{"_id":"56f6a78e4f1c1b491bf14ef0","slug":"para-olympic-national-games-two-army-officers-indian-army-panchkula-games-panchkula","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जज्बा: सेना के दो जवान कृत्रिम अंग के सहारे नेशनल गेम्स में दौड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जज्बा: सेना के दो जवान कृत्रिम अंग के सहारे नेशनल गेम्स में दौड़े
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला।
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:12 AM IST
विज्ञापन
भारतीय सेना के सिपहसलार रहे दो नौ जवानों आर सोमेश्वर राव और अनुज कुमार
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘पैरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है, मैं कतरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूं, मुझे बचाना समंदर की जिम्मेदारी है।’ ऐसा ही जज्बा है भारतीय सेना के सिपहसलार रहे दो नौ जवानों आर सोमेश्वर राव और अनुज कुमार में है। जवानी में देश की सेवा करते हुए पैर खो बैठे तो क्या हुआ, जिंदगी में जंग लड़ने का हौसला नहीं टूटा।
इसी हौसले के साथ उतर पड़े हैं ट्रैक पर। ऐसा ट्रैक जो प्रत्येक दिन एक नई सुबह लेकर आता है। सेक्टर-3 के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में एथलेटिक ट्रैक पर जब यह दोनों जवान दौड़े तो मुख्यमंत्री भी उठकर उनका हौसला बढ़ाते नजर आए। इन दोनों जवानों ने श्रीनगर में सेना के अलग-अलग मिशन के दौरान अपनी टांगे खो दी थीं। दोनों जवान मिले पुणे के एक आर्टिफिशियल लिंब सेंटर में। बस वहीं से दूसरी जिंदगी की उड़ान शुरू हो गई। दोनों एक दूसरे की ऐसी ताकत, जिसका नजारा अब सामने है।
विज्ञापन
इसी हौसले के साथ उतर पड़े हैं ट्रैक पर। ऐसा ट्रैक जो प्रत्येक दिन एक नई सुबह लेकर आता है। सेक्टर-3 के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में एथलेटिक ट्रैक पर जब यह दोनों जवान दौड़े तो मुख्यमंत्री भी उठकर उनका हौसला बढ़ाते नजर आए। इन दोनों जवानों ने श्रीनगर में सेना के अलग-अलग मिशन के दौरान अपनी टांगे खो दी थीं। दोनों जवान मिले पुणे के एक आर्टिफिशियल लिंब सेंटर में। बस वहीं से दूसरी जिंदगी की उड़ान शुरू हो गई। दोनों एक दूसरे की ऐसी ताकत, जिसका नजारा अब सामने है।
विज्ञापन
सर्च अभियान में खोया अपना बायां पांव: आर सोमेश्वर
मुख्यमंत्री भी उठकर उनका हौसला बढ़ाते नजर आए।
- फोटो : amarujala
सेना के सिपाही आर सोमेश्वर राव दो दिसंबर 2013 श्रीनगर में सर्च अभियान के लिए गए थे। उस समय बम ब्लास्ट में वह जख्मी हो गए और उन्हें अपना बायां पांव खोना पड़ा। माता पिता ने कहा कि घर लौट आओ। निराश होकर आंध्र प्रदेश के आर सोमेश्वर राव पुणे के आर्टिफिशियल लिंब सेंटर में लिंब लगवाने गए। वह कहते है कि उन्होंने सोचा था कि घर लौट जाऊंगा। इसी दौरान आर रामेश्वर ने एक युवक को आर्टिफिशियल लिंब के सहारे दौड़ते देखा। तभी तय किया कि अभी देश के लिए जिंदगी की एक और पारी खेलनी है।
उन्होंने स्पोर्ट्स ज्वाइन करने का फैसला किया। पहले तीन माह तक आर्टिफिशियल लिंब के सहारे चलने और दौड़ने में पांव से ब्लड और स्वेलिंग आ जाती थी, लेकिन धीरे धीरे इस दर्द ने उनकी मंजिल को और करीब कर दिया। वह महज दो साल के खेल कैरियर में बिना कोच के आज नेशनल स्तर के खिलाड़ी बन गए हैं।
सोमेश्वर राव से मिली अनुज को खेल की प्रेरणा
हिमाचल प्रदेश के अनुज कुमार को सेना में 2013 में सर्च अभियान के दौरान बस ब्लास्ट में अपना एक पांव गंवाना पड़ा। उसके बाद घर वालों ने भी हौसला नहीं बढ़ाया। अनुज अपनी आगे की जिंदगी को लेकर परेशान रहने लगे। तभी पुणे में आर सोमेश्वर राव से मुलाकात हुई। उन्होंने ही अनुज को प्रेरणा दी और गुरू भी बने। आज गुरू शिष्य दोनों एक दूसरे के लिए खेल के मैदान में प्रतिद्वंदी हैं और एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ भी लगी रहती हैं।
उन्होंने स्पोर्ट्स ज्वाइन करने का फैसला किया। पहले तीन माह तक आर्टिफिशियल लिंब के सहारे चलने और दौड़ने में पांव से ब्लड और स्वेलिंग आ जाती थी, लेकिन धीरे धीरे इस दर्द ने उनकी मंजिल को और करीब कर दिया। वह महज दो साल के खेल कैरियर में बिना कोच के आज नेशनल स्तर के खिलाड़ी बन गए हैं।
सोमेश्वर राव से मिली अनुज को खेल की प्रेरणा
हिमाचल प्रदेश के अनुज कुमार को सेना में 2013 में सर्च अभियान के दौरान बस ब्लास्ट में अपना एक पांव गंवाना पड़ा। उसके बाद घर वालों ने भी हौसला नहीं बढ़ाया। अनुज अपनी आगे की जिंदगी को लेकर परेशान रहने लगे। तभी पुणे में आर सोमेश्वर राव से मुलाकात हुई। उन्होंने ही अनुज को प्रेरणा दी और गुरू भी बने। आज गुरू शिष्य दोनों एक दूसरे के लिए खेल के मैदान में प्रतिद्वंदी हैं और एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ भी लगी रहती हैं।