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Hindi News ›   Chandigarh ›   Pak to unveil Maharaja Ranjit Singh statue today

पाकिस्तान में पहली बार शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह की विशाल प्रतिमा का अनावरण

Fri, 28 Jun 2019 05:46 PM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 28 Jun 2019 05:46 PM IST
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Pak to unveil Maharaja Ranjit Singh statue today
शेर-ए-पंजाब रणजीत सिंह - फोटो : फाइल

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार शेर-ए-पंजाब महाराजा रंजीत सिंह के एक आदमकद कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर चौधरी मोहम्मद सरवर द्वारा अनावृत इस बुत में महाराजा रंजीत सिंह अपने सबसे प्रिय घोड़े पर सवार हैं।

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कांस्य से बनाई गई महाराजा की इस आदमकद प्रतिमा को बनाने में आठ महीने का समय लगा है। इस प्रतिमा को बनाने में 85 फीसदी कांस्य, पांच फीसदी  टिन, पांच फीसदी सीसा और 5 फीसदी जीस्त का प्रयोग किया गया है। इंग्लैंड निवासी इतिहासकार व सिख खालसा (एसके) फाउंडेशन के प्रमुख बॉबी सिंह बंसल द्वारा इस आदमकद के बुत को बनाने में मदद दी है। प्रतिमा सात फुट ऊंची है।
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लाहौर किला में स्थित महारानी जींद कौर की हवेली के बाहर स्थापित किया गया है। महारानी जींद कौर की हवेली वह स्थान है जहां महाराजा रंजीत सिंह के हथियार, राजकुमार बंबा की यादगारें व खासला राज की निशानियां संजो कर रखी हुईं है। महाराजा रंजीत सिंह के इतिहास की जानकारी देने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पहली बार इस बुत के साथ गुरमुखी, उर्दू व इंग्लिश में एक तांबे की प्लेट भी लगाई है।

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इस अवसर पर बॉबी बंसल ने कहा की लाहौर फोर्ट में इस आदमकद कके बुत को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य सीमा के इस पार व उस पार के पंजाबियों को पंजाब के इस महान शासक के इतिहास के बारे में जानकारी देना है। महाराजा रंजीत सिंह केवल सिखों के राजा नहीं थी, वह समूह पंजाबियों के दिलों में राज करते थे। पाकिस्तान के इतिहासकार अंजुम दारा ने कहा की पंजाब के इतिहास में महाराजा रंजीत के दौर नई पीढ़ी को जानकारी देने में मदद मिलेगी।

गुरु नगरी में भी लगी है महाराजा की बुत 
गुरु नगरी के राम बाग में भी घोड़े पर सवार महाराजा रंजीत का बुत स्थापित है। इस बुत की स्थापना लहभग 25 वर्ष पूर्व की गई थी।  राम बाग शेरे पंजाब द्वारा बनाया गया था। यही पर महाराजा रंजीत सिंह ने गर्मियों के दिन बिताने के लिए एक महल भी बनाया था। आजादी के बाद इसको एक म्यूजियम में बदल दिया गया था।

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