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दिव्यांग खिलाड़ियों ने लगाए धांधली के आरोप, बोले- जीतने के बावजूद छीन लिए मेडल
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 29 Mar 2018 01:13 PM IST
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दिव्यांग खिलाड़ी मदन
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दिव्यांग खिलाड़ियों ने 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में धांधली का आरोप लगाया। कहा- जीतने के बावजूद मेडल छीन लिए गए। पंचकूला स्थित ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप से विवादों का नाता खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
बदइंतजामों के बीच खिलाड़ियों को ठहराने और प्रधानमंत्री को ट्वीट कर समस्याओं से अवगत कराने के बाद दिव्यांग खिलाड़ी सुवर्णा राज को चैंपियनशिप से बाहर करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब राजस्थान के दिव्यांग खिलाड़ी ने आयोजकों पर हरियाणा के खिलाड़ियों को फायदा पहुंचाने के साथ जीतने के बावजूद उनका मेडल छीनने का आरोप लगाकर पूरे आयोजन पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
खिलाड़ी ने आयोजकों और हरियाणा सरकार से पूछा कि जब हरियाणा के खिलाड़ियों को ही जिताना था तो दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को क्यों बुलाया गया। राजस्थान के दिव्यांग खिलाड़ी मदन का आरोप है कि खेलों में सिल्वर और कांस्य पदक जीतने के बाद आयोजकों ने उनकी कैटेगरी बदलकर उनसे मेडल छीन लिए और यह सब हरियाणा के खिलाड़ियों को जीताने के लिए किया गया। बुधवार को रोते हुए मदद ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इंसाफ की गुहार लगाई और कहा कि जब तक उनका पदक उन्हें लौटाया नहीं जाता तब तक वह घर वापस नहीं जाएंगे।
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अपने साथ हुई धक्केशाही को बताते हुए मदन की आंखों के आंसू थम नहीं रहे थे। वह बार-बार यही कह रहे थे कि उन्हें दिव्यांग होने पर उतना दुख नहीं हुआ था, जितना दिव्यांग होने के बावजूद मेडल जीतने के बाद कैटेगरी के नाम पर मेडल छीनने पर हुआ है। मदन ने सीएम से गुहार लगाई है कि अब वही इंसाफ कर उन्हें वापस मेडल दिला सकते हैं। मदन का यह आरोप भी है कि केवल उनके साथ ही ऐसा नहीं हुआ है दूसरे राज्यों से आए दर्जनों खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया गया है ताकि हरियाणा के खिलाड़ियों को फायदा पहुंचाया जा सके।
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बदइंतजामों के बीच खिलाड़ियों को ठहराने और प्रधानमंत्री को ट्वीट कर समस्याओं से अवगत कराने के बाद दिव्यांग खिलाड़ी सुवर्णा राज को चैंपियनशिप से बाहर करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब राजस्थान के दिव्यांग खिलाड़ी ने आयोजकों पर हरियाणा के खिलाड़ियों को फायदा पहुंचाने के साथ जीतने के बावजूद उनका मेडल छीनने का आरोप लगाकर पूरे आयोजन पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
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खिलाड़ी ने आयोजकों और हरियाणा सरकार से पूछा कि जब हरियाणा के खिलाड़ियों को ही जिताना था तो दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को क्यों बुलाया गया। राजस्थान के दिव्यांग खिलाड़ी मदन का आरोप है कि खेलों में सिल्वर और कांस्य पदक जीतने के बाद आयोजकों ने उनकी कैटेगरी बदलकर उनसे मेडल छीन लिए और यह सब हरियाणा के खिलाड़ियों को जीताने के लिए किया गया। बुधवार को रोते हुए मदद ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से इंसाफ की गुहार लगाई और कहा कि जब तक उनका पदक उन्हें लौटाया नहीं जाता तब तक वह घर वापस नहीं जाएंगे।
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अपने साथ हुई धक्केशाही को बताते हुए मदन की आंखों के आंसू थम नहीं रहे थे। वह बार-बार यही कह रहे थे कि उन्हें दिव्यांग होने पर उतना दुख नहीं हुआ था, जितना दिव्यांग होने के बावजूद मेडल जीतने के बाद कैटेगरी के नाम पर मेडल छीनने पर हुआ है। मदन ने सीएम से गुहार लगाई है कि अब वही इंसाफ कर उन्हें वापस मेडल दिला सकते हैं। मदन का यह आरोप भी है कि केवल उनके साथ ही ऐसा नहीं हुआ है दूसरे राज्यों से आए दर्जनों खिलाड़ियों के साथ भेदभाव किया गया है ताकि हरियाणा के खिलाड़ियों को फायदा पहुंचाया जा सके।
सिल्वर और ब्रांज मिलते ही कैटेगरी बदल दी: मदन
दिव्यांग खिलाड़ी मदन
मदन ने बताया कि 26 मार्च को उन्होंने एफ-37 कैटेगरी के एथलेटिक्स इवेंट जेवलिन थ्रो में कांस्य पदक जीता था। उस समय कैटेगरी के संबंध में आयोजकों ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद 28 मार्च को एथलेटिक्स के दूसरे इवेंट शॉटपुट में उन्होंने जब सिल्वर पदक जीता तो हरियाणा के खिलाड़ियों फायदा पहुंचाने के लिए उनकी कैटेगरी बदल दी गई। मदन ने आरोप लगाया कि यह कैसा न्याय है, अगर कैटेगरी चेंज करना ही था तो खेलने से पहले करना चाहिए था। मदन ने बताया कि वह जयपुर में आयोजित नेशनल गेम में भी इसी कैटेगरी में खेलकर कांस्य पदक जीत चुके हैं। फिर हरियाणा में आकर जीतने के बाद उनकी कैटेगरी कैसे बदल गई।
एक साल की अथक मेहनत के बाद मिला था सिल्वर मेडल
राजस्थान के मदन ने बताया कि इस मेडल के लिए रोजाना सुबह और शाम तीन घंटे एक साल लगातार उसने खेल के मैदान में पसीना बहाया है। ताकि जयपुर के नेशनल में जो स्थान वह हासिल नहीं कर पाया था, उसे पूरा कर सके। लेकिन उसकी उम्मींद खेल आयोजकों ने तोड़ दी। मदन ने बताया कि खेतों में सिचाई करते समय 11 हजार वोर्ल्ट के करंट के चपेट में आने के बाद उसने अपना एक हाथ गवां दिया था।
हौसलों पर टिकी थी जिंदगी, पंचकूला में टूट गई
मदन ने बताया कि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। एक हाथ कट जाने के बाद मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता है। खेल ने उसे हौसला दिया, जिस पंचकूला की धरती से उसने 2016 में नेशनल से इंटरनेशनल तक जाने का फैसला लिया था, जीत मिली तो 2018 में पंचकूला की इसी धरती पर खेल आयोजकों ने उसके हौसले तोड़ दिए। मदन कहना है कि अब बच्चों से क्या कहूंगा कि जिस राज्य में खेल और दिव्यांगों को बढ़ावा दिया जाता है, उसका दूसरा चेहरा ऐसा भी हो सकता है।
एक साल की अथक मेहनत के बाद मिला था सिल्वर मेडल
राजस्थान के मदन ने बताया कि इस मेडल के लिए रोजाना सुबह और शाम तीन घंटे एक साल लगातार उसने खेल के मैदान में पसीना बहाया है। ताकि जयपुर के नेशनल में जो स्थान वह हासिल नहीं कर पाया था, उसे पूरा कर सके। लेकिन उसकी उम्मींद खेल आयोजकों ने तोड़ दी। मदन ने बताया कि खेतों में सिचाई करते समय 11 हजार वोर्ल्ट के करंट के चपेट में आने के बाद उसने अपना एक हाथ गवां दिया था।
हौसलों पर टिकी थी जिंदगी, पंचकूला में टूट गई
मदन ने बताया कि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। एक हाथ कट जाने के बाद मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता है। खेल ने उसे हौसला दिया, जिस पंचकूला की धरती से उसने 2016 में नेशनल से इंटरनेशनल तक जाने का फैसला लिया था, जीत मिली तो 2018 में पंचकूला की इसी धरती पर खेल आयोजकों ने उसके हौसले तोड़ दिए। मदन कहना है कि अब बच्चों से क्या कहूंगा कि जिस राज्य में खेल और दिव्यांगों को बढ़ावा दिया जाता है, उसका दूसरा चेहरा ऐसा भी हो सकता है।