनवरी को पीजीआई ने जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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गरीब मरीजों की मदद करता था परमजीत सिंह
परमजीत के पिता सतीश कुमार ने बताया कि उनका बेटा बेहद दयालु था। वह दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहता था। जरूरतमंदों को कपड़े, खाना और गरीब मरीजों को दान देकर उनकी मदद करता था। परमजीत के जाने से वे दुखी तो हैं, लेकिन बेटे के अंग डोनेट कर उन्हें इस बात का संतोष है कि मरते वक्त उनका बेटा दूसरों के काम आया।
बुरे वक्त में बड़ा फैसला लेना आसान नहीं
पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने कहा कि परमजीत के परिवार ने मानवता को एक मजबूत संदेश दिया है। बुरे वक्त में इस तरह के फैसले लेना आसान बात नहीं है। पीजीआई की टीम भी तारीफ के काबिल है। जबरदस्त को-आर्डिनेशन की वजह से ही पांच लोगों को नया जीवन मिला है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. एके गुप्ता और रोटो के नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल ने कहा कि आर्गन डोनेशन के लिए जागरूकता और बढ़ाने की जरूरत है। इसमें समाज के सभी वर्ग को बढ़चढ़ कर सहयोग करना होगा।