फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panjab University did not used Chandigarh Region Renovation Knowledge Cluster Properly

चंडीगढ़: पीयू नहीं कर पाई क्रिक कॉरिडोर का सही इस्तेमाल, घर बैठे 29 शिक्षण संस्थान के छात्रों को मिल जाता ज्ञान 

Wed, 30 Jun 2021 03:12 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 30 Jun 2021 03:12 PM IST
सार

2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्रिक की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य था कि एक संस्थान के पास भरपूर बुनियादी ढांचा नहीं हो सकता है। ऐसे में शिक्षक, विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे संस्थानों की प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।  

विज्ञापन
Panjab University did not used Chandigarh Region Renovation Knowledge Cluster Properly
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से सात साल पहले शुरू किए गए ज्ञान के मंच क्रिक कॉरिडोर (चंडीगढ़ रीजन रेनोवेशन नॉलेज कलस्टर) को खुद ज्ञान की जरूरत है। इससे जुड़े अफसरों को ज्ञान मिलता तो शायद कोरोना काल में इसका सर्वाधिक उपयोग होता। घर बैठे 29 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को ज्ञान मिलता।

विज्ञापन


दो साल से यह मंच पूरी तरह से बंद है। न शिक्षण संस्थानों के अफसरों की बैठक हुई और न कोई छात्रों को सुविधाएं देने के लिए प्रस्ताव तैयार हुआ। छात्र इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें कोरोना काल में ऑनलाइन सुविधाएं मिलेंगी। छात्रों का कहना है कि पुस्तकालय से लेकर प्रयोगशालाओं तक का कार्य ऑनलाइन शुरू किया जा सकता है।

विज्ञापन

चार समितियों के 32 सदस्यों को करना था संचालन

क्रिक कॉरिडोर से 29 शिक्षण संस्थान जुड़े हैं। इन संस्थानों के अधिकारियों व कुछ शिक्षकों को जोड़कर चार समितियां बनाई गई थीं, जिनमें 32 सदस्य थे। इन सभी की बैठकें समय-समय पर होनी थी। कोरोना काल में सभी संस्थानों की बैठकें ऑनलाइन चल रही थीं। जानकारों का कहना है कि इसके लिए भी बैठक ऑनलाइन हो सकती थी, लेकिन किसी ने इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।

हालांकि तर्क ये दिए जा रहे हैं कि तमाम शिक्षण संस्थानों के मुखिया बदल गए। कुछ शिक्षक भी सेवानिवृत्त हो गए तो कुछ बदल गए। इसके कारण यह मंच आगे नहीं बढ़ सका। जानकारों का कहना है कि कोरोना से बाधा जरूर डाली, लेकिन शिक्षण संस्थानों के सभी कार्य हो रहे हैं, अधिकारी चाहते तो यह मंच भी दौड़ सकता था।

ऐसे रखी गई क्रिक की नींव
वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने क्रिक की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य था कि एक संस्थान के पास भरपूर बुनियादी ढांचा नहीं हो सकता है। ऐसे में शिक्षक, विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे संस्थानों की प्रयोगशाला, पुस्तकालय व अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। इसका शुभारंभ सात से आठ शिक्षण संस्थानों से हुआ। शुभारंभ तो ठीक हुआ, लेकिन बाद में इसका कार्य धीमा होता चला गया। हालांकि समितियां बनाकर एक-दो बैठकें कोरोना के शुरू होने से पहले जरूर की गई थीं। इस मंच के अध्यक्ष वीसी होते हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि इस मंच को आगे बढ़ाएं।

मंच से ये बड़े शिक्षण संस्थान जुड़े

- पीयू
- इमटेक
- नाइपर
- आईएनएसटी
- सीआईएबी
- नाबी
- पेक
- पीजीआई
- निटर

ये बननी हैं नई कमेटियां
क्रिक संचालन के लिए लाइब्रेरी शेयरिंग कमेटी, इंस्ट्रूमेंटल फैसिलिटीज शेयरिंग कमेटी, कमेटी टू फ्रेम रूल्स, कमेटी टू स्ट्रीमलाइन द ऑपरेशन ऑफ क्रिक बसेज आदि कमेटियां नए सिरे से बननी हैं। इनके जरिए ही तय होगा कि कोरोना काल में किन सुविधाओं का लाभ ऑनलाइन छात्रों तक पहुंचाया जा सकेगा। उनका शुल्क लगेगा या मुफ्त होंगी। पुस्तकालय को कैसे ऑनलाइन किया जा सकता है। शोध का लाभ कैसे मिलेगा, इन सभी पर यह कमेटियां निर्णय लेंगी।

कोरोना के कारण क्रिक का संचालन नहीं हो सका। इसके लिए अब जल्द ही बैठक करेंगे और छात्रों को ऑनलाइन सुविधाएं देने की योजनाएं तैयार करेंगे। - प्रो. एसके मेहता, समन्वयक, क्रिक  कॉरिडोर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed