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वेंटिलेटर पर पंचकूला की इंडस्ट्री, सरकारी पॉलिसी में कई पेंच
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
Updated Thu, 19 Nov 2015 01:46 PM IST
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पंचकूला की इंडस्ट्री वेंटिलेटर पर चल रही है। न इंफ्रास्ट्रक्चर, न नीतियों का सपोर्ट, न मूलभूत सुविधाएं। हरियाणा सरकार द्वारा जारी नई औद्योगिक नीति भी उद्योगपतियों को राहत नहीं दे सकी। बिजली और पानी के साथ टैक्स ने प्रोडक्शन कास्ट को इतना बढ़ा दिया है कि कई उद्योगपतियों ने इंडस्ट्री बंद कर दी और चीन से सामान आयात कर उसको बेचना शुरू कर दिया।
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अब उद्यमियों को तलाश है संजीवनी की, जो या तो सर्विस सेक्टर से आएगी या फिर कोई बड़ी इकाई की स्थापना से। पंचकूला में ज्यादातर इंडस्ट्री ट्रैक्टर पार्ट्स या नटबोल्ट की हैं। जिन्हें रॉ मैटेरियल बाहर से मंगवाना पड़ता है। अब पंचकूला के उद्यमियों को बिजली की कीमत इतनी ज्यादा चुकानी पड़ती है कि वह चंडीगढ़ और बद्दी के प्रोडक्ट का मुकाबला नहीं कर पाते।
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इसी कारण कंपीटिशन ज्यादा हो चुका है, जिसमें यह उनके मुकाबले दौड़ना तो दूर चल तक नहीं पा रही हैं। हालत पस्त है, रास्ता भी नहीं है। हरियाणा सरकार ने उबारने का रास्ता बताया तो भी ऐसा कि कोई उसको पूरा तक नहीं करता। उद्यमियों की मुख्य मांग है सर्विस सेक्टर की तो उसके लिए कोई ठोस उपाय नहीं है। पॉलिसी आई भी तो इतने पेंच के साथ कि सभी की समझ के परे। ऐसे में उद्यमी परेशान हैं कि कहां जाएं।
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बदल चुकी हैं आवश्यकताएं
पंचकूला की इंडस्ट्री की आवश्यकताएं बदल चुकी हैं पर अब तक इंडस्ट्री नहीं बदलीं। पच्चीस से तीस साल पहले तक इंडस्ट्री में न बिजली की समस्या थी न ही लेबर की। इंडस्ट्री की आवश्यकताओं में प्रोडक्शन कास्ट कम करने के साथ ही हर ट्रेड की इजाजत देना शामिल हो चुका है।
उद्यमियों की मानें तो सरकार ने जो नई नीति जारी की है उसमें दस करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट प्लान और मशीनरी और बिल्डिंग है तो आपको कुछ भी करने की इजाजत है। पंचकूला में जो छोटी इंडस्ट्री हैं वह तो बंद होने के कगार पर हैं। यहां एफएआर रेसियो कम होने के कारण वर्टिकल डेवलपमेंट की सुविधा तक नहीं। उद्यमियों के अनुसार अब बरवाला में इंडस्ट्रियल एरिया एकदम फेल हो चुका है और कालका और पिंजौर का हाल भी बुरा हो चुका है।
इसके साथ ही उद्यमियों की मुख्य बाधा है वन विंडो क्लीयरेंस, जिसकी वजह से उद्यमी भागते दौड़ते रहते हैं, जिससे उनका समय खपता ज्यादा है। पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया में ट्रांसपोर्ट एरिया तक नहीं है। जिसकी वजह से भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, शिकायत पेटिका तक यहां नहीं है। उद्यमियों का कहना है कि इंडस्ट्री को आगे बढ़ाना है तो योजनाओं बनाने से ज्यादा जरूरी है अफसरों का रियलिटी चेक करना।
कोई बड़ी यूनिट तो लाएं
पंचकूला के उद्योग को डेवलप करने के लिए यदि गुड़गांव जैसी रणनीति अपनाई जाए तो बेहतर होगा। मानेसर में मारुति के प्लांट के कारण छोटी यूनिट्स डेवलप हुई हैं और ऐसी ही यूनिट्स यहां लाईं जाएं तो शायद इंडस्ट्री डेवलप हो जाएं। उन्होंने कहा कि पंचकूला में उद्यमियों को हरेक ट्रेड की इजाजत दी जानी चाहिए। यहां एफएआर की बात की जाती है, जो कि पहले 1.25 था, अब यह डेढ़ कर दिया गया है, जबकि पंजाब में यह तीन है। इतना ही नहीं, सर्विस सेक्टर में निवेशक खूब हैं, सर्विस सेक्टर से ही लाभ हो सकेगा।
- अरुण ग्रोवर, अध्यक्ष इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन पंचकूला
हमारे लिए टैक्स की बड़ी समस्या है, यहां वैट तेरह फीसदी है और चंडीगढ़ में सवा पांच फीसदी है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिसिटी की वजह से हम कंपीट नहीं कर पाते हैं।
- वीके इंजीनियरिंग, स्टील फैब्रिकेटर
पंचकूला के औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों और यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कई बार मीटिंग्स हो चुकी हैं। नगर निगम यहां की दशा जल्द सुधारेगा।
- विवेक आत्रेय, उपायुक्त पंचकूला
इंडस्ट्रियल एरिया की सड़कों का पैचवर्क हम टेकअप कर चुके हैं। कुछ सड़कें विजिलेंस इंक्वायरी में हैं। जल्द से जल्द सड़कों को सुधारें। यहां की लाइट्स को भी मैं खुद चेक करवाऊंगा। जहां कमी होगी वहां दूर किया जाएगा।
- जगदीप ढांडा, निगम कमिश्नर पंचकूला
पंचकूला इंडस्ट्री का बार्डर एरिया है। पंचकूला की इंडस्ट्री का हाल बेहाल होने का मुख्य कारण है यही बार्डर एरिया। हिमाचल सरकार द्वारा दी गई छूट के कारण काफी इंडस्ट्री यहां से पलायन कर गईं। भाजपा की सरकार के आने के बाद नई नीति में हमने इंडस्ट्री के लिए कैटेगरी बना दी हैं। मोरनी और रायपुररानी के एरिया को डी कैटेगरी में डाला है और बरवाला को सी कैटेगरी में। हम यहां बिजली की रियायत भी देंगे और अन्य छूट भी। इसके साथ ही एक एकड़ की जमीन के लिए डिप्टी कमिश्नर ही परमीशन दे देंगे। बिजली के रेट्स ज्यादा हैं, हमने सरकार के सामने इस समसया को रखा है। इसके साथ ही हम यहां एमएसएमई एक्ट की कुछ बातों की इजाजत के लिए बातचीत कर रहे हैं जिससे बिजनेस डेवलप हो सके।
- ज्ञानचंद गुप्ता विधायक, पंचकूला