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Chandigarh News: देवसर धाम के पुजारियों को ही स्वामित्व, पंचायत की याचिका को हाईकोर्ट ने किया खारिज
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-भिवानी के देवसर धाम को लेकर एसडीएम के फैसले पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
-1957 में सिविल कोर्ट मंदिर पर पंचायत का दावा कर चुका है खारिज, एसडीएम ने प्रबंधन के लिए बनाई थी कमेटी
-अतिरिक्त जिला जज ने एसडीएम का फैसला कर दिया था खारिज, पंचायत ने इसे दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भिवानी के विख्यात देवसर धाम के पुजारियों को ही मंदिर के प्रबंधन का हकदार मानते हुए पंचायत की ओर से अतिरिक्त जिला जज के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
ग्राम पंचायत देवसर की ओर से एसडीएम को एक शिकायत दी गई थी और इसके आधार पर एसडीएम ने 28 सितंबर 2023 को मंदिर के प्रबंधन के लिए कमेटी गठित कर दी थी और चढ़ावे की राशि के लिए अलग बैंक अकाउंट खोलने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मंदिर का प्रबंधन करने वाले एक ब्राह्मण व एक ठाकुर परिवार ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। सेशन कोर्ट ने 17 अक्तूबर 2023 को एसडीएम के फैसले को रद्द करते हुए मामला फिर से निर्णय लेने के लिए उनके पास वापस भेज दिया था और गठित की गई कमेटी भी भंग करने का आदेश दिया था।
इस फैसले को पंचायत ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अतिरिक्त जिला जज के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। मंदिर प्रबंधन की ओर से सीनियर एडवोकेट बिपिन घई व एडवोकेट निखिल घई पेश हुए और बताया कि मालिकाना हक को लेकर सिविल जज ने 1957 में फैसला दे दिया था कि इस भूमि पर पंचायत का कोई हक नहीं है। इसके बावजूद पंचायत ने शिकायत दाखिल की और एसडीएम ने गलत तरीके से पंचायत के हक में आदेश जारी कर दिया। सभी तथ्यों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने पंचायत की याचिका को सिरे से खारिज करते हुए मंदिर प्रबंधन के हक में फैसला सुनाया है।
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-1957 में सिविल कोर्ट मंदिर पर पंचायत का दावा कर चुका है खारिज, एसडीएम ने प्रबंधन के लिए बनाई थी कमेटी
-अतिरिक्त जिला जज ने एसडीएम का फैसला कर दिया था खारिज, पंचायत ने इसे दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भिवानी के विख्यात देवसर धाम के पुजारियों को ही मंदिर के प्रबंधन का हकदार मानते हुए पंचायत की ओर से अतिरिक्त जिला जज के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
ग्राम पंचायत देवसर की ओर से एसडीएम को एक शिकायत दी गई थी और इसके आधार पर एसडीएम ने 28 सितंबर 2023 को मंदिर के प्रबंधन के लिए कमेटी गठित कर दी थी और चढ़ावे की राशि के लिए अलग बैंक अकाउंट खोलने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मंदिर का प्रबंधन करने वाले एक ब्राह्मण व एक ठाकुर परिवार ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। सेशन कोर्ट ने 17 अक्तूबर 2023 को एसडीएम के फैसले को रद्द करते हुए मामला फिर से निर्णय लेने के लिए उनके पास वापस भेज दिया था और गठित की गई कमेटी भी भंग करने का आदेश दिया था।
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इस फैसले को पंचायत ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अतिरिक्त जिला जज के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। मंदिर प्रबंधन की ओर से सीनियर एडवोकेट बिपिन घई व एडवोकेट निखिल घई पेश हुए और बताया कि मालिकाना हक को लेकर सिविल जज ने 1957 में फैसला दे दिया था कि इस भूमि पर पंचायत का कोई हक नहीं है। इसके बावजूद पंचायत ने शिकायत दाखिल की और एसडीएम ने गलत तरीके से पंचायत के हक में आदेश जारी कर दिया। सभी तथ्यों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने पंचायत की याचिका को सिरे से खारिज करते हुए मंदिर प्रबंधन के हक में फैसला सुनाया है।
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