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Chandigarh News: बजट से केंद्रीय कर्मचारियों को आस, मांगें मनवाने के लिए संगठन एक्टिव
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ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन ने लिखा केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र
बजट में 8वें पे कमीशन, पुरानी पेंशन व इनकम टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ाई तो होगा आंदोलन : सुभाष लांबा
चंडीगढ़। आगामी केंद्रीय बजट से केंद्रीय कर्मचारियों को खासी आस है। अपनी लंबित मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारी संगठन भी एक्टिव हो गए हैं। ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन ने केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण को पत्र लिखकर 2025-26 के केंद्रीय आम बजट में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स की मांगों को शामिल करने की मांग की है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि 24 राज्यों में केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को ही लागू किया जाता है। सेंट्रल पे कमीशन को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब एक साल का समय लगता है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से सिफारिशों को लागू किया जाना है। लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें सेंट्रल पे कमीशन का गठन तक नहीं किया है। ऐसे में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में भारी आक्रोश है। उन्होंने बताया कि कोविड 19 में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के 18 महीने के डीए, डीआर को अभी तक रिलीज नहीं किया गया है। बजट में सभी बकाया डीए, डीआर की रिलीज करने की घोषणा करने का फैसला लिया जाना चाहिए। कहा कि आयकर छूट की सीमा न बढ़ने से ग्रुप डी व पेंशनर्स तक आयकर दायरे में आ गए हैं। सरकार कारपोरेट टेक्स में तो भारी छूट देती जा रही है और कारपोरेट घरानों के लाखों-करोड़ों के कर्ज को राइट ऑफ किया जा रहा है। लेकिन आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नेशनल मुद्रीकरण पाइपलाइन के नाम पर सरकारी विभागों को सिकोड़ा जा रहा है और पीएसयू को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। जनता की परिस्थितियों को कारपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। चंडीगढ़ बिजली डिपार्टमेंट व उप्र डिस्कॉम को निजी हाथों में सौंपने के ताजा हमले के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बजट में इस पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। सुभाष लांबा ने बताया कि अगर केन्द्रीय बजट में उपरोक्त मांगों को एड्रेस नहीं किया तो केंद्र एवं राज्य कर्मचारी राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज करने पर मजबूर होंगे।
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बजट में 8वें पे कमीशन, पुरानी पेंशन व इनकम टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ाई तो होगा आंदोलन : सुभाष लांबा
चंडीगढ़। आगामी केंद्रीय बजट से केंद्रीय कर्मचारियों को खासी आस है। अपनी लंबित मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारी संगठन भी एक्टिव हो गए हैं। ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन ने केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण को पत्र लिखकर 2025-26 के केंद्रीय आम बजट में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स की मांगों को शामिल करने की मांग की है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि 24 राज्यों में केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को ही लागू किया जाता है। सेंट्रल पे कमीशन को अपनी रिपोर्ट तैयार करने में करीब एक साल का समय लगता है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से सिफारिशों को लागू किया जाना है। लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें सेंट्रल पे कमीशन का गठन तक नहीं किया है। ऐसे में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में भारी आक्रोश है। उन्होंने बताया कि कोविड 19 में कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के 18 महीने के डीए, डीआर को अभी तक रिलीज नहीं किया गया है। बजट में सभी बकाया डीए, डीआर की रिलीज करने की घोषणा करने का फैसला लिया जाना चाहिए। कहा कि आयकर छूट की सीमा न बढ़ने से ग्रुप डी व पेंशनर्स तक आयकर दायरे में आ गए हैं। सरकार कारपोरेट टेक्स में तो भारी छूट देती जा रही है और कारपोरेट घरानों के लाखों-करोड़ों के कर्ज को राइट ऑफ किया जा रहा है। लेकिन आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नेशनल मुद्रीकरण पाइपलाइन के नाम पर सरकारी विभागों को सिकोड़ा जा रहा है और पीएसयू को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। जनता की परिस्थितियों को कारपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। चंडीगढ़ बिजली डिपार्टमेंट व उप्र डिस्कॉम को निजी हाथों में सौंपने के ताजा हमले के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बजट में इस पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। सुभाष लांबा ने बताया कि अगर केन्द्रीय बजट में उपरोक्त मांगों को एड्रेस नहीं किया तो केंद्र एवं राज्य कर्मचारी राष्ट्रव्यापी आंदोलन तेज करने पर मजबूर होंगे।
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