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हेल्थ रिसर्च का बड़ा खुलासा, पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में डिप्रेशन

Mon, 29 Feb 2016 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Mon, 29 Feb 2016 09:28 AM IST
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panchkula general hospital survey on depression

भागदौड़ भरी जिंदगी में हम डिप्रेशन से जुड़े तत्व नजर अंदाज कर रहे हैं। जो हमारे लिए बेहद खतरनाक हैं। खासकर महिलाएं। इस वजह से पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में डिप्रेशन के मामले सामने आने लगे हैं। रिसर्चों में कहा गया है कि पुरुषों से दोगुना ज्यादा महिलाओं में आत्मविश्वास में कमी आ रही है।

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पंचकूला सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करे तो पांच वर्षों में डिप्रेशन के आने वाले मामलों में 45 प्रतिशत महिलाओं के केस में इजाफा हुआ है। इनमें ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर से जुड़ी कामकाजी महिलाएं हैं।
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मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार, आदमी अपने पूरे जीवनकाल में एक बार डिप्रेशन के दौर से जरूर गुजरता है। दस मामले से एक मामला ऐसा भी होता है, जिसमें डिप्रेशन ही आत्महत्या का कारण बनता है।
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क्या हैं लक्षण
• उदासी, अपने आप को खाली महसूस करना, दिन के कार्यकलापों में दिलचस्पी का खत्म होना
• आसान बात भी भूलना और निर्णय लेने में देरी करना
• छोटी बातों पर चिढ़ना, उत्तेजित होना, प्रत्येक दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए खुद को दोषी मानकर कोसना
•यदि आपको लगता है कि इन लक्षणों से आप दो सप्ताह से ग्रसित हैं तो समझ लीजिए, आप डिप्रेशन के शिकार हैं।

बचने के उपाय
• अपने मस्तिष्क को क्रियाशील रखें। स्वयं को काम में लगाए रखें। दैनिक कार्य से अवकाश लें और मेडिटेशन करें। इससे अल्फ वेब्स का संचार होता है और आपके मस्तिष्क को दैनिक तनाव से मुक्त करेगा।
• नियमित रूप से योग और व्यायाम करने से शरीर में एंडोर्फिन्स का स्तर बढ़ता है, जो उत्तेजना, तनाव जैसे लक्षणों को दूर करना है।
• स्वयं के लिए कठिन लक्ष्य तय न करें।
• बढ़े कार्यों को विभाजित कर प्राथमिकता तय करें। स्वयं के लिए सारणी बनाएं।

इनसे करें परहेज
नकारात्मक सोच से बचें। उन वस्तुओं के सेवन से बचें जो तनाव की स्थिति में लेते हैं। जैसे शराब, तंबाकू, अधिक चाय या कॉफी, बिना डॉक्टरी सलाह लिए कोई दवा न लें।

•सामान्य अस्पताल में पांच वर्षों में डिप्रेशन के मामलों में 45 प्रतिशत का इजाफा
•इनमें प्राइवेट सेक्टर से जुड़ी कामकाजी महिलाओं की संख्या अधिक
• रिश्तों में तनाव
• आफिस और घर में सामंजस्य बैठाने में दिक्कत
•लेटलतीफी के कारण बॉस की फटकार
• जरूरत से ज्यादा उम्मीद और वह पूरी न होना

पुरुषों की तुलना में दो गुना ज्यादा महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं। इनमें पांच सालों में 45 फीसदी का इजाफा हुआ हैं। इसमें कामकाजी महिलाएं ज्यादा शामिल हैं।
- डॉ. राजीव त्रेहन, मनोरोग विशेषज्ञ, जनरल अस्पताल पंचकूला

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