Chandigarh: पीक्यूएनके मॉडल से जैविक खेती करना आसान, पीयू के प्रो. विनोद ने डिजाइन की मशीनें
पीक्यूएनके एक जैविक खेती करने का तरीका है, जिसमें सब सॉयलर मशीन के जरिए जमीन को तीन फीट गहरा काटा जाता है ताकि मिट्टी की सख्त परत हट जाए और पानी अंदर तक रिस सके। इसके बाद ट्रैक्टर पर सीलर मशीन के जरिए बीच में क्यारियां तैयार की जाती हैं, जिस पर बिजाई की जा सके।
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खेती के लिए किसानों को अब न रसायनों पर पैसा खर्च करने की जरूरत है और न पानी की खपत की समस्या। पैदार कुदरती निजामे काश्तकारी (पीक्यूएनके) मॉडल के जरिए किसानों का जैविक खेती करना आसान हो गया है। इसे अपनाकर देश के किसान लाभ कमा रहे हैं। इस तकनीक को पाकिस्तान के डॉ. आसिफ ने विकसित किया है। इनके लिए पीयू के प्रो. विनोद ने मशीनें डिजाइन की हैं।
क्या है पीक्यूएनके तकनीक
पीक्यूएनके एक जैविक खेती करने का तरीका है, जिसमें सब सॉयलर मशीन के जरिए जमीन को तीन फीट गहरा काटा जाता है ताकि मिट्टी की सख्त परत हट जाए और पानी अंदर तक रिस सके। इसके बाद ट्रैक्टर पर सीलर मशीन के जरिए बीच में क्यारियां तैयार की जाती हैं, जिस पर बिजाई की जा सके। पानी को पूरे खेत में डालने की जगह सिर्फ क्यारियों की दोनों तरफ डाला जाता है और अंत में मल्चिंग होती है। मॉडल की खासियत यह है कि एक बार क्यारियां तैयार करने पर वह जीवनभर काम आती हैं और इसमें ट्रैक्टर का कम प्रयोग रहता है। जमीन को एक बार गहरा काट देने से ग्राउंड वाटर रिचार्ज आसानी से होता है। नीचे के सारे न्यूट्रिएंट फसल को मिलते हैं।
40 साल पहले बना था माॅडल
पीक्यूएनके मॉडल को पाकिस्तान के डॉ. आसिफ ने करीब 40 साल पहले विकसित किया है। नौ साल पहले प्रो. विनोद ने उनके साथ मिलकर इस पर काम करना शुरू किया। प्रो. विनोद ने पीक्यूएनके मॉडल को अपनाने के लिए सब सॉयलर, सीलर और मल्चिंग मशीन डिजाइन की। स्वयं इस मॉडल को अपनाने के साथ अन्य किसानों को इसकी ट्रेनिंग देना शुरू किया। अभी अबोहर, फाजिल्का, करनाल, फतेहाबाद, लुधियाना समेत राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से किसान प्रो. विनोद के साथ जुड़े हैं, जो जैविक खेती के लिए पीक्यूएनके मॉडल को अपना रहे हैं।
प्रो. विनोद ने बताया नौ साल पहले खेती करने के लिए श्रेष्ठ तकनीक का पता करने पर उन्हें यह सबसे बेहतर लगी, जिसमें गुरु नानक की वाणी मिली है। गुरु नानक हवा, पानी और जमीन को माता-पिता के समान के कहते हैं। उनमें रासायन मिलाना उसमें जहर मिलाने जैसा है। हमारी हवा, पानी और धरती साफ होगी तो ही हम स्वस्थ रह पाएंगे।
पीक्यूएनके मॉडल को लेकर प्रो. विनोद से भिन्न सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने निम्नलिखित जवाब दिया।
ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने में पीक्यूएनके कैसे सक्षम है?
जवाब : पंजाब के 138 ब्लॉक में से 119 में भूजल खत्म होने की कगार पर हैं। ओवर एक्सप्लोइटेशन की श्रेणी में है। इसके बावजूद खेती के लिए भूजल का अधिक प्रयोग हो रहा है। अधिक रसायन और भारी मशीनों के प्रयोग से जमीन सख्त हो गई, जिससे पानी उसमें नहीं रिस रहा। पीक्यूएनके मॉडल जमीन को गहरा खोदकर उसमें पानी के रिसने की जगह बनाती है।
कीटनाशक और उर्वरक की जरूरत क्यों नहीं?
जवाब : जमीन को गहरा काट देने से उसकी निचली सतह से फसल को न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं और केंचुए भी इसमें मदद करते हैं। खेती के इस मॉडल में पराली को जलाने की जगह उसे जमीन को कवर किया जाता है। जमीन को पराली से ढक देने से उसकी नमी बनी रहती है। तापमान संतुलित रहता है। जमीन गर्म नहीं होगी तो उसमें अधिक नमी रहेगी। पराली से ढकने पर कीड़ों जैसे केंचुओं को पनपने की जगह मिलती है और वह फसल को न्यूट्रिएंट्स देते हैं।
किसानों को साथ में कैसे जोड़ा?
जवाब : खेती के इस मॉडल को आम किसान तक पहुंचाया जा सकें। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रचार किया। स्वयं खेती करने पर आसपास के किसानों को इसके बारे में बताया। लगातार वीडियो अपलोड करके, व्हाट्सएप ग्रुप बना लोग जुड़ते गए। 1000 से अधिक किसान व्हाट्सएप ग्रुप पर जुड़े हैं। वहीं, जर्मनी, रूस, इथियोपिया और अफ्रीकन देशों में भी लोग पीक्यूएनके मॉडल को अपना रहे हैं और लगातार संपर्क में हैं।
पीक्यूएनके मॉडल के लिए मशीन डिजाइन करने के अलावा और क्या काम कर रहे हैं?
जवाब : पीक्यूएनके मॉडल में हम अलग-अलग फसल संयोजन विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिसमें हमें सफलता मिली है। बांस के साथ हल्दी, जैतून के साथ हल्दी, अदरक उगा सकते हैं। सिट्रिक फलों जैसे कीन्नू, मौसंबी के साथ मिर्च उगा सकते हैं।
एक एकड़ जमीन पर लगा सकते हैं विभिन्न फसलें
जैविक खेती के इस मॉडल में हम एक एकड़ समृद्धि फार्म के सिद्धांत को शुरू किया है। इसमें किसान एक एकड़ की जमीन पर एक समय पर अलग-अलग फसलें लगा सकते हैं, जिससे सालभर उनकी कमाई हो सके। फलों के साथ पत्तेदार सब्जियां लगा सकते हैं। साथ में गाय, भैंस, बतख या मुर्गी पालन आदि कर सकते हैं। पानी एकत्र करने के लिए बनाए जाने वाले छोटे तालाब में किसान एक-दो मछलियां रख सकते हैं, जिससे पानी साफ रहे।