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500 रुपये लगाए और 'सुल्तान' बन गए लखपति, अब सरकार देगी पद्ममश्री...पढ़ें सक्सेस स्टोरी
Wed, 30 Jan 2019 01:53 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नीलोखेड़ी, तरावड़ी (करनाल)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नीलोखेड़ी, तरावड़ी (करनाल)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 30 Jan 2019 01:53 PM IST
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सुल्तान सिंह
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सिर्फ 500 रुपये निवेश किए और 'सुल्तान' लखपति बन गए। कामयाबी के इस शिखर पर पहुंचने के उन्होंने जो रास्ता अपनाया, उसके लिए सरकार उन्हें पद्मश्री अवार्ड देने जा रही है। कहते हैं कि जब हम किसी काम को पूरी मेहनत और जज्बे के साथ करते हैं तो उसमें हमें एक न एक दिन कामयाबी जरूरी मिलती है। इसका जीता जागता उदाहरण बुटाना गांव के किसान सुल्तान सिंह का आज हमारे सामने हैं।
जिन्होंने मछली पालन के क्षेत्र में देश एवं विदेशों में अपना पताका फहराया है। यही कारण है कि उन्हें पद्मश्री देने की केन्द्र सरकार ने घोषणा की है। बता दें कि बीए पास करने के बाद 56 वर्षीय सुलतान सिंह ने करीब 30 साल पहले 500 रुपये में तालाब पट्टे पर लेकर मछली पालन शुरू किया था। पहली ही बार में 25 हजार रुपये खर्च करके उसे डेढ़ लाख रुपये की बचत हुई थी। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पूरे क्षेत्र में दौड़ गई खुशी की लहर
पद्मश्री मिलने से सुल्तान सिंह के परिवार के साथ-साथ पूरे हलका में खुशी ही लहर दौड़ गई है। क्षेत्र से सुल्तान सिंह पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें यह अवार्ड मिलने जा रहा है। हालांकि, हरियाणा से पांच लोगों को पद्मश्री देने के लिए सरकार ने घोषणा की है। इनमें करनाल जिले के गांव बुटाना से सुल्तान सिंह के अलावा यमुनानगर के जगाधरी के रहने वाले दर्शन लाल जैन, झज्जर के बजरंग पूनिया, सोनीपत के गांव अटेरना के वंकल सिंह चौहान, पानीपत के गांव डिंडवाड़ी नरेंद्र सिंह शामिल हैं। हालांकि, इससे पहले सुल्तान सिंह को राज्य सरकार के अलावा विदेशों भी सम्मान मिल चुका है। पद्मश्री मिलना अपने आप में बहुत ही गर्व की बात है।
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जिन्होंने मछली पालन के क्षेत्र में देश एवं विदेशों में अपना पताका फहराया है। यही कारण है कि उन्हें पद्मश्री देने की केन्द्र सरकार ने घोषणा की है। बता दें कि बीए पास करने के बाद 56 वर्षीय सुलतान सिंह ने करीब 30 साल पहले 500 रुपये में तालाब पट्टे पर लेकर मछली पालन शुरू किया था। पहली ही बार में 25 हजार रुपये खर्च करके उसे डेढ़ लाख रुपये की बचत हुई थी। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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पूरे क्षेत्र में दौड़ गई खुशी की लहर
पद्मश्री मिलने से सुल्तान सिंह के परिवार के साथ-साथ पूरे हलका में खुशी ही लहर दौड़ गई है। क्षेत्र से सुल्तान सिंह पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें यह अवार्ड मिलने जा रहा है। हालांकि, हरियाणा से पांच लोगों को पद्मश्री देने के लिए सरकार ने घोषणा की है। इनमें करनाल जिले के गांव बुटाना से सुल्तान सिंह के अलावा यमुनानगर के जगाधरी के रहने वाले दर्शन लाल जैन, झज्जर के बजरंग पूनिया, सोनीपत के गांव अटेरना के वंकल सिंह चौहान, पानीपत के गांव डिंडवाड़ी नरेंद्र सिंह शामिल हैं। हालांकि, इससे पहले सुल्तान सिंह को राज्य सरकार के अलावा विदेशों भी सम्मान मिल चुका है। पद्मश्री मिलना अपने आप में बहुत ही गर्व की बात है।
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खुद स्थापित किया मचली बीज हैचरी
नीलोखड़ी के छोटे से गांव बुटाना में सुल्तान सिंह का किसान परिवार में 1963 में जन्म हुआ था। उनके परिवार के लोग शुरू से ही परंपरागत खेती करते थे, लेकिन सुल्तान सिंह में परिवार से हटकर कुछ अलग करने का जज्बा था। इसलिए उन्होंने अपनी बीए की पढ़ाई के दौरान ही मछली पालन की ओर काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद वह केवीएफ के संपर्क में आए, जहां डॉ. मारकंडे ने उन्हें मछली बीज उत्पादन का प्रशिक्षण दिया और सुल्तान सिंह ने उत्तर भारत की पहली मछली बीज हैचरी का निर्माण किया और बीज बेचने का काम शुरू कर दिया। इसके अलावा इन्होंने राजस्थान एवं महाराष्ट्र में भी डैम को पट्टे पर लेकर काम शुरू किया हुआ है।
क्या है रि-एक्वा सर्कुलेशन सिस्टम
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें कम भूमि में अधिक मछलियों का उत्पादन किया जा सकता है। किसान सुल्तान सिंह ने 1200 गज में इस सिस्टम को लगाया है जहां पर रिकार्ड 50 से 60 टन मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं, इस तकनीक से तैयार मछली का मार्केट में मूल्य भी अधिक मिलता है। वहीं इस तकनीक में 90 प्रतिशत पानी को री-साईकिल किया जाता है। इस तकनीक को वह किसान आसानी से अपना सकते हैं जिनके पास भूमि कम है।
क्या है रि-एक्वा सर्कुलेशन सिस्टम
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें कम भूमि में अधिक मछलियों का उत्पादन किया जा सकता है। किसान सुल्तान सिंह ने 1200 गज में इस सिस्टम को लगाया है जहां पर रिकार्ड 50 से 60 टन मछलियों का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं, इस तकनीक से तैयार मछली का मार्केट में मूल्य भी अधिक मिलता है। वहीं इस तकनीक में 90 प्रतिशत पानी को री-साईकिल किया जाता है। इस तकनीक को वह किसान आसानी से अपना सकते हैं जिनके पास भूमि कम है।
फार्म पर लगी हैं कई आधुनिक मशीनें
सुल्तान ने मछली फार्म पर मछलियों की नई किस्मों को तैयार करने के साथ-साथ अपने फार्म पर आधुनिक मशीनें भी लगाई हुई हैं। इसमें मुख्य रूप से मछली प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण किया गया है। इसमें कांटा रहित मछली उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा क्वालिटी टेस्टिंग लैब का भी निर्माण किया गया है।
20 हजार लोगों को दे चुके है प्रशिक्षण : सुल्तान सिंह
करीब 35 वर्षों से इस व्यवसाय में लगे हुए हैं। देश के हर कोने से विभिन्न कॉलेजों के छात्रों के अलावा कृषि वैज्ञानिक उनके फार्म का दौरा कर मछली पालन की तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, किसान सुल्तान सिंह अब तक करीब 20 हजार लोगों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दे चुके हैं।
पहले भी दर्जनों बार हो चुके हैं सम्मानित
इससे पहले किसान सुल्तान सिंह जगजीवन राम पुरस्कार, क्वालिटी समिट अवार्ड, बेस्ट इन्कमबेंसी अवार्ड, प्रगतिशील किसान अवार्ड, बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड, बेस्ट इनोवेटिव किसान अवार्ड, कर्म भूमि सम्मान फार्मर अवार्ड, आईडियल परनेल्टी अवार्ड के अलावा दर्जनों बार राज्य सरकार एवं विदेशों में सम्मानित हो चुके हैं।
20 हजार लोगों को दे चुके है प्रशिक्षण : सुल्तान सिंह
करीब 35 वर्षों से इस व्यवसाय में लगे हुए हैं। देश के हर कोने से विभिन्न कॉलेजों के छात्रों के अलावा कृषि वैज्ञानिक उनके फार्म का दौरा कर मछली पालन की तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, किसान सुल्तान सिंह अब तक करीब 20 हजार लोगों को नि:शुल्क प्रशिक्षण भी दे चुके हैं।
पहले भी दर्जनों बार हो चुके हैं सम्मानित
इससे पहले किसान सुल्तान सिंह जगजीवन राम पुरस्कार, क्वालिटी समिट अवार्ड, बेस्ट इन्कमबेंसी अवार्ड, प्रगतिशील किसान अवार्ड, बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड, बेस्ट इनोवेटिव किसान अवार्ड, कर्म भूमि सम्मान फार्मर अवार्ड, आईडियल परनेल्टी अवार्ड के अलावा दर्जनों बार राज्य सरकार एवं विदेशों में सम्मानित हो चुके हैं।