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पंजाब में पंचायती जमीन से भी रेत-बजरी की लूट

Wed, 13 Nov 2013 01:53 AM IST
हमीर सिंह/ अमर उजाला, चंडीगढ़
हमीर सिंह/ अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 13 Nov 2013 01:53 AM IST
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Panchayats do not get any money from man

पंजाब में शामलात जमीन पर नाजायज कब्जों के अलावा पंचायती जमीन की रेत-बजरी भी माफिया के कब्जे में है। पंचायतों को इसके बदले में फूटी कौड़ी भी नहीं मिल रही है।

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यह पूरी तरह पंचायतीराज कानून का उल्लंघन है। जस्टिस कुलदीप सिंह ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को सामने लाया गया है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कानूनी तौर पर यदि पंचायत की जमीन से खनन (रेत, बजरी) होता है तो इसकी पूरी आमदनी का एक तिहाई हिस्सा पंचायत को मिलना जरूरी है।
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खनन क्षेत्रों की बोली का अधिकार उद्योग और खनन विभाग को दिया गया है। ठेकेदार बोली पर पूरा क्षेत्र ले लेते हैं और पंचायती जमीन से भी रेत और बजरी निकालकर बेचते रहते हैं।
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पंचायत को इसका कोई पैसा नहीं दिया जाता। बोली के दौरान भी संबंधित ब्लॉक विकास एवं पंचायत अफसर और सरपंच को नहीं बुलाया जाता।

पैसा मांगने पर वे पूरी तरह मुकर जाते हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र से तो रेत निकाली ही नहीं है। हर सीजन में नदियों से रेत नई आती है और पुरानी निकाल ली जाती है।

सूत्रों के अनुसार पंचायत विभाग की मांग पर राज्य सरकार ने एक कैबिनेट सब कमेटी का गठन भी किया था। इसने पंचायती जमीन के अधीन आते खनन क्षेत्र की अलग बोली करने की सिफारिश की थी।

इसे लागू नहीं किया गया। इससे पंचायत के पैसे की बड़े स्तर पर लूट हो रही है।
 
ट्रिब्यूनल की सिफारिश
जस्टिस कुलदीप सिंह ट्रिब्यूनल की दूसरी अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि दि पंजाब माइनर मिनरल्स एक्ट एंड पंजाब विलेज कामन लैंड (रेगुलेशन) एक्ट 1961 और इसके अधीन बनाए गए नियमों के मुताबिक ग्राम पंचायतों को खनन क्षेत्र की बोली करने का अधिकार है।

पंचायतों को इस अधिकार से वंचित कर दिया गया है। माइनिंग विभाग ने यह अधिकार ले रखा है। इससे न केवल ग्राम पंचायतों की आमदनी चली गई बल्कि इस जमीन से उनका नियंत्रण और देखरेख का अधिकार भी खत्म हो गया है।


पंजाब के पंचायत विभाग के संयुक्त निदेशक जेपी, सिंगला ने बताया कि मोहाली जिले में बड़े पैमाने पर ऐसी जमीन से खनन हो रहा है लेकिन ग्राम पंचायतों को इसकी सूचना तक नहीं है। पंचायती जमीन से कब्जे छुड़ाने के लिए सभी जिला अधिकारियों को एक महीने का समय दिया गया था। पंचायत मंत्री इसी हफ्ते इसकी समीक्षा करेंगे।

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