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करतारपुर साहिब बॉर्डर पर पाक बना सकता है रास्ता, बस पदल चल पहुंच जाएंगे दर्शनस्थल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
Updated Fri, 07 Sep 2018 07:23 PM IST
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Kartarpur sahib
- फोटो : फाइल फोटो
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भारत से अमन की बातचीत फिर से शुरू करने का पाकिस्तान के पास इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता। सरकार को यह काम बिना किसी देरी के शुरू कर देना चाहिए। यह बात लाहौर निवासी योगी शमशाद हैदर ने कही। जब उन्हें बताया गया कि पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने गुरुद्वारा करतार साहिब आने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए रास्ता खोलने का ऐलान किया है। योगी हैदर मानते है कि यह काम तो कई साल पहले हो जाना चाहिए था।
गुरु श्री नानक देव जी ने आखिरी 17 साल यहीं बिताए थे
सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री नानक देव जी की 16वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले भाई सुखदेव सिंह कहना है कि बाबा नानक ने अपनी जिंदगी के आखिरी 17 साल 5 महीने 9 दिन करतार साहिब में ही गुजारे थे। उनका सारा परिवार यहीं आकर बस गया था। उनके माता पिता का देहांत भी इसी जगह पर हुआ। इस लिहाज से यह पवित्र स्थल सिखों के मन से जुड़ा धार्मिक स्थान है।
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गुरु श्री नानक देव जी ने आखिरी 17 साल यहीं बिताए थे
सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री नानक देव जी की 16वीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले भाई सुखदेव सिंह कहना है कि बाबा नानक ने अपनी जिंदगी के आखिरी 17 साल 5 महीने 9 दिन करतार साहिब में ही गुजारे थे। उनका सारा परिवार यहीं आकर बस गया था। उनके माता पिता का देहांत भी इसी जगह पर हुआ। इस लिहाज से यह पवित्र स्थल सिखों के मन से जुड़ा धार्मिक स्थान है।
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सिद्धू के खाते में कॉरिडोर की शुरुआत
नवजोत सिंह सिद्धू
गुरुद्वारा करतार साहिब दर्शनों के लिए डेरा बाबा नानक सीमा से कॉरिडोर बनाने की मांग की शुरुआत अकाली नेता कुलदीप सिंह वडाला ने 13 अप्रैल 2001 को उठाई थी, जब वे अपना पहला जत्था लेकर बार्डर पर पहुंचे थे। दुर्भाग्य से वडाला अब इस संसार में नहीं हैं, लेकिन अब कॉरिडोर शुरू होने का श्रेय पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह के खाते में जा रहा है।
वास्तव में डेरा बाबा नानक पर बीएसएफ के वाच टावर के नीचे सिख संस्थानों ने शानदार चबूतरे का निर्माण कर दिया है। जिस पर खडे़ होकर आप पहले गुरु साहिबान के जीवनकाल से जुडे़ गुरुद्वारा साहिब के धुंधले दीदार कर सकते हैं। नीले आकाश और हरे भरे खेतों के बीच सफेद रंग की इमारत दूरबीन की मदद से साफ दिखाई दे जाती है। सरहद से गुरुद्वारा साहिब की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है। लेकिन बीच में से रावी नदी गुजरती है।
पाकिस्तानी सरकार बना सकती है रास्ता
लाहौर निवासी इंजीनियर राय साहिब बताते हैं कि पाकिस्तान सरकार दोनों तरफ कंटीली बाढ़ लगाकर बीच में रास्ते का निर्माण कर सकती है। रावी पर जब तक पक्के पुल बनाया जा सकता है। इस तरह पाकिस्तान सरकार चाहे तो कु छ महीनों में ही इस प्रोजेक्ट का पूरा कर सकती है। पाकिस्तान सरकार ने इस बात का इशारा दे ही दिया है कि गुरुद्वारे के दर्शन के लिए टिकट लगाई जाएगी। वास्तव में यह टिकट ही वीजा या परमिट का काम करेगी। हर श्रद्धालु को सुबह जाकर शाम तक लौटना होगा।
वास्तव में डेरा बाबा नानक पर बीएसएफ के वाच टावर के नीचे सिख संस्थानों ने शानदार चबूतरे का निर्माण कर दिया है। जिस पर खडे़ होकर आप पहले गुरु साहिबान के जीवनकाल से जुडे़ गुरुद्वारा साहिब के धुंधले दीदार कर सकते हैं। नीले आकाश और हरे भरे खेतों के बीच सफेद रंग की इमारत दूरबीन की मदद से साफ दिखाई दे जाती है। सरहद से गुरुद्वारा साहिब की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है। लेकिन बीच में से रावी नदी गुजरती है।
पाकिस्तानी सरकार बना सकती है रास्ता
लाहौर निवासी इंजीनियर राय साहिब बताते हैं कि पाकिस्तान सरकार दोनों तरफ कंटीली बाढ़ लगाकर बीच में रास्ते का निर्माण कर सकती है। रावी पर जब तक पक्के पुल बनाया जा सकता है। इस तरह पाकिस्तान सरकार चाहे तो कु छ महीनों में ही इस प्रोजेक्ट का पूरा कर सकती है। पाकिस्तान सरकार ने इस बात का इशारा दे ही दिया है कि गुरुद्वारे के दर्शन के लिए टिकट लगाई जाएगी। वास्तव में यह टिकट ही वीजा या परमिट का काम करेगी। हर श्रद्धालु को सुबह जाकर शाम तक लौटना होगा।
भारत-पाकिस्तान सरकार ने सिखों की भावनाओं को समझा : लौंगोवाल
एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव के मौके पर पाकिस्तान सरकार की ओर से श्री करतारपुर साहिब का बार्डर खोलने और श्रद्धालुओं को बगैर वीजा के दर्शन करने की सहमति देने का शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जोरदार स्वागत किया है। एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत करते हुए कहा कि एसजीपीसी और अकाली दल का एक प्रतिनिधिमंडल पिछले दिनों इसी मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला था।
तब मांग की गई थी कि श्री गुरु नानक देव जी के 550 वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर श्रीकरतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए बार्डर खुलवाए जाएं। शुक्रवार को पाकिस्तान सरकार ने भारत सरकार की इस मांग को स्वीकार कर लिया है। इसके लिए एसजीपीसी दोनों सरकारों का धन्यवाद करती है। दोनों सरकारों ने सिख श्रद्धालुओं की भावनाओं की कद्र करते हुए उक्त फैसला किया है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने अपना अंतिम समय श्री करतारपुर साहिब में व्यतीत किया था और यह पवित्र स्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है।
दो किमी चलना पड़ेगा पैदल
करतारपुर राबी नदी के पार अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान में स्थित है। लाहौर से यह गुरुद्वारा 120 किलोमीटर की दूरी पर है। 550वां प्रकाशोत्सव नवंबर 2019 में मनाया जाएगा। सिख समुदाय लंबे समय से इस मार्ग को खोलने की मांग करता रहा है, क्योंकि अभी संगत को अटारी-वाघा मार्ग से जाना पड़ता है, जो काफी लंबा है।
करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत की दूरी महज दो किमी है। गुरदासपुर जिले में स्थित एतिहासिक डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा भी यहां से बिल्कुल पास है। संगत डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से पैदल ही अरदास करते करीब डेढ़ किलोमीटर दूर धुस्सी बांध पर जाती है और वहां पर बीएसएफ चेक पोस्ट पर खड़े होकर सामने गुरुद्वारा साहिब दिखाई देता है। वहां से महज दो किलोमीटर दूर करतारपुर गुरुद्वारा साहिब है।
तब मांग की गई थी कि श्री गुरु नानक देव जी के 550 वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर श्रीकरतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए बार्डर खुलवाए जाएं। शुक्रवार को पाकिस्तान सरकार ने भारत सरकार की इस मांग को स्वीकार कर लिया है। इसके लिए एसजीपीसी दोनों सरकारों का धन्यवाद करती है। दोनों सरकारों ने सिख श्रद्धालुओं की भावनाओं की कद्र करते हुए उक्त फैसला किया है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने अपना अंतिम समय श्री करतारपुर साहिब में व्यतीत किया था और यह पवित्र स्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है।
दो किमी चलना पड़ेगा पैदल
करतारपुर राबी नदी के पार अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान में स्थित है। लाहौर से यह गुरुद्वारा 120 किलोमीटर की दूरी पर है। 550वां प्रकाशोत्सव नवंबर 2019 में मनाया जाएगा। सिख समुदाय लंबे समय से इस मार्ग को खोलने की मांग करता रहा है, क्योंकि अभी संगत को अटारी-वाघा मार्ग से जाना पड़ता है, जो काफी लंबा है।
करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की अंतरराष्ट्रीय सीमा से भारत की दूरी महज दो किमी है। गुरदासपुर जिले में स्थित एतिहासिक डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा भी यहां से बिल्कुल पास है। संगत डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से पैदल ही अरदास करते करीब डेढ़ किलोमीटर दूर धुस्सी बांध पर जाती है और वहां पर बीएसएफ चेक पोस्ट पर खड़े होकर सामने गुरुद्वारा साहिब दिखाई देता है। वहां से महज दो किलोमीटर दूर करतारपुर गुरुद्वारा साहिब है।