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कहानी टोबा टेक सिंह में दिखा भारत-पाक के बंटवारे का दर्द

Sun, 30 May 2021 07:36 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 30 May 2021 07:36 PM IST
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Pain of partition of India and Pakistan seen in Toba Tek Singh
चंडीगढ़। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के फेसबुक पेज पर रविवार को सआदत हसन मंटो की कहानी ‘टोबा टेक सिंह’ का एकल मंचन किया गया। रंगकर्मी रेवत राम विक्की ने एकल प्रस्तुति में भारत-पाक बंटवारे के दर्द को सशक्त ढंग से अभिव्यक्त किया। इस नाटक का निर्देशन केहर सिंह ठाकुर की ओर से किया गया। पूरे नाटक का मंचन ब्लैक एंड व्हाइट लाइट के उपयोग में किया गया।
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देश के बंटवारे का फैसला भले चंद हुक्मरानों ने लिया हो, परंतु आम आदमी उससे सर्वाधिक प्रभावित रहा। देखते-देखते मुल्क के दो टुकड़े हो गए थे। कुछ लोग इस फैसले से खुश थे तो कुछ नाराज। कहानी लाहौर के पागलखाने में बंद पागलों पर आधारित है। इसका मुख्य पात्र बिशन सिंह है जो बंटवारे के दंश को झेलता हुआ दिखता है। कहानी में दिखाया कि बंटवारे के बाद बिशन सिंह उर्फ टोबा टेक सिंह को भारत में छोड़ने की बात होती है। जब उसे ज्ञात होता है कि विभाजन में उसका गांव टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में शामिल हो गया है, यहीं से उसके जीवन की त्रासदी की शुरुआत होती है। नाटक के अंत में दिखाए संवाद में बिशन सिंह और बंटवारे का दर्द दर्शकों को भावुक कर देता है। रेवत राम बोलते हैं कि इधर, कंटीली तारों के पीछे हिंदोस्तान था। उधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान। दरमयान में जमीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था, टोबा टेक सिंह पड़ा था। बिशन सिंह इस बेनाम जमीन पर दुख के कारण अपने प्राण त्याग देते हैं।
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