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पाक का करतारपुर कॉरिडोर पर नया खेल, प्रति श्रद्धालु 1400 रुपये लेने पर अड़ा

Fri, 13 Sep 2019 01:27 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 13 Sep 2019 01:27 AM IST
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Pakistan remains adamant on charging entry fees On Kartarpur Corridor
श्री करतारपुर साहिब - फोटो : फाइल फोटो

करतारपुर कॉरिडेर पर भारी फीस रखे जाने को अकल तख्त के एक्टिंग जत्थेदार, सरबत खालसा, ध्यान सिंग मांड ने सही नहीं ठहराया है। उन्होंने कहा है, "20 डॉलर सेवा फीस एक आम आदमी के लिए बहुत अधिक है। पाकिस्तान सरकार को बड़ा दिल दिखाना चाहिए और प्रवेश फ्री रखना चाहिए। हमें उम्मीद है कि वह फैसले की समीक्षा करेंगे।"

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बता दें पाकिस्तान गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए आने वाले हर श्रद्धालु से 20 अमरीकी डॉलर (लगभग 1400 रुपये) की यात्रा फीस वसूली के मामले पर अड़ गया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल ने एक ट्वीट में श्रद्धालुओं से वसूले जाने इस जजिया कर को ‘सर्विस फीस’ का नाम देते हुए सफाई दी है कि उक्त राशि दाखिला फीस के रूप में नहीं है।
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डॉ. फैसल ने कहा कि यह सर्विस फीस हर श्रद्धालु से ली जाएगी। भारत सरकार के अधिकारी एससीएल दास ने चार सितंबर को अटारी में आयोजित भारत पाक की बैठक में ही स्पष्ट कर दिया था कि दुनिया भर में बने इस प्रकार के कॉरिडोर में कोई भी फीस नहीं उगाही जाती।

 

कॉरिडोर गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए बनाया गया है। यह कॉरिडोर आम श्रद्धालुओं के लिए है। भारतीय अधिकारियों ने इस बैठक में पाकिस्तानी शिष्टमंडल को इस मांग पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। 

इसके साथ ही पाकिस्तानी शिष्टमंडल ने भारत सरकार की उस मांग को भी अस्वीकार कर दिया था जिसमें कहा गया था कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ एक भारतीय प्रोटोकॉल अधिकारी को भी भेजने की अनुमति दी जाए। भारतीय अधिकारियों का तर्क था कि यह अधिकारी श्री करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी समस्याएं के समय उनकी मदद के लिए होंगे। 





इन दोनों मुद्दों के हल के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अभी एक और बैठक का आयोजन किया जाना है। अभी तक दोनों देशों के बीच कॉरिडोर को लेकर तीन बैठक हो चुकी है। इन दोनों मुद्दों पर असहमति होने के कारण करतारपुर कॉरिडोर के फाइनल ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं।

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