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Hindi News ›   Chandigarh ›   Padma Shri Dr. Surjit Patar discusses poems at Chandigarh Literary International Lit Festival

Chandigarh News: चंडीगढ़ लिटराटी इंटरनेशनल लिट फेस्टिवल में पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर ने कविताओं पर की चर्चा

Sun, 18 Dec 2022 09:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 18 Dec 2022 09:00 AM IST
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Padma Shri Dr. Surjit Patar discusses poems at Chandigarh Literary International Lit Festival
चंडीगढ़। मैं दूसरी कक्षा में पढ़ता था जब घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पिताजी परदेसी हो गए। मेरे लिए वह दुख भरा क्षण था। जब पिता उत्तरी अमरीका के लिए निकले, मैं दरवाजे पर खड़ा था। उनको समुद्री जहाज से जाना था इसलिए समुद्र को खुश करने के लिए बहनों ने गड़बी में सिक्का डाला था।
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पिता के जाने के बाद मां की हालत देखी नहीं जा रही थी। तब एक कविता लिखी थी, उस समय की सोच और दृश्य को ध्यान में रखकर तब मैं एमए में पढ़ रहा था। ये बातें पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर ने शनिवार को लेक क्लब में आयोजित चंडीगढ़ लिटराटी इंटरनेशनल लिट फेस्टिवल के दौरान डॉ. लखविंदर जौहल के सवाल के जवाब में कहीं। इस दौरान पातर ने कहा कि उनके मन पर समाज, पेड़, और साज का बहुत प्रभाव पड़ा और उनकी कविताएं इन्हीं की आवाज हैं।
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इसके बाद डॉ. सुरजीत पातर ने अपनी मां के लिए लिखी कविता ‘मैली जेही स्याल दी उह धुंधली सवेर सी, सूरज दे चढ़न च हाले देर सी, पिता परदेस गया पहली वेर सी, मेरी मां दे नैना विच हंजू हनेर सी...’ सुनाई और भावुक हो गए। उनके साथ मंच और पंडाल में बैठे लोग भी भावुक हो गए। पातर के साथ मंच पर बैठे साहित्यकार लखविंदर जौहल ने इस दौरान उनसे कविता में व्यक्तिगत और राजनीति के बारे में प्रश्न पूछे।
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उस दौर को याद करते हुए पातर ने कहा कि मेरे देश के पास पक्षियों को देने के लिए दाना तक नहीं था। यह बहुत गलत बात थी। नुक्श हमारी धरती में था या सरकार चलाने वालों में। इस दौरान उन्होंने अपनी कई कविताएं भी सुनाईं। इस दौरान उन्होंने ‘मेरी छां में सो गया, सोहणिया मुंद के नैन, तू जिसको बड के बिजिया मैं तेरी भैण...’ यह कविता सुनाई और इसके मर्म को बताया। कहा कि किसी भाई ने अपनी बहन को मारकर एक उजाड़ जगह पर मिट्टी में दफना दिया। बाद में वहां एक पेड़ उग गया। पेड़ बड़ा हुआ। एक दिन उसी पेड़ के नीचे वही भाई आकर सो गया तब उस पेड़ से यही आवाज आई, जिसे सुनकर भाई ने पेड़ कटवा दिया ताकि उसकी बदनामी न हो। उस पेड़ की एक शाखा को फकीर ले गया और उससे सारंगी बनाई। सारंगी से भी वही गीत बजता था। सारंगी की आवाज के सबसे नदजीक औरत की आवाज है।

लखविंदर जौहल के पूछे प्रश्न कि नए शायरों के लिए क्या संदेश है, इसके जवाब में पातर ने कहा कि अपनी बात अपनी शब्दों में कहो। रोज पढ़ो। हम अभी भी सीख रहे हैं।
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