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Chandigarh News: स्टार्टअप पॉलिसी के लिए दस हजार करोड़ की समग्र निधि, बनेगी इनोवेशन काउंसिल

Tue, 24 Oct 2023 02:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Oct 2023 02:26 AM IST
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Overall fund of Rs 10,000 crore for startup policy, Innovation Council will be formed.
स्टार्ट अप पॉलिसी को लेकर बैठक की अध्यक्षता करते प्रशासक के सलाहकार डॉ. धर्मपाल। फोटो : डीपीआर
चंडीगढ़। शहर में स्टार्टअप पॉलिसी लागू करने की कवायद तेज हो गई है। इस पॉलिसी के तहत चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में इनोवेशन काउंसिल की स्थापना करने का भी निर्णय लिया है। साथ ही इस पॉलिसी के लिए दस हजार करोड़ की समग्र निधि (कार्पस फंड) रखी है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल की अध्यक्षता में सोमवार को यूटी सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें उद्योग विभाग ने स्टार्टअप पॉलिसी को लेकर विस्तृत प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) दी। इसके बाद धर्मपाल ने पॉलिसी में आवश्यक संशोधन का सुझाव देते हुए इसे दोबारा पेश करने का निर्देश दिया।
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स्टार्टअप इंडिया की तर्ज पर बन रही शहर की अपनी स्टार्टअप पॉलिसी बन रह है, हालांकि इसके लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ेगा। सोमवार को हुई बैठक में ड्राफ्ट पॉलिसी में कुछ नए बिंदुओं को शामिल करने पर सहमति बनी। इसके तहत चंडीगढ़ प्रशासन ने चंडीगढ़ इनोवेशन काउंसिल की स्थापना करने का निर्णय लिया है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और आईटी जैसे क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की पहल की जाएगी।
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इनोवेशन काउंसिल में छात्रों और संकाय के लिए राष्ट्रीय नवाचार और स्टार्टअप नीति के अनुरूप ही वार्षिक स्टार्टअप नीति कोष से एक विशिष्ट हिस्से का आवंटन किया जाएगा। इसके तहत उच्च शैक्षणिक संस्थानों के में युवा नवप्रवर्तकों (इनोवेटर्स) के बीच रिसर्च आइडिया यानी विचारों को प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमशीलता पर जोर देते हुए चंडीगढ़ में तकनीकी शिक्षा संस्थानों के भीतर मौजूदा इनक्यूबेटरों को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। स्टार्टअप पॉलिसी को लेकर आयोजित बैठक में आईटी सचिव नितिन यादव, उद्योग सचिव हरगुनजीत कौर, उद्योग निदेशक पवित्र सिंह और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य उच्च अधिकारी मौजूद रहे।
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विद्यार्थियों को इंसेंटिव, उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस सेंटर
स्टार्टअप पॉलिसी को पूरी तरह से लागू करने के लिए एक पैनल बनाया गया है। इसमें फंडिंग स्ट्रेटजी, कंपनी रजिस्ट्रेशन, बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, अकाउंटिंग और टैक्सेशन, लीगल और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों के विशेषज्ञता शामिल रहेंगे। विद्यार्थियों को इंसेंटिव दिया जाएगा और उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस सेंटर भी खोले जाएंगे। इसमें प्रशासन पंजीकृत स्टार्टअप को 60 हजार से लेकर 25 लाख रुपये तक का का कॉलेटरल फ्री लोन प्रदान करने का प्रावधान रखा गया है। यह रकम पहले कुछ वर्षों के लिए ब्याज मुक्त होगी, जिसके बाद बहुत कम दर पर ब्याज लगेगा। उद्योग विभाग की सचिव हरगुनजीत कौर ने बताया कि कि नीति लगभग तैयार है। बैठक में इसमें नए सुझावों को शामिल करने पर सहमति बनी है, जिसके तहत आगामी 15 दिन के भीतर सलाहकार के समक्ष प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद नीति को मंजूरी के लिए चंडीगढ़ के प्रशासक को भेजा जाएगा।
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