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विकास की इबारत लिखने वाली HMT गिन रही अंतिम सांसें
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
Updated Thu, 19 Nov 2015 01:46 PM IST
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पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में विकास की इबारत लिखने वाली एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन एंड टूल्स) अब बंद होने के कगार पर है। यह वही फैक्टरी है जिसका जेटर हासिल करने के लिए 6 माह का इंतजार किया जाता था। अब फैक्टरी में सिर्फ पचास से साठ ट्रैक्टर प्रतिमाह बनते हैं।
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पिंजौर में एचएमटी की स्थापना 23 अक्तूबर 1963 में हुई थी। इसका नाम था मशीन टूल्स फैक्टरी। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने किया था। मशीन टूल्स फैक्टरी के बाद 1975 में ट्रैक्टर यूनिट शुरू हुई तो रोजगार के अपार अवसर मिले।
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1978 में एचएसआईडीसी के साथ मिलकर पंचकूला और कालका में 40 छोटी यूनिट्स भी स्थापित की गईं। एचएमटी के लिए 842 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई। लेकिन फैक्टरी की दोनों यूनिट और कॉलोनी के साथ इमारतों का 396 एकड़ में निर्माण हुआ।
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एडवांस पेमेंट देकर 6 माह इंतजार
छोटी यूनिट्स एचएमटी के लिए ट्रैक्टर पार्ट्स बनाती थीं। एचएमटी में जेटर ट्रैक्टर बनता था। विश्व प्रसिद्ध एचएमटी के कारण इस ट्रैक्टर के लिए लोग छह माह पहले ट्रैक्टर की बुकिंग कराते थे। एचएमटी में दो हजार ट्रैक्टर प्रतिमाह तैयार होते थे। इसी वजह से छोटी इंडस्ट्री खोलने की आवश्यकता भी पड़ी थी। एचएमटी में उस समय आठ हजार से ज्याद लोग नौकरी करते थे।
अब सिर्फ दो हजार कर्मचारी
एचएमटी पिंजौर में अब सिर्फ 2000 कर्मचारी हैं। इतना ही नहीं पंचकूला और कालक में छोटी इंडस्ट्री को भी अब काम मिलना बंद हो चुका है। उनकी पेमेंट बाकी है। जिस कारण वह बंद होने के कगार पर है। ऐसी चालीस इंडस्ट्री हैं, जो एचएमटी पर निर्भर थीं, अब यहां कोई काम नहीं होता है।
पैकेज दिए पर कर्ज में चले गए
अप्रैल 2013 में केंद्र ने ट्रैक्टर प्लांट को 1083 करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज दिया था। लेकिन अधिकतर राशि पुरानी देनदारी में चली गई। वर्किंग कैपिटल के 53 करोड़ में से मात्र 45 करोड़ रुपये आए थे, उसमें से भी 15 करोड़ रुपये रॉ मैटेरियल एवं अन्य को 4 करोड़ रुपये का पुराना भुगतान कर दिया गया। 656 करोड़ रुपये से पुराना कर्जा अदा किया।
प्राइवेट से नहीं ले सके टक्कर
एचएमटी एनसीलिएरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी भूषण ने कहा कि एचएमटी वही है जिसके ट्रैक्टर की डिलीवरी के लिए लंबी कतारें लगती थीं। इसके हालात इस वजह से बदले क्योंकि यह प्राइवेट सेक्टर से टक्कर नहीं ले सकी। सोनालिका, पंजाब ट्रैक्टर और हिमाचल में ट्रैक्टर ब्रांड आ गए। एचएमटी में उस समय की परिस्थितियों के मुताबिक मार्केटिंग नहीं की गई। खर्चे बढ़ गए और यह धीरे धीरे बैठ गई।
पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है
एचएमटी एनसीलिएरी इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के महासचिव अशोक सिंघल ने कहा कि एचएमटी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है। जिसकी वजह से उसके खर्च ही इतने अधिक हो चुके थे कि उनपर अंकुश लगाना नामुमकिन हो गया। मार्केट में कंपटीशन होने के कारण प्रोडक्शन कम होता चला गया। जिसकी वजह से यह यूनिट खत्म हो गई। अब यहां सिर्फ ताला ही नहीं लगा है।